विनोद सिंह ‘तकियावाला‘
इक्कीसवीं सदी की वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास का सबसे महत्वपूर्ण आधार यदि कोई है तो वह ऊर्जा है।ऊर्जा अब केवल बिजली उत्पादन का विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भरता,औद्योगिक प्रतिस्पर्धा, पर्यावरण संरक्षण और वैश्विक नेतृत्व का सबसे महत्वपूर्ण पैमाना बन चुकी है। यही कारण है कि आज पूरी दुनिया जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम कर स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ रही है। जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौती, कार्बन उत्सर्जन में कमी की वैश्विक प्रतिबद्धताएँ और ऊर्जा सुरक्षा की नई आवश्यकताओं ने विश्व समुदाय को ऊर्जा संक्रमण (एनर्जी ट्रांजिशन) के ऐसे दौर में पहुँचा दिया है, जहाँ नवाचार ही भविष्य की दिशा तय करेगा।
भारत ने भी इस परिवर्तन को समय रहते समझा और पिछले एक दशक में ऊर्जा क्षेत्र में अनेक ऐतिहासिक कदम उठाए। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, जैव ईंधन, ऊर्जा भंडारण, विद्युत गतिशीलता तथा हरित परिवहन के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों ने उसे विश्व के अग्रणी देशों की श्रेणी में खड़ा कर दिया है। आज भारत केवल अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन का सक्रिय भागीदार और भविष्य का नेतृत्वकर्ता बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।इसी व्यापक परिप्रेक्ष्य में नई दिल्ली के भारत मंडपम में 2 से 5 नवम्बर, 2026 तक आयोजित होने जा रहा “भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एवं एक्सपो–2026” अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। “निवेश, नवाचार और प्रेरणा” (Invest • Innovate • Inspire) की थीम पर आधारित यह आयोजन केवल एक औद्योगिक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा के भविष्य का वैश्विक चिंतन-मंथन है। इसमें विभिन्न देशों के नीति-निर्माता,ऊर्जा मंत्री, वैज्ञानिक, उद्योगपति, निवेशक, स्टार्टअप, शोध संस्थान तथा अंतरराष्ट्रीय संगठन एक मंच पर एकत्र होकर आने वाले दशकों की ऊर्जा दिशा पर विचार करेंगे।
भारत के लिए यह सम्मेलन कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। एक ओर यह देश की बढ़ती आर्थिक शक्ति और वैश्विक प्रतिष्ठा का परिचायक है, तो दूसरी ओर यह दुनिया को भारत की ऊर्जा क्षमता, निवेश संभावनाओं और तकनीकी नवाचार से परिचित कराने का सशक्त अवसर भी है। जिस प्रकार जी-20 शिखर सम्मेलन के माध्यम से भारत मंडपम वैश्विक कूटनीति का प्रतीक बना था, उसी प्रकार यह आयोजन भारत को हरित ऊर्जा क्षेत्र के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव सिद्ध हो सकता है।विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) तथा संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाएँ लगातार यह संकेत दे रही हैं कि आने वाले वर्षों में वैश्विक ऊर्जा निवेश का बड़ा हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा की ओर स्थानांतरित होगा। इस परिवर्तन में भारत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि यहाँ विशाल ऊर्जा बाज़ार, अनुकूल नीतियाँ, युवा तकनीकी प्रतिभा, तीव्र औद्योगिक विकास और व्यापक निवेश संभावनाएँ उपलब्ध हैं। यही कारण है कि विश्व की अनेक अग्रणी ऊर्जा कंपनियाँ भारत को भविष्य के सबसे आकर्षक ऊर्जा निवेश गंतव्यों में शामिल कर रही हैं।
आज भारत विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है। विकसित भारत–2047 का लक्ष्य तभी साकार हो सकता है, जब देश की ऊर्जा व्यवस्था स्वच्छ, सुलभ, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बने। ऊर्जा आत्मनिर्भरता का अर्थ केवल तेल और गैस के आयात में कमी नहीं है, बल्कि ऐसी ऊर्जा व्यवस्था का निर्माण है जो पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ उद्योग, कृषि, परिवहन और आम नागरिक की आवश्यकताओं को भी समान रूप से पूरा कर सके।