भारत में लोकतंत्र की जड़ें वैदिक काल से ही अंकुरितः राज्यपाल

The roots of democracy in India have sprouted since the Vedic period: Governor

असम के महामहिम राज्यपाल श्री लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ लॉ एंड लीगल स्टडीज़-टीएमसीएलएलएस की ओर से बिल्डिंग डेमोक्रेसी थ्रू लॉ एंड इन्फॉर्मेशन पर आयोजित दो दिनी इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में बतौर मुख्य अतिथि की शिरकत

रविवार दिल्ली नेटवर्क

  • भगवान महावीर के अपरिग्रह और सत्य के सूत्र लोकतंत्र की सफलता के मूल
  • मुख्य अतिथि श्री आचार्य ने टीएमसीएलएलएस में मूट कोर्ट का किया उदघाटन
  • मेहमानों ने जर्नल और दा डॉरी पैराडॉक्स पुस्तक का भी किया विमोचन
  • स्काउट एंड गाइड की ओर से राज्यपाल को दिया गया गॉर्ड ऑफ ऑनर
  • की-नोट प्रो. राज कुमार मित्तल बोले, संविधान का बेसिक ढ़ाचा अपरिवर्तनीय
  • एमएलसी डॉ. व्यस्त बोले, संविधान और लोकतंत्र आत्मसात करने का विषय
  • टीएमयू के वीसी प्रो. वीके जैन बोले, इन्फॉर्मेशन लोकतंत्र की कुंजी
  • लोकतंत्र का भविष्य पार्लियामेंट में नहीं, बल्कि कक्षाओं में होगाः प्रो. मंजुला जैन
  • मेहमानों को शॉल, स्मृति चिन्ह, पोट्रेट और संविधान की प्रस्तावना की भेंट

असम के महामहिम राज्यपाल श्री लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने कहा, लोकतंत्र एक जीवन पद्धति है। भारत में लोकतंत्र की जड़ें वैदिक काल से ही अंकुरित हैं। वैदिक काल में राजा भी अपनी प्रजा को तय नियमों-कानूनों के तहत ही राज्य करता था। वह धर्म और न्याय को सर्वोच्च स्थान देता था। वेदों में कहा गया है, धर्मो रक्षति रक्षतः अर्थात जो व्यक्ति धर्म, न्याय, नैतिकता, सही कर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है। भारत का लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा और जीवंत लोकतंत्र है। कौटिल्य को कोट करते हुए बोले, प्रजा का सुख ही शासक का सुख है। प्रजा के हित में ही शासक का हित है। भगवान महावीर के अपरिग्रह और सत्य के सूत्र ही लोकतंत्र की सफलता के मूल हैं। श्री आचार्य तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ लॉ एंड लीगल स्टडीज़-टीएमसीएलएलएस की ओर से बिल्डिंग डेमोक्रेसी थ्रू लॉ एंड इन्फॉर्मेशन पर आयोजित दो दिनी इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस के शुभारम्भ सत्र में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। इससे पूर्व कैंपस में असम के महामहिम के प्रथम मंगल आगमन पर की-नोट स्पीकर बाबा साहब भीमराव आंबेडकर यूनिवर्सिटी, लखनऊ के वीसी प्रो. राज कुमार मित्तल, टीएमयू के वीसी प्रो. वीके जैन और डीन अकेडमिक्स प्रो. मंजुला जैन ने बुके देकर गर्मजोशी से स्वागत किया। साथ ही स्काउट एंड गाइड की ओर से गॉर्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। कॉन्फ्रेंस में एमएलसी डॉ. जयपाल सिंह व्यस्त, टीएमसीएलएलएस के डीन प्रो. हरबंश दीक्षित की भी उल्लेखनीय मौजूदगी रही। मेहमानों ने कॉन्फ्रेंस में जर्नल के संग-संग पुस्तक- दा डॉरी पैराडॉक्स का विमोचन भी किया। कॉन्फ्रेंस के बाद मुख्य अतिथि श्री आचार्य ने लॉ कॉलेज में मूट कोर्ट का उदघाटन भी किया। मुख्य अतिथि और की-नोट स्पीकर को शॉल, स्मृति चिन्ह, पोट्रेट और भारतीय संविधान की प्रस्तावना भेंट कर सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि ने कैंपस में वृक्षरोपण किया। साथ ही इंडोर स्पोर्ट्स स्टेडियम का भ्रमण भी किया। कॉन्फ्रेंस का शुभारम्भ और समापन वंदे मातरम् और राष्ट्रगान के संग हुआ।

