रावेल पुष्प
तिरंगा ऊँचा रहे हमारा,
भारत जग में नाम करे।
आजादी के अस्सी वर्षों का,
हर सपना साकार करे।
हिमगिरि से सागर तक गूँजे,
भारत माँ का जयगान,
वीरों के बलिदानों से ही
मिला हमें यह स्वाभिमान।
गाँधी, भगत, सुभाष की धरती,
वीरों का यह देश रहे,
सत्य, अहिंसा, प्रेम की गंगा
हर दिल में अविराम बहे
तिरंगा ऊँचा रहे हमारा,
भारत जग में नाम करे।
आजादी के अस्सी वर्षों का,
हर सपना साकार करे।
अंतरिक्ष में चाँद छू लिया,
मंगल तक भी पहुँचे हम,
विज्ञान की नई उड़ानों से
रौशन आज, हुआ हर कदम।
डिजिटल युग में बढ़ता भारत,
ये दुनिया देख रही है आज,
ज्ञान, तकनीक, नवाचार से
बदल रहा भारत का अंदाज़।
तिरंगा ऊँचा रहे हमारा,
भारत जग में नाम करे।
मेहनत, प्रतिभा,नव निर्माण से
अपना नया विहान करे।
खेतों में अन्न उगाते हाथ,
सीमा पर प्रहरी जवान,
खेलों में भी बढ़ते कदम हैं,
ऊँचा होता देश का मान।
नारी शक्ति आगे बढ़कर
कर रही नित नई उड़ान,
युवा शक्ति के सपनों में है
भारत का नव-निर्माण।
नदियाँ, पर्वत, खेत, खलिहान,
भाषाएँ,संस्कृति,और वेश
विविध रंगों में एक धड़कता
अपना प्यारा भारत देश।
दुनिया के हर मंच पर अब
गूँज रहा भारत का स्वर,
शांति, मित्रता, मानवता का
संदेश पहुँचाएँ घर-घर।
तिरंगा ऊँचा रहे हमारा,
भारत जग में नाम करे।
आजादी के अस्सी वर्षों का
भारत नव निर्माण करे।