पिछले कुछ वर्षों में भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय विस्तार किया है। सौर ऊर्जा पार्कों की स्थापना, रूफटॉप सोलर कार्यक्रम, पवन ऊर्जा परियोजनाएँ, हरित हाइड्रोजन मिशन, बैटरी ऊर्जा भंडारण, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा तथा एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम ने ऊर्जा क्षेत्र में एक नई क्रांति का मार्ग प्रशस्त किया है। भारतीय रेलवे भी हाइड्रोजन ईंधन आधारित रेल और हरित ऊर्जा के उपयोग की दिशा में ऐतिहासिक कदम बढ़ा चुका है। यह परिवर्तन केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति का हिस्सा है।भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एवं एक्सपो–2026 का मूल संदेश भी यही है कि ऊर्जा का भविष्य केवल उत्पादन बढ़ाने में नहीं, बल्कि निवेश, अनुसंधान, नवाचार और वैश्विक सहयोग के माध्यम से नई तकनीकों को अपनाने में निहित है। सम्मेलन में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, बायो-एनर्जी, ऊर्जा दक्षता, स्मार्ट ग्रिड, बैटरी निर्माण, ग्रीन फाइनेंस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ऊर्जा प्रबंधन और ऊर्जा भंडारण जैसी अत्याधुनिक तकनीकों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है। इसके साथ ही स्टार्टअप्स और नवाचार आधारित उद्यमों को भी अपनी तकनीकों का प्रदर्शन करने का अवसर मिलेगा।भारत के लिए यह सम्मेलन केवल निवेश आकर्षित करने का माध्यम नहीं है, बल्कि “मेक इन इंडिया”, “आत्मनिर्भर भारत” और “विकसित भारत–2047” के संकल्प को गति देने वाला एक प्रभावी मंच भी है। स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में होने वाला प्रत्येक नया निवेश रोजगार सृजन, विनिर्माण क्षमता, तकनीकी अनुसंधान और निर्यात वृद्धि के नए अवसर लेकर आएगा। यही कारण है कि यह आयोजन उद्योग जगत के साथ-साथ नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों और युवा उद्यमियों के लिए भी समान रूप से महत्वपूर्ण है।भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एवं एक्सपो–2026 की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल तकनीकी उपलब्धियों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ऊर्जा क्षेत्र में वैश्विक साझेदारी और निवेश के नए अध्याय भी खोलेगा। “निवेश, नवाचार और प्रेरणा” की थीम अपने आप में यह संदेश देती है कि आने वाले वर्षों की ऊर्जा क्रांति केवल सरकारों के प्रयासों से नहीं, बल्कि उद्योग, अनुसंधान संस्थानों, स्टार्टअप, वित्तीय संस्थाओं और वैश्विक सहयोग की संयुक्त भागीदारी से आगे बढ़ेगी। भारत इस साझेदारी का स्वाभाविक केंद्र बनने की क्षमता रखता है।
वर्तमान समय में विश्व ऊर्जा क्षेत्र एक निर्णायक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। रूस–यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में तनाव, वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में व्यवधान और जीवाश्म ईंधनों की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ऊर्जा सुरक्षा अब केवल आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय रणनीति का अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है। ऐसे समय में जिन देशों ने नवीकरणीय ऊर्जा में समय रहते निवेश किया है, वे अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित स्थिति में दिखाई दे रहे हैं। भारत भी इसी दिशा में दीर्घकालिक दृष्टि के साथ आगे बढ़ रहा है।आज भारत सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जैव ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, ऊर्जा भंडारण और विद्युत गतिशीलता जैसे क्षेत्रों में तेज़ी से अपनी क्षमता का विस्तार कर रहा है। विशेष रूप से राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन भारत को भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा अर्थव्यवस्था में अग्रणी स्थान दिलाने की क्षमता रखता है। उर्वरक, इस्पात, रिफाइनरी, भारी उद्योग और परिवहन जैसे क्षेत्रों में हरित हाइड्रोजन का उपयोग कार्बन उत्सर्जन कम करने के साथ-साथ ऊर्जा आयात पर निर्भरता घटाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
