अशोक भाटिया
तमिलनाडु की राजनीति में पर्दे के पीछे कुछ ऐसी खिचड़ी पक रही है, जिसने सुपरस्टार से नेता बने थलापति विजय की टेंशन बढ़ा दी है। खबर है कि विजय की पार्टी TVK को सत्ता से दूर रखने के लिए राज्य के दो सबसे बड़े राजनीतिक दुश्मन DMK और AIADMK एक साथ आ सकते हैं।
सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद भी विजय के लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी अभी दिल्ली दूर जैसी है। गुरुवार को विजय लगातार दूसरे दिन राज्यपाल से मिलने पहुंचे, लेकिन बात हाथ मिला लेने भर से नहीं बनी। दरअसल, तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत के लिए 118 विधायक चाहिए। विजय की पार्टी TVK के पास अभी 107 विधायक हैं, विजय खुद दो सीट जीते थे, इसलिए एक सीट छोड़ने के बाद आंकड़ा यहां तक पहुंचता है। नतीजों में टीवीके 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी तो बनी, लेकिन पेंच विजय की दोहरी जीत में फंस गया है। विजय ने दो सीटों से चुनाव जीता है, और नियम के मुताबिक एक सीट छोड़ते ही उनकी पार्टी का संख्याबल 107 रह जाएगा। कांग्रेस की 5 सीटों के समर्थन के बावजूद यह आंकड़ा 112 तक ही पहुंच पा रहा है, जो 118 के जादुई आंकड़े से 6 कम है। पहले खबर थी कि विजय 7 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे, लेकिन अब पर्याप्त संख्याबल न होने के कारण शपथ ग्रहण टलने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं।कांग्रेस के 5 विधायकों ने उन्हें साथ दिया है, यानी कुल स्कोर 112 तक पहुंचा है। मैजिक फिगर (118) तक पहुंचने के लिए अभी भी 6 विधायक कम पड़ रहे हैं। राज्यपाल ने साफ कह दिया है कि ‘जब तक 118 का लेटर नहीं दिखाओगे, शपथ नहीं होगी।’ विजय ने इसके लिए थोड़ा समय मांगा है, लेकिन यही समय उनके विरोधियों के लिए मौका बन गया है।
सोशल मीडिया और मीडिया गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा DMK और AIADMK की ‘सीक्रेट डील’ की है। कहा जा रहा है कि विजय को रोकने के लिए दोनों पार्टियां बैकचैनल यानी चोरी-छिपे बातचीत कर रही हैं। चर्चा है कि AIADMK सरकार बनाएगी और DMK उसे बाहर से समर्थन देगी। अगर ऐसा होता है, तो यह तमिलनाडु के इतिहास का सबसे बड़ा राजनीतिक उलटफेर होगा।
इधर जैसे ही राज्य में दो धुर-विरोधी दलों के गठबंधन की सुगबुगाहट बढ़ी, ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ की एंट्री हो गई। AIADMK के 28 विधायकों को आनन-फानन में पुडुचेरी के एक प्राइवेट रिसॉर्ट में शिफ्ट कर दिया गया है। ऐसे में किसी बड़े खेल की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।सिर्फ विजय ही नहीं, बल्कि बाकी दल भी एक्टिव हैं। चेन्नई में CPI, CPM और VCK के नेताओं ने बड़ी मीटिंग की है। VCK नेता थोल तिरुमावलवन अचानक एमके स्टालिन के घर भी पहुंचे हैं। ऐसे में कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
इस बीच सबसे चौंकाने वाली खबर यह आ रही है कि दशकों से एक-दूसरे की कट्टर दुश्मन रही डीएमके (DMK) और एआईएडीएमके (AIADMK) गठबंधन की संभावनाओं पर विचार कर रही हैं। सूत्रों की मानें तो दोनों द्रविड़ दल विजय की बढ़ती ताकत को रोकने के लिए हाथ मिला सकते हैं। यदि ये दोनों धुर-विरोधी दल साथ आते हैं, तो तमिलनाडु की राजनीति में यह अब तक का सबसे बड़ा उलटफेर होगा। फिलहाल पूरी नजर राजभवन पर टिकी है कि क्या विजय जरूरी समर्थन जुटा पाएंगे या फिर तमिलनाडु की पुरानी ताकतें मिलकर नया खेल करेंगी।
