विश्व अंगदान दिवस : मृत्यु के बाद भी किसी जरूरतमंद को जीवन देने का संकल्प

World Organ Donation Day: A pledge to give life to someone in need, even after death

सुनील कुमार महला

अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और जरूरतमंद मरीजों के जीवन बचाने के लिए अंगदान के महत्व को रेखांकित करने के क्रम में प्रतिवर्ष 13 अगस्त को

विश्व अंगदान दिवस मनाया जाता है। अंगदान का बहुत महत्व है। अंगदान के महत्व के प्रति आम लोगों को जागरूक करना, इससे जुड़े विभिन्न भ्रमों व झिझक आदि को दूर करना तथा जरूरतमंद मरीजों के जीवन को बचाने के लिए अधिक से अधिक लोगों को अंगदान का संकल्प लेने के लिए प्रेरित करना है। सरल शब्दों में कहें तो

इस दिन का मुख्य उद्देश्य लोगों को मरणोपरांत या जीवित रहते हुए स्वेच्छा से अंगदान करने के लिए प्रेरित करना और इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना है।कहना ग़लत नहीं होगा कि अंगदान एक मानवीय कार्य है,जो किसी जरूरतमंद का जीवन बचाता है। वास्तव में यह पुण्य, परोपकार का कार्य है।यह आशा की किरण है। मृत्यु के बाद दान किए गए हृदय, गुर्दे, यकृत, फेफड़े, अग्न्याशय और आंत जैसे अंग जरूरतमंद मरीजों के प्रत्यारोपण में उपयोग किए जा सकते हैं। यहां तक कि कॉर्निया और कुछ ऊतक भी दान किए जा सकते हैं।

अंगदान और इसका इतिहास:-

अंगदान के इतिहास की बात करें तो यहां पाठकों को बताता चलूं कि 20वीं शताब्दी में शल्य चिकित्सा, संक्रमण नियंत्रण, ऊतक संरक्षण और प्रतिरक्षा-विज्ञान में हुई प्रगति ने सफल अंग प्रत्यारोपण का मार्ग प्रशस्त किया। 1954 में पहला सफल मानव गुर्दा प्रत्यारोपण अमेरिका में किया गया, जिसने आधुनिक प्रत्यारोपण चिकित्सा के इतिहास में महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ा। दरअसल,वर्ष 1954 में अमेरिका में डॉक्टर जोसेफ मरे ने जुड़वां भाइयों (रोनाल्ड और रिचर्ड हेरिक) के बीच दुनिया का पहला सफल किडनी ट्रांसप्लांट किया था और बहुत कम लोग ही यह जानते होंगे कि उनकी इस ऐतिहासिक सफलता के लिए उनको 1990 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वर्ष 1990 के बाद यकृत, हृदय, फेफड़े और अन्य अंगों के प्रत्यारोपण में लगातार प्रगति हुई। हमारे देश में अंगदान और प्रत्यारोपण के लिए राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यहां पाठकों को यह भी बताता चलूं कि हमारे देश में राष्ट्रीय अंगदान दिवस प्रतिवर्ष 3 अगस्त को मनाया जाता है‌।

अंगदान दिवस की थीम, और भारत में अंग प्रत्यारोपण:-

अंगदान एक चिकित्सकीय प्रक्रिया है और इसे निर्धारित चिकित्सा मानकों के अनुसार किया जाता है। इससे शरीर का अंतिम संस्कार प्रभावित नहीं होता है। आज बहुत से लोगों के आर्गन फेल हो जाते हैं, ऐसे में यह(अंगदान) मनुष्य जीवन के लिए एक उपहार की तरह है। किसी बीमारी, एक्सीडेंट आदि के कारण आज बहुत से लोग अपने अंगों को खो देते हैं, ऐसे में, ऐसे लोगों को अंगदान करके उनका जीवन बचाया जा सकता है अथवा बेहतर स्वास्थ्य प्रदान किया जा सकता है।विश्व अंगदान दिवस का केंद्रीय संदेश हमेशा ‘स्वेच्छा से अंगदान करें और जिंदगियां बचाएं’ (डोनेट आर्गन्स, सेव लाइफ्स) के विचार पर केंद्रित रहता है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि भारत में अंग प्रत्यारोपण अधिनियम-1994 अवैध अंग व्यापार को रोकता है और केवल स्वैच्छिक एवं कानूनी दान की अनुमति देता है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2011 में इसमें महत्वपूर्ण संशोधन किए गए और 2014 में संबंधित नियम लागू हुए।

