सत्य भूषण शर्मा
आज का युग विज्ञान, तकनीक और प्रगति का युग है। मानव ने अंतरिक्ष से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक अभूतपूर्व उपलब्धियाँ हासिल की हैं, लेकिन दूसरी ओर कुछ ऐसी सामाजिक बुराइयाँ भी हैं जो मानव स्वास्थ्य और भविष्य को लगातार खोखला कर रही हैं। तंबाकू और निकोटिन की बढ़ती लत ऐसी ही एक गंभीर समस्या है, जो विशेष रूप से युवाओं और किशोरों के भविष्य पर गहरा संकट बनकर उभर रही है।
हर वर्ष 31 मई को मनाया जाने वाला विश्व तंबाकू निषेध दिवस हमें इस खतरे के प्रति जागरूक करने का अवसर प्रदान करता है। यह दिवस केवल तंबाकू विरोध का प्रतीक नहीं, बल्कि स्वस्थ समाज के निर्माण का संकल्प दिवस भी है। वर्तमान समय में तंबाकू उद्योग विभिन्न आकर्षक तरीकों से अपने उत्पादों को युवाओं तक पहुँचाने का प्रयास कर रहा है। रंग-बिरंगे पैकेट, आधुनिक डिज़ाइन, आकर्षक विज्ञापन और सोशल मीडिया का प्रभाव युवाओं को भ्रमित कर रहा है।
किशोरावस्था जीवन का वह दौर है जब व्यक्ति नई चीजों को जानने और अपनाने के लिए उत्सुक रहता है। इसी जिज्ञासा का लाभ उठाकर कई बार तंबाकू उत्पादों को आधुनिकता और स्टेटस सिंबल के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। परिणामस्वरूप अनेक युवा अनजाने में इस आदत के शिकार हो जाते हैं। प्रारंभ में यह केवल एक प्रयोग लगता है, लेकिन निकोटिन की लत धीरे-धीरे व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक रूप से अपने नियंत्रण में ले लेती है।
निकोटिन एक अत्यधिक नशीला रसायन है जो मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को प्रभावित करता है। इसकी आदत लग जाने पर व्यक्ति बार-बार इसके सेवन की इच्छा महसूस करता है। यही कारण है कि तंबाकू छोड़ने का प्रयास करने वाले लोगों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। निकोटिन की लत केवल शरीर को ही नहीं, बल्कि व्यक्ति की एकाग्रता, कार्यक्षमता और मानसिक संतुलन को भी प्रभावित करती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार तंबाकू सेवन कैंसर, हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारियाँ, लकवा, उच्च रक्तचाप तथा अनेक अन्य गंभीर रोगों का प्रमुख कारण है। मुख कैंसर और फेफड़ों के कैंसर के मामलों में तंबाकू की भूमिका विशेष रूप से चिंताजनक है। दुखद तथ्य यह है कि इन रोगों का शिकार होने वाले अनेक लोग अपने परिवारों को आर्थिक और मानसिक संकट में छोड़ जाते हैं।
तंबाकू की समस्या केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चिंता का विषय भी है। इसके कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है। लाखों परिवार उपचार के खर्च के कारण आर्थिक कठिनाइयों में फँस जाते हैं। राष्ट्र की उत्पादक शक्ति भी प्रभावित होती है, क्योंकि बीमार व्यक्ति अपनी पूर्ण क्षमता से कार्य नहीं कर पाता।
तंबाकू नियंत्रण के लिए सरकार द्वारा अनेक कानून और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। विद्यालयों और महाविद्यालयों को तंबाकू मुक्त बनाने के प्रयास भी सराहनीय हैं। लेकिन केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। परिवार, समाज, शिक्षण संस्थान और स्वयं युवा वर्ग को भी इस अभियान का हिस्सा बनना होगा। माता-पिता को बच्चों के साथ खुला संवाद बनाए रखना चाहिए तथा उन्हें नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराना चाहिए।
आज आवश्यकता इस बात की है कि हम तंबाकू को केवल स्वास्थ्य समस्या न मानकर सामाजिक चेतना के विषय के रूप में देखें। यदि युवा वर्ग इस लत से दूर रहता है तो वह न केवल स्वयं स्वस्थ रहेगा, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी अपनी पूरी क्षमता से योगदान दे सकेगा।
विश्व तंबाकू निषेध दिवस हमें यह संदेश देता है कि जीवन का वास्तविक आकर्षण स्वस्थ शरीर, सकारात्मक सोच और उज्ज्वल भविष्य में है, न कि किसी क्षणिक नशे में। आइए, हम सब मिलकर एक ऐसे समाज के निर्माण का संकल्प लें जहाँ युवाओं के हाथों में तंबाकू नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार और सफलता के अवसर हों।
“युवाओं का यही अभियान,
तंबाकू मुक्त बने हिन्दुस्तान।
स्वस्थ तन, निर्मल हो मन,
यही हो जीवन का सच्चा धन।”