श्री आचार्य बोले, सत्ता, पद और धन का उपयोग जनकल्याण के लिए करना ही लोकतंत्र को मजबूती प्रदान कर सकता है। संविधान और लोकतंत्र की सफलता के लिए अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की भागीदारी जरूरी है। एनईपी-2020 के लिए माननीय यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को साधुवाद देते हुए बोले, युवाओं में हुनर के विकास की एनईपी में वकालत की गई है। इसमें हम सफल भी हो रहे हैं। कर्तव्यों, नैतिकता, मानवीय मूल्यों में ही लोकतंत्र की सफलता निहित है। कानून किसी भी पद और व्यक्ति से सर्वोच्च है। न्यायपूर्ण, संतुलित समाज, समानता, अधिकरों की सुरक्षा ही सफल लोकतंत्र की नींव है। भारत ने हमेशा वसुधैव कुटुम्बकम की बात की है। संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर का स्मरण करते हुए बोले, डॉ. आंबेडकर का स्पष्ट कहना था, संविधान कितना भी अच्छा हो, लेकिन इसको चलाने वाले लोग अच्छे नहीं होंगे तो यह कभी अच्छा नहीं हो सकता। संविधान की सफलता के लिए ई-गवर्नेंस, डिजिटल सेवा, भाषा संस्कृति का सम्मान दिया जाना जरूरी है। हमें न्याय क्षेत्र में भी मातृ भाषा को स्थान देना होगा। भाषा संस्कृति को बढ़ाने के लिए मेडिकल और इंजीनियरिंग के पाठ्यक्रमों को स्थानीय भाषाओं में तैयार किया जा रहा है। विश्वविद्यालय केवल शिक्षा के केन्द्र नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक चेतना के वाहक होते हैं। संविधान केवल अधिकरों नहीं, कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का निर्वाहन भी है। किसी भी देश की समृद्धि देश में महिला सशक्तिकरण से निर्धारित होती है। 2047 तक हमें प्रधानमंत्री के विकसित, समृद्ध और शक्तिशाली भारत के सपने को पूरा करना होगा। इस सपने को पूरा करने में देश के युवाओं ताकत बनेंगे। श्री आचार्य ने टीएमयू के कुलाधिपति श्री सुरेश जैन को कर्मयोगी की संज्ञा देते हुए कहा, टीएमयू की स्थापना श्री जैन के समाज के प्रति जिम्मेदारी का प्रतिफल है। समाज हमें बनाता है, इसीलिए बदले में हमें भी समाज को देना होगा। हम जानते हैं, जी नहीं पाते। सोचते बहुत हैं, लेकिन कर नहीं पाते। श्री सुरेश जैन में कल्पनाशीलता है। समाज को देने की प्यास है।

की-नोट स्पीकर बाबा साहब भीमराव आंबेडकर यूनिवर्सिटी, लखनऊ के वीसी एवम् टीएमयू के फाउंडर वीसी प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा, भारत की पहचान इसके लोकतंत्र से ही है। यह नींव बेहद पुरानी है। प्राचीन काल से ही स्ट्रांग परिवार व्यवस्था, विकेंद्रित निर्णय प्रणाली, भारतीय पुरातन ज्ञान ही वर्तमान लोकतंत्र का आधार बने हैं। डॉ. बीआर आंबेडकर ने विश्व के सभी संविधानों के निचोड़ से भारतीय संविधान तैयार किया है। इसके केन्द्र में जनता है। संविधान का बेसिक ढ़ाचा अपरिवर्तनीय है। इसमें जनता को जस्टिस, लिबर्टी, इक्विटी और फर्टिनीटी देने की बात की गई है। सभी को समान अधिकार और बोलने की स्वतंत्रता है। जो भी नए कानून बनते हैं सभी संविधान से निकलते हैं। ये कानून हमें स्ट्रक्चर देते हैं। स्ट्रक्चर के लिए इन्फॉर्मेशन चाहिए । लॉ और इंफॉर्मेशन गवर्निंग सिस्टम को मजबूती प्रदान करते हैं, इसीलिए लोगों का अवेयर और इंफॉर्म होना जरूरी है। कानून में स्पष्टता होनी चाहिए। कानून लोगों की जरूरतों और भावनाओं के अनुसार होना चाहिए। भविष्य के चैंलेज के अनुसार होना चाहिए जो लोकतंत्र को मजबूती दे सके। टीएमयू के चांसलर श्री सुरेश जैन की डायनामिक लीडरशिप की चर्चा करते हुए बोले, नई ऊर्जा, नवाचार और उत्साह ही टीएमयू की सफलता के मंत्र हैं। साथ ही ये तीनों खासियत उनकी लीडरशिप में आज भी शामिल हैं।

