निर्मल रानी
देश इन दिनों लगभग राष्ट्रव्यापी छात्र आक्रोश व आंदोलन से रूबरू है। अभी कुछ दिन पहले ही NEET पेपर लीक और राष्ट्रीय परीक्षाओं में हुई धांधली के ख़िलाफ़ 6 जून से शुरू होकर 25 जुलाई 2026 तक चला आंदोलन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के बाद ख़त्म हुआ था। इसके बाद ही झारखंड में भी जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के विरुद्ध 29 जुलाई से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्र आंदोलन की शुरुआत हुई। यहाँ भी छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, धांधली और अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच आदि मांगों को लेकर धरना, प्रदर्शन और विधानसभा घेराव जैसे कार्यक्रम कर रहे हैं। परन्तु कुछ दिनों पूर्व हुये दिल्ली के जंतर-मंतर व वर्तमान समय रांची में चल रहे छात्र आंदोलन में जहां कुछ बातें समान हैं वहीं कई बातें विरोधाभासी भी हैं। उदाहरण के तौर पर दोनों ही आंदोलन पेपर लीक और राष्ट्रीय परीक्षाओं में हुई धांधली व अनियमितताओं के ख़िलाफ़ किये गए हैं। जंतर मंतर की ही तरह रांची में भी जहाँ आंदोलनस्थल पर अनेक स्वयंसेवी लंगर चला रहे हैं व आंदोलनकारी छात्रों के दूर दराज़ बैठे समर्थक फूड ऐप्स के जरिए सीधे आंदोलन स्थल पर भोजन ऑर्डर कर रहे हैं व छात्रों को मेडिकल व अन्य सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं। यहाँ भी भोजन इतनी अधिक मात्रा में आ रहा है कि आंदोलनकारी छात्रों ने वीडियो जारी कर लोगों से कुछ दिन ऑर्डर रोकने की अपील की ताकि खाना बर्बाद न हो और बचे हुए भोजन को ज़रूरतमंदों में बांटा जा सके। इसके अलावा रांची के स्थानीय दुकानदारों और आम नागरिकों द्वारा आंदोलन स्थल पर भोजन,समोसे, बिरयानी,नाश्ता और पानी आदि पहुंचाया जा रहा है। अनशन पर बैठे छात्र नेताओं की सेहत की देखभाल के लिए रांची के सदर अस्पताल में मेडिकल टीम नियमित रूप से आंदोलन स्थल पर पहुंचकर स्वास्थ्य जांच (ब्लड प्रेशर, शुगर लेवल) कर रही है। इसके अतिरिक्त झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफ़ान अंसारी ने निर्देश जारी किया है कि आंदोलन के दौरान बीमार या चोटिल होने वाले छात्रों के इलाज का पूरा ख़र्च राज्य सरकार उठाएगी, चाहे वे सरकारी अस्पताल में इलाज कराएं या निजी अस्पताल में।
परन्तु इन दोनों अर्थात दिल्ली व रांची के आंदोलन में जो सबसे बड़ा विरोधाभास नज़र आ रहा है वह है जंतर मंतर के छात्र आंदोलन का विरोध करने वालों का रांची के आंदोलन में बढ़चढ़कर हिस्सा लेना। बड़ी हैरत की बात है कि जो वर्ग,जो संगठन और जिस विचारधारा से जुड़े लोग जंतर मंतर के आंदोलनकारियों को देशद्रोही, बदतमीज़, गटर जनरेशन,गलियां बोलने व अपशब्द इस्तेमाल करने वालों का झुण्ड,विदेशी फ़ंडिंग से चलने वाला आंदोलन बता रहे थे, दिल्ली के आंदोलन में जो लोग हिन्दू-मुस्लिम का दृष्टिकोण ढूंढ रहे थे,जिन्हें दिल्ली के आंदोलन कारी आवारा व चरित्रहीन नज़र आ रहे थे वही लोग वही वर्ग और वही विचारधारा रांची के छात्र आंदोलन में कुछ इसतरह