गौरतलब है कि भयंकर विरोध के बावजूद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने विजय की पार्टी को समर्थन देकर पहले ही अपने पत्ते खोल दिए हैं। कांग्रेस के इस कदम ने DMK खेमे में खलबली मचा दी है, जिससे मुख्यमंत्री स्टालिन और AIADMK खेमे के बीच बातचीत की राह आसान हुई है। चेन्नई की सड़कों पर चर्चा आम है कि क्या यह गठबंधन केवल सरकार बनाने के लिए है या भविष्य में फिल्म स्टार्स की राजनीति को जड़ से उखाड़ने की एक सोची-समझी रणनीति
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव को देखते हुए टीवीके ने विजय को चुनाव की सारी जिम्मेदारी दी है कि वे आगे गठबंधन के बारे में फैसला करें। इसके साथ ही पार्टी ने दो करोड़ नए सदस्यों को जोड़ने का बड़ा लक्ष्य रखा है। विजय सितंबर से दिसंबर के बीच तमिलनाडु के हर कोने का दौरा करेंगे और जनता से मिलकर समर्थन जुटाएंगे। टीवीके की इस तैयारी को देखते हुए यह साफ है कि पार्टी आने वाले चुनावों में एक नई ताकत के तौर पर सामने आना चाहती है और तमिलनाडु की राजनीति में बदलाव लाने की कोशिश कर रही है।
तमिलनाडु में नई सरकार के गठन की राह मुश्किल होती नजर आ रही है। 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थलपति विजय की टीवीके, कांग्रेस के समर्थन के साथ सरकार बनाने का दावा पेश करने राज्यपाल के पास पहुंची। लेकिन सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों की पर्याप्त संख्या नहीं होने पर राज्यपाल ने उन्हें वापस भेज दिया। इस बीच तमिलनाडु की राजनीति के दो धुर प्रतिद्वंद्वी डीएमके और एआईएडीएमके के साथ आने की खबर ने सभी को चौंका दिया।
एआईएडीएमके के सूत्रों का दावा है कि उनकी डीएमके के साथ गठबंधन को लेकर बातचीत चल रही है और अभी डीएमके की तरफ से ये फैसला होना बाकी है कि वो इस गठबंधन को लेकर क्या फैसला लेगी। अगर ये गठबंधन होता है तो ऐसे में तीन स्थितियां बनेंगी। इनमें पहली स्थिति बनने की संभावना बहुत मुश्किल है, जिसमें डीएमके गठबंधन और एआईएडीएमके गठबंधन हो जाए। ये इसलिए मुश्किल है क्योंकि डीएमके में कांग्रेस है और एआईएडीएमके में बीजेपी है।
इस बीच तमिलनाडु के सियासी गेम में अचानक भाजपा की एंट्री हो गई है। सरकार वाली फ्रेम में अब तक भाजपा नहीं थी। मगर अब भाजपा ने एआईएडीएमके को धर्मसंकट में डाल दिया है। मगर एक्टर विजय के लिए तब भी खुशखबरी ही है।जी हां, भाजपा के नए दांव से टीवीके चीफ थलापति विजय की चांद ही चांदी है। भाजपा अब चाहती है कि टीवीके की ही तमिलनाडु में सरकार बने। इसके लिए भाजपा तमिलनाडु में अपनी सहोयगी एआईएडीएमके को थलापति विजय की TVK के साथ गठबंधन के लिए जोर दे रही है। भाजपा के इस दांव से एआईएडीएमके धर्मसंकट में है। एआईएडीएमके पर टूट यानी विभाजन का खतरा मंडरा रहा है। उसे भी उद्धव ठाकरे की शिवसेना जैसा खतरा महसूस हो रहा है।
मीडिया में आ रही खबर के मुताबिक, तमिलनाडु रिजल्ट के बाद एआईएडीएमके (AIADMK) अपने सबसे गंभीर अंदरूनी संकट की ओर बढ़ती दिख रही है। एआईएडीएमके विजय की टीवीके के साथ गठबंधन को लेकर धर्मसंकट में है। पार्टी के भीतर इस बात पर गहरे मतभेद उभर आए हैं कि क्या थलापति विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ (TVK) को गठबंधन सरकार बनाने में समर्थन दिया जाए या नहीं। सूत्रों का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे भाजपा बहै। भाजपा नहीं चाहती कि टीवीके और कांग्रेस का गठबंधन हो। इसके लिए भाजपा चाहती है कि एआईएडीएमके और टीवीके साथ मिलकर सरकार बनाए। इसकी वजह है भाजपा की जिद, सके तहत वह कांग्रेस को तमिलनाडु की सत्ता में आने से रोकना चाहती है।
