बंगालियों के राजनीतिक अधिकारों के लिए आंदोलन तेज करने का ऐलान
रविवार दिल्ली नेटवर्क
गुवाहाटी: बंगाली जातीय परिषद की तिनसुकिया जिला समिति का आज औपचारिक रूप से गठन किया गया। इस अवसर पर स्थानीय प्रमोद होटल के सभागार में एक बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता परिषद के केंद्रीय समिति के महासचिव उत्तम दास ने की। बैठक में कुल 31 सदस्यों वाली तिनसुकिया जिला समिति का गठन किया गया।
बैठक को संबोधित करते हुए परिषद के केंद्रीय समिति के अध्यक्ष चित्त पाल ने मुख्यमंत्री के हालिया बयान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने हाल ही में दावा किया है कि उनके शासनकाल में हिंदू बंगालियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है। लेकिन वास्तविक स्थिति इसके विपरीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि विस्थापित और लंबे समय से वंचित इस समुदाय के राजनीतिक अधिकारों को योजनाबद्ध तरीके से सीमित किया जा रहा है।
चित्त पाल ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से असम मंत्रिमंडल में सामान्यतः तीन-चार हिंदू बंगाली मंत्री शामिल होते रहे हैं। लेकिन वर्तमान में लगभग 70 लाख बंगालियों के प्रतिनिधित्व के लिए केवल एक मंत्री को स्थान दिया गया है। उन्होंने इसे जनसंख्या के अनुपात में उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं बताया।
उन्होंने कहा कि तिनसुकिया से सिलचर की दूरी लगभग 550 किलोमीटर और गोसाईगांव से सिलचर की दूरी करीब 640 किलोमीटर है। इसके बावजूद बराक घाटी के एक हिंदू बंगाली मंत्री को कथित रूप से केवल बराक घाटी तक सीमित रखा गया है। इसके कारण ब्रह्मपुत्र घाटी के बंगाली समाज के लोग अपनी समस्याओं और मांगों को प्रभावी ढंग से सरकार के समक्ष रखने में असमर्थ हैं। परिणामस्वरूप हिंदू बंगाली समुदाय स्वयं को राजनीतिक रूप से अभिभावकविहीन महसूस करने के लिए मजबूर है।
चित्त पाल ने आगे आरोप लगाया कि हिंदू बंगालियों को राजनीतिक दलों में उम्मीदवार बनाए जाने के अवसरों को सीमित करने के साथ-साथ बंगाली विधायकों की संख्या भी सीमित की गई है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में हिंदू बंगालियों के राजनीतिक अधिकारों की स्थापना के लिए बंगाली जातीय परिषद अपना आंदोलन और तेज करेगी।
परिषद के केंद्रीय समिति के महासचिव पंकज कुमार देव ने अपने संबोधन में बंगाली मंत्री और विधायकों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बंगाली समाज के प्रति उनकी भी जिम्मेदारी है। केवल चुनाव जीतकर सांसद या विधायक बनना ही उनका एकमात्र उद्देश्य नहीं होना चाहिए। हिंदू बंगालियों के सामाजिक-आर्थिक विकास तथा राजनीतिक अधिकारों की रक्षा के लिए मंत्री, विधायक और लोकसभा एवं राज्यसभा के सांसद सरकार के साथ बातचीत कर समुदाय की मांगों को उठाने और उन्हें हासिल करने का प्रयास कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि बराक घाटी के लिए एक नीति और ब्रह्मपुत्र घाटी के लिए दूसरी नीति अपनाया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने बराक और ब्रह्मपुत्र घाटी के बीच विभाजन की भावना को दूर कर दोनों क्षेत्रों के हिंदू बंगालियों को एकजुट करने तथा उन्हें व्यापक असम के समान हिस्सेदार के रूप में स्थापित करने का आह्वान किया।
केंद्रीय समिति के एक अन्य महासचिव उत्तम दास ने कहा कि असम के लगभग 70 लाख हिंदू बंगालियों के सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक अधिकारों की रक्षा के लिए तत्काल ‘बंगाली ऑटोनॉमस काउंसिल (सैटेलाइट)’ का गठन किया जाना चाहिए। उन्होंने बंगालियों के बीच एकता मजबूत करने के साथ-साथ असम के सभी समुदायों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध स्थापित करने पर भी जोर दिया।
केंद्रीय उपाध्यक्ष आपन दास ने कहा कि बंगालियों में एकता की कमी के कारण आज भी अनेक लोगों को ‘डी-वोटर’ का तमगा लेकर जीवन बिताना पड़ रहा है।
तिनसुकिया बंगीय विद्यालय के सेवानिवृत्त उप-प्रधानाचार्य एवं वरिष्ठ शिक्षाविद पुलकेश बसु ने अपने संबोधन में बंगला माध्यम के विद्यालयों की वर्तमान दयनीय स्थिति तथा उनकी विभिन्न समस्याओं पर प्रकाश डाला।
बैठक में शंकर दास, सुरजीत दास सहित कई अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। बैठक के अंत में उपस्थित सदस्यों एवं प्रतिनिधियों के लिए दोपहर के भोजन की भी व्यवस्था की गई थी।





