दीपक कुमार त्यागी
गाजियाबाद : अजमीढ़जी भवन सुचेतपुरी मोदीनगर में चल रही हनुमत कथा में आज हमुमन जी की बाल लीलाओ का सुंदर वर्णन करते हुए कथा व्यास अरविन्द भाई ओझा ने कहा माँ ही बच्चे के जीवन को गढ़ती है और बचपन में दिए गये संस्कारो का बच्चे के जीवन पर प्रभाव पड़ता है यही कारण है माँ अंजना के दिए संस्कार ही हनुमान जी के जीवन में दिखाई पड़ते है। जंतर मंतर के आंदोलन के समय कन्याओं का जो अशोभनीय व्यवहार था वह हिंदू समाज के व्यवहार के अनुकूल नहीं था यह स्थिति संयुक्त परिवारों के विघटन के कारण है। आज समाज में ऐसा स्त्री वर्ग खड़ा हो रहा है जिनमें मातृत्व बनने का भाव समाप्त हो रहा है वे मातृत्व की जिम्मेदारी नहीं लेना चाहती और पुरुषोचित व्यवहार करने लगी हैं। हिन्दू समाज के लिए यह ध्यान रखने का विषय है की माताएं जितनी विद्वान होगी संस्कारित होगी समाज भी उतना ही संस्कारित होगा माता ही बच्चों को संस्कार प्रदान करती है।
कथा व्यास अरविन्द भाई ओझा आगे बोलते हुए कहा कि हनुमान जी, गरुड़ व सम्पाती तीनो ने सूर्य को पाने के लिए उछाल ली पर केवल हनुमान जी ही सफल हुए थे क्योंकि सूर्य ज्ञान के देवता हैं जो जीवन के अज्ञान के अंधेरे को मिटा देते हैं। यही अभिमान रहित ज्ञान की भूख श्री हनुमान जी को बचपन से थी। हनुमानजी जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए महाराज जी ने कहा कि हनुमानजी की भक्ति का हनुमान चालीसा ऐसा ग्रन्थ है जो हमे भगवान तक पहुचने का मन्त्र व पंथ बताता है। हनुमानजी का एक मंत्र है सेवा और उन्होंने विभीषण को यही मंत्र देते हुए कहा था मैंने इसी सेवा के बल पर भगवान राम को अपने वश में किया है। अर्थात समस्त संसार के पशु पक्षि जीव जंतु पेड़ पौधे सब में परमात्मा का वास मानकर उनकी सेवा करता है भगवान ऐसे सेवक पर प्रेम और कृपा की वर्षा करते हैं।
कथा व्यास अरविन्द भाई ओझा का विस्तार करते हुए कहा कि सारा संसार भगवान के वश में है और भगवान भक्त के वश में होते है उसी का प्रमाण है कि उडुपी में भक्त कनकदास ने आसुओ से भगवान को पुकारा तो भगवान के मूर्ति ही घूम गयी। इसलिए हनुमानजी के भक्त को ऐसी वाणी बोलनी चाहिए जिससे संसार में धर्म, सुमुती और सद्गुण बढ़े। आज कथा में यजमान वासु व राशिका, ललित मित्तल सभासद, ललित त्यागी सभासद, विक्की विश्नोई अंकित गोयल, विपुल शर्मा, रवि गोयल आदि उपस्थित रहे।