एमएलसी डॉ. जयपाल सिंह व्यस्त बोले, संविधान और लोकतंत्र की रक्षा जनता ही करेगी। यह जीवन में उतारने का विषय का है। हमें संविधान के अनुसार आचरण करना होगा। यह कार्य युवा पीढ़ी के हाथों में हैं। उन्होंने मशहूर शायर डॉ. बशीर बद्र का एक शेर भी सुनाया। 2001 में टिमिट की स्थापना से आज तक मैं टीएमयू परिवार का हिस्सा हूं। 2005 में डेंटल कॉलेज और 2008 में यूनिवर्सिटी की स्थापना की गई। दुनिया की टॉप 200 यूनिवर्सिटीज़ में टीएमयू को शामिल करना हमारा लक्ष्य है। टीएमयू के वीसी प्रो. वीके जैन बोले, इन्फॉर्मेशन लोकतंत्र की कुंजी है। आज के युग में इन्फॉर्मेशन की प्रचुरता है। हमें सही ज्ञान को निकालना होगा। सूचना का विश्लेषण करना होगा अन्यथा हमारे निर्णय गलत हो सकते हैं। उन्होंने जैन फिलासफी के तत्वार्थसूत्र को कोट करते हुए कहा, हर जीव को एक-दूसरे की परस्पर सहायता करनी चाहिए। सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक दर्शन ही सफलता के मार्ग हैं। सफलता के लिए मन, वचन और काय में एकरूपता जरूरी है। समाज को अच्छा बनाने के लिए हमें स्वंय को अच्छा बनाना होगा। डीन एकेडमिक्स प्रो. मंजुला जैन बोलीं, भारतीय लोकतंत्र का भविष्य पार्लियामेंट में नहीं, बल्कि कक्षाओं और न्यायालयों में होगा। टीएमयू केवल सेंटर ऑफ लर्निंग नहीं, बल्कि युवाओं के लिए एक लॉच पैड है। टीएमयू के इन्क्यूबेशन सेंटर में करीब 40 स्टार्टअप्स जुड़े हुए हैं। राइट इन्फॉर्मेशन से ही राइट नॉलेज मिलती है। कॉन्फ्रेंस में लॉ कॉलेज की ओर से एचओडी डॉ. अमित वर्मा, कॉन्फ्रेंस के कन्वीनर कडॉ. राकेश कुमार, को-कन्वीनर डॉ. बिष्णानंद दुबे के संग-संग प्रो. आरके द्विवेदी, प्रो. एमपी सिंह, प्रो. विपिन जैन, श्री नीशीथ मिश्रा, प्रो. नवनीत कुमार, डॉ. ज्योति पुरी, डॉ. अमित कंसल, प्रो. पंकज कुमार सिंह, प्रो. मनु मिश्रा आदि मौजूद रहे। इससे पूर्व टीएमसीएलएलएस के प्रिंसिपल प्रो. एसके सिंह ने मुख्य अतिथि का जीवन परिचय पढ़ा, जबकि संचालन डॉ. माधव शर्मा ने किया।

दिल खोलकर पढ़े कसीदे
इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में असम के महामहिम श्री लक्ष्मण प्रसाद आचार्य और उनके बालसखा एवम् सलाहकार और टीएमसीएलएलएस के डीन प्रो. हरबंश दीक्षित ने अपने संबंधों को पचास बरस पुराने बताते हुए एक-दूसरे के दिल खोलकर कसीदे पढ़े। पहली बारी प्रो. हरबंश दीक्षित की रही। महामहिम के सलाहकार के तौर पर दिल को छू गई दो बातों का उन्होंने विस्तार से जिक्र किया। टीचर्स डे पर सबसे उम्रदराज़ रिटायर्ड प्राइमरी टीचर का सम्मान बेमिसाल रहा। महामहिम ने टीचर को उनके घर जाकर सम्मानित किया, जहां अपनी कुर्सी पर बिठाकर उनके पैर भी छूए। यह देश के लिए अनुकरणीय मिसाल है। दूसरा उन्होंने एनईपी-2020 के क्रियान्वयन का किस्सा सुनाया। प्रो. दीक्षित ने खुलासा किया, स्टेट लेवल मीटिंग में वीसी, डायरेक्टर्स, शिक्षाविदों आदि ने सलाह दी, हमारे पाठ्यक्रम का 20 प्रतिशत पाठ्यक्रम हमारी लोकल समस्याओं पर केंद्रित रहेगा। महामहिम के सलाहकार बोले, ऐसा ही मूर्त रूप दिया भी गया।

अब बारी थी महामहिम की। महामहिम श्री लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने प्रो. हरबंश दीक्षित के संग अपने रिश्तों को कुछ यूं कहकर बयां किया, आपके व्यक्तित्व, आपकी सफलता में यह निर्भर करता है कि आखिर आपका सलाहकार कौन है? उन्होंने बड़े गर्व के साथ कहा, मेरी सफलता के पीछे मेरे बालसखा प्रो. हरबंश दीक्षित हैं। अब मैं असम का गवर्नर हूं तो भी मेरे सलाहकार मेरे ही बालसखा प्रो. हरबंश दीक्षित ही हैं। मेरे मित्र प्रो. दीक्षित भले ही असम में मेरे साथ हों, लेकिन एक घंटे की बातचीत में 20 मिनट तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति श्री सुरेश जैन और वहां की उपलब्धियां ही रहती हैं। यहां आकर यह मैं शिद्दत से महसूस कर रहा हूं।