दीपक कुमार त्यागी
मोदीनगर : वृद्धाश्रम मोदीनगर में चल रही हनुमत कथा में 19 जून 2026 को हमुमन जी की बाल लीलाओ का सुंदर वर्णन करते हुए कथा व्यास अरविन्द भाई ओझा ने कहा माँ ही बच्चों में संस्कारों का बीजारोपण करती है बचपन में दिए गये संस्कारो का बच्चे के जीवन पर प्रभाव पड़ता है | माँ अंजना के दिए संस्कार ही हनुमान जी के जीवन में दिखाई पड़ते है।
उन्होंने आगे बोलते हुए उन्होंने कहा कि हनुमान जी गरुड़ व सम्पाती तीनो ने सूर्य को निगलने के लिए उछाल ली पर केवल हनुमान जी ही सफल हुए क्योकि उनमे अभिमान रहित ज्ञान की भूख थी। इसलिए जब हमारे जीवन में बल विद्या धन आये तो हमे अभिमान को त्याग कर सरल सहज और सजग बनना चाहिए। हमें जीवन में ऐसी वाणी बोलनी चाहिए जिससे संसार में धर्म, सुमुती और सद्गुण बढ़े।
कथा व्यास अरविन्द भाई ओझा ने क्रांतिकारी की चर्चा करते हुए कहा कि बलवन्त फड़के नौकरी से छुट्टी नहीं मिलने के कारण अंतिम समय में अपनी मां की सेवा नहीं कर सके तो उन्होंने नौकरी से त्यागपत्र देकर भारत माता की सेवा का संकल्प किया। उन्होंने कहा कि सारा संसार भगवान के वश में है और भगवान भक्त के वश में होते है। उडुपी में कनकदास ने आसुओं से पुकारा तो भगवान के मूर्ति ही घूम गयी। उन्होंने कहा कि हनुमान जी हमे बताते है की हमारे पास संपत्ति है और श्री राम हमारे जीवन में नही है तो हमारा जीवन बिलकुल ऐसे ही है जैसे वस्त्र विहीन शरीर पर आभूषण शोभा नही देते।
आज कथा में मुख्य यजमान पुरुषोत्तम लाल सोनी, ललिता सोनी कौशल वर्मा, मंजू वर्मा ने पूजन किया और वैश्य कुटुम्ब की वर्षा गुप्ता, चीनू सिंघल व अन्य सदस्यों द्वारा कथा व्यास का सम्मान किया गया और प्रसाद में शिकंजी का वितरण किया गया।