एक मृत दाता के अंगदान से 8 लोगों की जान बचाई जा सकती है:-

आज विभिन्न स्वास्थ्य एजेंसियां और अनेक स्वास्थ्य संगठन, एनजीओज़ इस दिन विशेष अभियानों के माध्यम से जन-जागरूकता, परिवार से इस विषय पर बात करने और दाता पंजीकरण (डोनर रजिस्ट्रेशन) की प्रक्रिया को आसान बनाने पर जोर देते हैं।एक उपलब्ध जानकारी के अनुसार एक मृत दाता के अंगदान से 8 लोगों की जान बचाई जा सकती है और उसके ऊतकों (टिश्यूज़) के दान से 50 से अधिक लोगों के जीवन में सुधार लाया जा सकता है।कोई स्वस्थ व्यक्ति एक किडनी या लीवर का एक हिस्सा दान कर सकता है। इतना ही नहीं, चिकित्सकों के अनुसार जब किसी व्यक्ति को चिकित्सकीय रूप से ‘ब्रेन डेड’ घोषित कर दिया जाता है, तब उसके सभी महत्वपूर्ण अंगों को प्रत्यारोपित किया जा सकता है।

पिछले कुछ समय से भारत में प्रत्यारोपण की संख्या तेजी से बढ़ी है, लेकिन मृतक अंगदान की दर अभी भी अपेक्षाकृत कम है। भारत में बड़ी संख्या में प्रत्यारोपण जीवित दाताओं से होते हैं, जबकि कई विकसित देशों में मृतक दाता प्रणाली अधिक मजबूत है। यही कारण है कि भारत में ब्रेन-स्टेम डेथ की समय पर पहचान, परिवारों में अंगदान के प्रति जागरूकता और अस्पतालों में अंग-दान समन्वय व्यवस्था को मजबूत करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

निष्कर्ष:-

वास्तव में, अंगदान केवल मृत्यु के बाद शरीर के अंगों का दान नहीं, बल्कि किसी दूसरे व्यक्ति को नया जीवन देने का महान संकल्प है। एक व्यक्ति का निर्णय कई जरूरतमंद लोगों के जीवन में उम्मीद की किरण जगा सकता है। कहना ग़लत नहीं होगा कि अंगों की कमी को दूर करने के लिए जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। समाज में अंगदान से जुड़े भ्रम और मिथकों को दूर कर अधिक से अधिक लोगों को अंगदान के लिए प्रेरित करना समय की आवश्यकता है। जैसा कि ऊपर भी इस आलेख में चर्चा कर चुका हूं कि हमारे देश में अंग प्रत्यारोपण की सुविधाएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन मृतक अंगदान को और गति देने की आवश्यकता है। इसके लिए अस्पतालों, स्वास्थ्य संस्थानों, सरकार और समाज को मिलकर प्रयास करने होंगे। निष्कर्षत: यही कहूंगा कि विश्व अंगदान दिवस हमें यह संदेश देता है कि जीवन अनमोल है और इसे बचाने में हमारा छोटा-सा संकल्प भी बड़ा परिवर्तन ला सकता है। इसलिए अंगदान के प्रति जागरूक बनें, दूसरों को प्रेरित करें और मानव जीवन बचाने की इस मुहिम का हिस्सा बनें।