भारतीय रेलवे द्वारा हाइड्रोजन ईंधन आधारित ट्रेन के सफल परीक्षण, रेलवे स्टेशनों और उत्पादन इकाइयों में सौर ऊर्जा के बढ़ते उपयोग तथा हरित ऊर्जा आधारित अधोसंरचना का विकास यह संकेत देता है कि भारत ऊर्जा परिवर्तन को केवल नीति दस्तावेज़ों तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि उसे व्यवहारिक रूप से धरातल पर उतार रहा है। यही दृष्टिकोण भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एवं एक्सपो–2026 के विमर्श का भी प्रमुख आधार बनेगा।इस सम्मेलन में ऊर्जा भंडारण (बैटरी स्टोरेज), स्मार्ट ग्रिड, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ऊर्जा प्रबंधन, इलेक्ट्रिक वाहन, ग्रीन बिल्डिंग, ऑफशोर विंड एनर्जी, ग्रीन फाइनेंस, कार्बन बाज़ार और परिपत्र अर्थव्यवस्था जैसे विषयों पर भी गंभीर चर्चा होने की संभावना है। यह केवल तकनीकी संवाद नहीं होगा, बल्कि उन नीतियों पर भी विचार होगा जो आने वाले वर्षों में विश्व ऊर्जा बाज़ार की दिशा तय करेंगी।भारत के लिए इस सम्मेलन का एक बड़ा उद्देश्य विदेशी निवेश को आकर्षित करना भी है। ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक निवेश केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उससे विनिर्माण, अनुसंधान, कौशल विकास, रोजगार, निर्यात और स्थानीय उद्योगों को भी नई गति मिलती है। भारत का विशाल उपभोक्ता बाज़ार, स्थिर लोकतांत्रिक व्यवस्था, तेज़ी से विकसित होता बुनियादी ढाँचा और सुधारोन्मुख नीतियाँ वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुकी हैं। इसलिए यह सम्मेलन भारत को विश्व की हरित ऊर्जा राजधानी के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
हालाँकि चुनौतियाँ भी कम नहीं हैं। ऊर्जा संक्रमण के लिए बड़े निवेश, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी, कुशल मानव संसाधन, मजबूत विद्युत ग्रिड, ऊर्जा भंडारण क्षमता और अनुसंधान पर निरंतर ध्यान देना होगा। नवीकरणीय ऊर्जा की अनियमित उपलब्धता, बैटरी तकनीक की लागत, महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता और वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था जैसे प्रश्न आने वाले वर्षों में नीति-निर्माताओं के सामने रहेंगे। इसलिए यह सम्मेलन केवल उपलब्धियों का उत्सव नहीं, बल्कि चुनौतियों के समाधान का भी मंच होना चाहिए।भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी युवा प्रतिभा, वैज्ञानिक क्षमता और नवाचार की संस्कृति है। यदि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, उद्योग और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को एक साझा मंच पर प्रभावी रूप से जोड़ा जाए, तो भारत केवल स्वच्छ ऊर्जा का बड़ा बाज़ार ही नहीं, बल्कि नई ऊर्जा प्रौद्योगिकियों का वैश्विक नवाचार केंद्र भी बन सकता है। “Invest, Innovate, Inspire” का मूल संदेश भी यही है कि निवेश नई संभावनाएँ पैदा करता है, नवाचार उन्हें गति देता है और प्रेरणा उन्हें जन-आंदोलन में बदल देती है।
नई दिल्ली का भारत मंडपम एक बार फिर विश्व समुदाय के स्वागत के लिए तैयार है। यह आयोजन केवल चार दिनों का कार्यक्रम नहीं होगा, बल्कि भारत की उस नई ऊर्जा दृष्टि का परिचायक बनेगा, जो आर्थिक विकास और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास कर रही है। यदि इस सम्मेलन से निवेश, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, अनुसंधान सहयोग और ठोस नीतिगत पहल को नई दिशा मिलती है, तो यह न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए लाभकारी सिद्ध होगा।
निस्संदेह, भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एवं एक्सपो–2026 भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था को आकार देने वाला एक महत्वपूर्ण वैश्विक मंच बनने की क्षमता रखता है। विकसित भारत की परिकल्पना तभी साकार होगी, जब ऊर्जा आत्मनिर्भरता, हरित प्रौद्योगिकी और सतत विकास समान गति से आगे बढ़ेंगे। इस दृष्टि से यह सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि उस नए भारत का उद्घोष है जो ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर, तकनीकी रूप से सक्षम, पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी और विश्व को दिशा देने वाला राष्ट्र बनने की ओर आत्मविश्वास के साथ अग्रसर है। यही इस सम्मेलन का सबसे बड़ा संदेश और भारत की सबसे बड़ी आशा है।