बढ़चढ़कर हिस्सा लेने को उतावली है गोया रांची का आंदोलन छात्र आंदोलन के बजाये देश का दूसरा ‘स्वाधीनता संग्राम’ हो? याद कीजिये कि जंतर मंतर आंदोलन के संदर्भ में ही एक हिंदुत्व विचारक और केरल भाजपा के बौद्धिक प्रकोष्ठ के पूर्व प्रमुख टीजी मोहनदास ने कहा था कि ‘अगर स्थिति उनके नियंत्रण में होती, तो वे नई दिल्ली के आंदोलन स्थल के आसपास कर्फ़्यू लगाकर प्रदर्शनकारियों पर गोली चलवा देते’। इस व्यक्ति ने प्रदर्शन में शामिल धर्मनिरपेक्ष और वामपंथी विचारधारा वाली छात्राओं व महिलाओं के साथ रेप करवाने जैसी बेहद अमर्यादित और आपत्तिजनक टिप्पणियां भी की थीं। साथ ही ‘गोदी मीडिया ‘ के नाम से बदनाम सत्ता का पिछलग्गू मीडिया भी जो जंतर मंतर आंदोलन से या तो मुंह मोड़े हुआ था या इसी आंदोलन विरोधी वर्ग की तरह आंदोलन में केवल नकारात्मकता तलाश रहा था,जिसे संसद भवन के पास चल रहा इतना बड़ा छात्र आंदोलन नज़र नहीं आ रहा था वही मीडिया रांची में डेरा जमाये हुये है और अपने तरीक़े से छात्र आंदोलन का नरेटिव सेट करने में लगा है। इस दोहरेपन का केवल एक ही कारण है कि दिल्ली में केंद्र व दिल्ली राज्य, दोनों ही जगह भारतीय जनता पार्टी की सरकारें हैं जबकि झारखण्ड में झारखंड मुक्ति मोर्चा , कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल, के गठबंधन यानी इण्डिया गठबंधन की सरकार है और झामुमो के हेमंत सोरेन इस सरकार के मुख्यमंत्री हैं। इसलिये इनका समर्थन छात्र आंदोलन को नहीं बल्कि यह झारखण्ड में इण्डिया गठबंधन की सरकार का विरोध कर रहे हैं।
इस अवसरवादी विचारधारा का विरोध करने वालों का चेहरा रांची में उस समय भी बेनक़ाब हुआ जबकि जंतर मंतर के आंदोलन का एक प्रमुख चेहरा और वहां अनशन पर बैठने वाली अखिल भारतीय छात्र संगठन AISA की केंद्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा जब हज़ारों छात्रों के साथ विधानसभा के लिये मार्च निकाल रही थीं उस समय एक युवक ने नेहा पर स्याही फेंक कर छात्र आंदोलन को समर्थन देने की अपनी हक़ीक़त को उजागर कर दिया। घटना के तुरंत बाद मौक़े पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों और प्रदर्शनकारियों ने युवक को पकड़कर उसकी पिटाई की और फिर पुलिस के हवाले कर दिया और पुलिस ने आरोपी युवक को गिरफ़्तार कर जेल भेज दिया। नेहा बोरा ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिनके पास तर्क या बहस की क्षमता नहीं होती, वे ऐसी हरकतों पर उतर आते हैं। उन्होंने इस हमले के पीछे भाजपा और आरएसएस से जुड़े लोगों का हाथ होने का आरोप लगाया। ग़ौरतलब है कि नेहा बोरा व उनका संगठन अखिल भारतीय छात्र संगठन AISA जंतर मंतर के आंदोलन में भी शामिल था और उसी उत्साह के साथ रांची में भी सक्रिय है। जबकि रांची में छात्र आंदोलन का मुख्य चेहरा बनने की इच्छा पालने वाले लोग जंतर मंतर में न केवल लापता थे बल्कि उसके विरोध में भी खड़े थे। कहा जा सकता है कि जंतर मंतर व रांची दोनों जगह छात्र आंदोलन व उनकी मांगें व समस्याएँ तो लगभग एक हैं परन्तु उनके अनेक रूप देखे जा रहे हैं।