खुद एआईएडीएमके के सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि भाजपा टॉप लीडरशिप इस बात से असहज है कि तमिलनाडु में कांग्रेस के सममर्थन से टीवीके की सरकार बन सकती है। वह भी ऐसी स्थिति में जब पड़ोसी राज्य केरल में कांग्रेस ने एक बार फिर से जोरदार वापसी की है। यही कारण है कि भाजपा नहीं चाहती कि तमिलनाडु की सत्ता में कांग्रेस की किसी भी तरह वापसी हो।
हालांकि, भाजपा के दांव से एआईएडीएमके में धर्मसंकट है। यह संकट तब और गहरा गया, जब मंगलवार रात एआईएडीएमके की वरिष्ठ नेता लीमा रोज मार्टिन ने सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया कि टीवीके और AIADMK के बीच बातचीत चल रही है। लीमा रोज मार्टिन लॉटरी किंग की पत्नी हैं। उनके बेटे पुडुचेरी से विधायक हैं और एनडीए गठबंधन का हिस्सा हैं। इसलिए एआईएडीएमके का एक खेमा चाहता है कि विजय की पार्टी संग गठबंधन हो। मगर एक खेमा चाहता है कि गठबंधन न हो। ऐसे में एआईएडीएमके में टूट का खतरा मंडरा रहा है।
इस बीच टीवीके यानी तमिलगा वेत्री कड़गम के संस्थापक विजय ने सरकार गठन पर चर्चा के लिए गुरुवार को चुनाव जीतने वाले पार्टी के नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई। यह बैठक सरकार बनाने के लिए टीवीके के बहुमत से कुछ सीट पीछे रहने की पृष्ठभूमि में हो रही है। कांग्रेस के पांच विजयी उम्मीदवारों ने टीवीके को समर्थन देने की पेशकश की है, लेकिन विजय की पार्टी को 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत नहीं मिल पा रहा है।
अगर डीएमके और एआईएडीएमके के बीच गठबंधन होता है तो ये तमिलनाडु की राजनीति के लिए अभूतपूर्व घटना होगी। साल 1967 के बाद से ही तमिलनाडु की सत्ता इन दोनों पार्टियों में से किसी एक के पास रही है। ये दोनों पार्टियां एक दूसरे की दुश्मन रही हैं। डीएमके के 1967 से सत्ता में आने के बाद से कोई राष्ट्रीय पार्टी तमिलनाडु में जगह नहीं बना सकी। उस जमाने में करुणानिधि और जयललिता की दुश्मनी का स्तर बहुत अलग था। करुणानिधि डीएमके से थे और जयललिता एआईएडीएमके से थीं। ये दोनों विधानसभा में कभी ज्यादा मुस्कुराए नहीं और अपने रिश्तों में कटुता को हमेशा कायम रखा। कहीं किसी कार्यक्रम में मंच साझा करना हो या किसी राज्य और राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में शामिल होना हो, तब भी डीएमके और एआईएडीएमके ने दूरी बनाकर रखी। डीएमके और एआईएडीएमके के नेता सिर्फ एक-दूसरे को नापसंद नहीं करते थे बल्कि दोनों एक-दूसरे से पूरी तरह नफरत करते थे। इसी नफरत में मार्च 1989 में जयललिता की विधानसभा में करुणानिधि की मौजूदगी में साड़ी खींची गई थी।
इसके अलावा करुणानिधि ने जयललिता को भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल भी भेजा था और फिर जब जयललिता सत्ता में आईं तो उन्होंने भी करुणानिधि को उनके घर से आधी रात को गिरफ्तार करवा लिया था, जिससे आप ये समझ पाएंगे कि अगर ये दो दुश्मन पार्टियां गठबंधन कर रही हैं तो इनके मकसद है इनके वर्चस्व को तोड़ने वाले थलपति विजय को सरकार बनाने से रोकना है।





