स्कूली बसों को टोल टैक्स से मुक्त करने व फुटपाथों एवं सार्वजनिक मार्गों से अतिक्रमण हटाने की विधान परिषद सदस्यदिनेश कुमार गोयल ने की मांग

Legislative Council Member Dinesh Kumar Goyal has demanded the exemption of school buses from toll tax and the removal of encroachments from footpaths and public roads

दीपक कुमार त्यागी

लखनऊ / गाजियाबाद : उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य दिनेश कुमार गोयल एवं विजय बहादुर पाठक ने 04 अगस्त 2026 को विधान परिषद में नियम-110 के अंतर्गत दो महत्वपूर्ण जनहित के विषय उठाते हुए प्रदेश सरकार का ध्यान आम नागरिकों की सुविधा एवं विद्यार्थियों के हित से जुड़े मुद्दों की ओर आकर्षित किया।

पहले विषय में दोनों सदस्यों ने टोल प्लाजा के आसपास स्थित विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को लाने-ले जाने वाली स्कूली बसों को टोल टैक्स से पूर्णतः मुक्त किए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन कई बार टोल प्लाजा से गुजरने के कारण स्कूल बसों पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ता है, जिसका सीधा प्रभाव विद्यार्थियों के अभिभावकों पर पड़ता है।

उन्होंने बताया कि केवल टोल शुल्क के कारण ही प्रति विद्यार्थी लगभग ₹800 से ₹850 प्रतिमाह का अतिरिक्त व्यय आता है, जबकि डीजल, चालक-परिचालक के वेतन, वाहन रखरखाव एवं अन्य खर्चों को जोड़ने पर यह व्यय लगभग ₹2,000 प्रतिमाह या उससे अधिक हो जाता है। ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से सामान्य परिवारों के लिए यह अतिरिक्त बोझ शिक्षा प्राप्त करने में बाधा बन रहा है। इसलिए अन्य राज्यों की भांति उत्तर प्रदेश में भी स्कूली बसों को टोल टैक्स से पूर्णतः मुक्त किया जाना चाहिए।

दोनों सदस्यों ने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार इन दोनों महत्वपूर्ण जनहित के विषयों पर सकारात्मक निर्णय लेकर प्रदेशवासियों को राहत प्रदान करेगी। एक ओर अतिक्रमण मुक्त एवं सुरक्षित सार्वजनिक मार्ग उपलब्ध होंगे, वहीं दूसरी ओर विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम होगा तथा शिक्षा को और अधिक प्रोत्साहन मिलेगा।

दूसरे विषय में दोनों सदस्यों ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न नगरों, विशेषकर लखनऊ, गाजियाबाद, प्रयागराज, वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर सहित अन्य शहरों में फुटपाथों, सार्वजनिक मार्गों एवं सड़कों पर लगातार बढ़ते अतिक्रमण के कारण आम नागरिकों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। पैदल यात्रियों के लिए बने फुटपाथों पर अवैध पार्किंग, अस्थायी एवं स्थायी कब्जों तथा व्यावसायिक गतिविधियों के चलते महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों एवं स्कूली बच्चों का सुरक्षित आवागमन प्रभावित हो रहा है।

उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय समय-समय पर सार्वजनिक भूमि एवं फुटपाथों से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दे चुके हैं, लेकिन अनेक स्थानों पर प्रभावी एवं स्थायी कार्रवाई का अभाव दिखाई देता है। इसलिए प्रदेशव्यापी विशेष अभियान चलाकर फुटपाथों एवं सार्वजनिक मार्गों को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए, अवैध कब्जों के विरुद्ध नियमित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर कठोर विभागीय कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में पुनः अतिक्रमण न हो और नागरिकों को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके।