पंडित शिवगुरु — ज्योतिषाचार्य एवं कथा प्रवक्ता
श्रावण मास भगवान भोले बाबा शिव की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। श्रावण मास की शिवरात्रि पर श्रद्धा से शिवलिंग का पूजन अभिषेक, मंत्र-जप, बेलपत्र अर्पण और रात्रि में शिव-पूजन करने की परंपरा है। शिवरात्रि की पूजा में रात्रि को प्रहरों में विभाजित करके पूजा करने का विधान भी मिलता है।
शिवरात्रि की महिमा कि श्रावण में भगवान शिव की भक्ति करने से साधक को मन की और शांति, आध्यात्मिक उन्नति और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस महीने में सोमवार, प्रदोष और शिवरात्रि जैसे अवसरों पर शिव-आराधना का विशेष महत्व माना जाता है।
शिवरात्रि पर्व का मुख्य संदेश:
“भक्ति में दिखावा नहीं, श्रद्धा और समर्पण आवश्यक है।”
सरल पूजा-विधि
पूजा सामग्री:
जल/गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी, बेलपत्र, पुष्प, अक्षत, चंदन, धूप, दीप और फल।
पूजन क्रम:
प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
भगवान शिव का ध्यान करके पूजा का संकल्प लें।
शिवलिंग पर स्वच्छ जल एवं गंगाजल चढ़ाएं।
श्रद्धानुसार दूध आदि से अभिषेक करें।
बेलपत्र, पुष्प और अक्षत अर्पित करें।
धूप-दीप जलाकर शिवजी की आरती करें।
“ॐ नमः शिवाय” का यथाशक्ति जप करें।
शिव चालीसा, लिंगाष्टकम अथवा शिव महिम्न स्तोत्र का पाठ करें।
रात्रि में संभव हो तो चार प्रहर में शिव-पूजन करें।
चार प्रहर की भावना
प्रथम प्रहर: जलाभिषेक एवं शिव मंत्र-जप
द्वितीय प्रहर: दूध/दुग्धाभिषेक एवं शिव स्तुति
तृतीय प्रहर: दही/शहद आदि से अभिषेक एवं ध्यान
चतुर्थ प्रहर: जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पण, आरती एवं प्रार्थना
सामग्री और अभिषेक की परंपरा अलग-अलग संप्रदायों/परिवारों में भिन्न हो सकती है; अपनी कुल-परंपरा या गुरु के निर्देश को प्राथमिकता दें।
श्रावण शिवरात्रि की कथा
एक प्रचलित शिवरात्रि कथा में एक शिकारी का वर्णन आता है। एक रात वह जंगल में फँस गया और भय के कारण एक वृक्ष पर बैठकर रात बिताने लगा। जागते रहने के लिए वह अनजाने में वृक्ष के पत्ते नीचे गिराता रहा। नीचे शिवलिंग था और वे पत्ते उस पर गिरते रहे।
शिकारी ने अनजाने में ही पूरी रात जागरण और शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पण कर दिया। प्रातः उसके भीतर पश्चात्ताप और भक्ति का भाव जागा। कथा का संदेश है कि भगवान शिव श्रद्धा, जागरण, संयम और सच्चे पश्चात्ताप को महत्व देते हैं।
इसीलिए शिवरात्रि केवल पूजा का पर्व नहीं, बल्कि अहंकार छोड़कर शिव-तत्व में मन लगाने का अवसर है।
विशेष प्रार्थना
“हे भोलेनाथ! हमारे जीवन से अज्ञान, भय और नकारात्मकता दूर करें। परिवार में सुख, शांति, सद्भाव और धर्म-बुद्धि प्रदान करें। हर-हर महादेव!”
पंडित शिवगुरु
ज्योतिषाचार्य एवं कथा प्रवक्ता





