इंजीनियर अजय कुमार बियानी
दृष्टिहीन कुत्तों के लिए संवेदना का संदेश, कुत्ताप्रेमियों की जन्मदिन खुशियों ने भी दिखाई इंसानी संवेदनशीलता
दृष्टिहीन कुत्तों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर हमें याद दिलाता है कि आंखों की रोशनी चले जाने से जीवन की खुशियां समाप्त नहीं होतीं। कुत्ते देखने की क्षमता खोने के बाद भी खेल सकते हैं, घूम सकते हैं, प्यार कर सकते हैं और अपने परिवार के साथ खुशहाल जीवन जी सकते हैं। जरूरत होती है केवल थोड़े सहयोग, सुरक्षित वातावरण और भरपूर अपनापन की।
शुरुआत में दृष्टिहीन कुत्तों के लिए दुनिया जरूर बदल जाती है। वे कभी कुर्सी से टकरा जाते हैं, कभी दरवाजे पर रुककर रास्ता समझने की कोशिश करते हैं। लेकिन धीरे-धीरे उनकी सुनने और सूंघने की क्षमता उनका सहारा बन जाती है। वे आवाज पहचानते हैं, परिचित गंध से रास्ता ढूंढते हैं और स्पर्श से अपने प्रिय लोगों की मौजूदगी महसूस करते हैं।
इन कुत्तों की सबसे बड़ी विशेषता उनका हौसला है। वे अपनी कमी को अपनी जिंदगी की सीमा नहीं बनने देते। बगीचे में घूमना हो, भोजन का कटोरा ढूंढना हो या अपने मालिक की गोद में सिर रखकर आराम करना हो, वे हर काम नए तरीके से सीख लेते हैं।
फिर भी समाज में एक गलत धारणा है कि दृष्टिहीन कुत्ते सामान्य जीवन नहीं जी सकते। इसी सोच के कारण कई ऐसे कुत्ते घर पाने से वंचित रह जाते हैं। वास्तव में उन्हें केवल थोड़ी अतिरिक्त देखभाल की आवश्यकता होती है। घर में सामान की जगह बार-बार न बदलना, सीढ़ियों और खतरनाक स्थानों से सुरक्षित रखना तथा आवाज से उन्हें दिशा बताना उनके लिए काफी मददगार हो सकता है।
कुत्ताप्रेमियों ने मनाया जन्मदिन
कुत्तों के प्रति बढ़ते प्रेम और संवेदना का सुंदर उदाहरण तब देखने को मिलता है, जब कुत्ताप्रेमी अपने पालतू कुत्तों का जन्मदिन परिवार के सदस्य की तरह मनाते हैं। केक काटा जाता है, शुभकामनाएं दी जाती हैं और पूरा परिवार उसके साथ खुशियां साझा करता है।
ऐसे आयोजन केवल उत्सव नहीं होते, बल्कि यह संदेश भी देते हैं कि पशु हमारे घर में केवल सुरक्षा या मनोरंजन के लिए नहीं आते। वे परिवार का हिस्सा बनते हैं और बदले में बिना किसी स्वार्थ के प्यार और वफादारी देते हैं।
कुत्ते को शायद जन्मदिन का अर्थ समझ न आए, लेकिन अपने लोगों की आवाज, स्पर्श और प्यार वह जरूर समझता है। केक देखकर पूंछ हिलाने से लेकर उपहार के इंतजार तक उसकी खुशी पूरे परिवार के चेहरे पर मुस्कान ला देती है।
दृष्टिहीन कुत्तों के मामले में संवेदना का अर्थ केवल दया करना नहीं, बल्कि उन्हें अवसर देना है। यदि कोई ऐसा कुत्ता हमारे आसपास दिखाई दे तो उसे डराने या भगाने के बजाय सुरक्षित रास्ता देना चाहिए। संभव हो तो किसी पशु सेवा संस्था की मदद लेकर उसके उपचार और देखभाल की व्यवस्था करनी चाहिए।
कई बार एक छोटा-सा अपनापन किसी पशु की पूरी जिंदगी बदल देता है। दृष्टिहीन कुत्ता आंखों से भले ही अपने इंसान को न देख पाए, लेकिन आवाज और स्पर्श से उसे पहचान सकता है। शायद यही रिश्ता इंसान और पशु के बीच प्रेम की सबसे सच्ची तस्वीर है।
आंखों की रोशनी कम हो सकती है, लेकिन जीने की इच्छा और प्यार बांटने की क्षमता कभी कम नहीं होती। दृष्टिहीन कुत्तों की हिम्मत हमें यही सिखाती है कि जिंदगी को उसकी कमी से नहीं, उसके हौसले से पहचानना चाहिए।





