डिजिटल नशे पर नियंत्रण जरूरी

Controlling digital addiction is essential

डॉ. विजय गर्ग

डिजिटल तकनीक ने हमारे जीवन को पूरी तरह बदल दिया है। स्मार्टफोन, सोशल मीडिया, ऑनलाइन शिक्षा, मनोरंजन के डिजिटल प्लेटफॉर्म और कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने जानकारी तथा अनेक सेवाओं को हमारी उंगलियों तक पहुँचा दिया है। तकनीक निस्संदेह एक शक्तिशाली साधन है, लेकिन इसका अत्यधिक और अनियंत्रित उपयोग धीरे-धीरे एक प्रकार के नशे में बदल सकता है। डिजिटल नशे की यह बढ़ती समस्या गंभीर ध्यान की मांग करती है।

आज बहुत से लोग अपने दिन की शुरुआत और अंत स्क्रीन देखकर करते हैं। बच्चे घंटों वीडियो देखने या ऑनलाइन गेम खेलने में बिताते हैं। विद्यार्थी पढ़ाई के दौरान बार-बार सोशल मीडिया देखते हैं, जबकि वयस्क काम और मनोरंजन के लिए लगातार मोबाइल से जुड़े रहते हैं। जो चीज सुविधा के रूप में शुरू होती है, वह धीरे-धीरे ऐसी आदत बन सकती है जिस पर नियंत्रण रखना कठिन हो जाता है।

सबसे बड़ी चिंता बच्चों और युवाओं पर इसके प्रभाव को लेकर है। अत्यधिक स्क्रीन का उपयोग शारीरिक गतिविधियों को कम कर सकता है, नींद को प्रभावित कर सकता है और एकाग्रता में बाधा डाल सकता है। जो विद्यार्थी पढ़ाई, सोशल मीडिया, गेम और मनोरंजन के बीच लगातार अपना ध्यान बदलते रहते हैं, उनके लिए गहरी एकाग्रता और धैर्य विकसित करना कठिन हो सकता है। पुस्तक पढ़ने, बाहर खेलने या आमने-सामने बातचीत करने के बजाय वे डिजिटल स्क्रीन से मिलने वाले त्वरित मनोरंजन को अधिक पसंद करने लगते हैं।

डिजिटल नशा हमारे पारिवारिक और सामाजिक संबंधों को भी प्रभावित कर सकता है। परिवार के सदस्य एक ही स्थान पर बैठे होते हैं, लेकिन प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने मोबाइल में व्यस्त रहता है। सार्थक बातचीत कम होने लगती है और व्यक्तिगत संपर्क धीरे-धीरे कमजोर पड़ सकता है। लोगों को जोड़ने के लिए बनाया गया उपकरण कभी-कभी उनके बीच भावनात्मक दूरी भी पैदा कर सकता है।

एक अन्य गंभीर समस्या लगातार आने वाले नोटिफिकेशन, छोटी वीडियो और ऑनलाइन सामग्री का अंतहीन चक्र है। डिजिटल प्लेटफॉर्म इस तरह बनाए जाते हैं कि उपयोगकर्ता अधिक समय तक उनसे जुड़े रहें। परिणामस्वरूप लोग समय का ध्यान खो सकते हैं और बिना किसी वास्तविक आवश्यकता के बार-बार अपना मोबाइल देखने लगते हैं।

इस समस्या का समाधान तकनीक को पूरी तरह छोड़ देना नहीं है। आधुनिक शिक्षा, संचार, रोजगार, अनुसंधान और नवाचार के लिए तकनीक अत्यंत आवश्यक है। वास्तविक आवश्यकता यह है कि हम तकनीक का विवेकपूर्ण उपयोग करें, न कि तकनीक हमारे जीवन को नियंत्रित करने लगे।

माता-पिता को घर में स्वस्थ डिजिटल आदतें विकसित करनी चाहिए। बच्चों के लिए कुछ निश्चित समय स्क्रीन-मुक्त होना चाहिए, विशेषकर भोजन के समय और सोने से पहले। विद्यालयों में भी विद्यार्थियों को तकनीक के जिम्मेदार उपयोग तथा ऑनलाइन और वास्तविक जीवन के बीच संतुलन के महत्व के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए। वयस्कों को भी अपनी स्क्रीन आदतों पर नियंत्रण रखकर बच्चों के सामने अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।

कुछ सरल उपाय बड़ा बदलाव ला सकते हैं—पढ़ाई के समय मोबाइल को दूर रखना, अनावश्यक नोटिफिकेशन बंद करना, नियमित अंतराल पर स्क्रीन से ब्रेक लेना, बाहर समय बिताना, किताबें पढ़ना, अपनी रुचियों और शौक को विकसित करना तथा परिवार के साथ आमने-सामने बातचीत करना। प्रतिदिन कुछ समय का डिजिटल डिटॉक्स भी व्यक्ति को अपने समय और ध्यान पर दोबारा नियंत्रण पाने में मदद कर सकता है।

तकनीक का उद्देश्य जीवन को बेहतर बनाना है, पूरे जीवन को अपने नियंत्रण में लेना नहीं। स्मार्टफोन हमारे हाथ में एक साधन रहना चाहिए, हमारे ध्यान और समय का मालिक नहीं बनना चाहिए।

डिजिटल युग हमारे सामने अपार अवसर लेकर आया है, लेकिन इन अवसरों के साथ जिम्मेदारी और आत्म-अनुशासन भी आवश्यक हैं। हमें कम तकनीक की नहीं, बल्कि तकनीक के अधिक समझदारीपूर्ण उपयोग की आवश्यकता है। आज डिजिटल नशे पर नियंत्रण करके हम कल एक अधिक स्वस्थ, एकाग्र और आपसी रूप से जुड़ा हुआ समाज बना सकते हैं।