हरीश शर्मा
नई दिल्ली : यूट्यूबर और प्राइम टाइम न्यूज नेटवर्क के पत्रकार अभिषेक गुप्ता की संदिग्ध आत्महत्या ने मीडिया जगत और सोशल मीडिया समुदाय को झकझोर दिया है। शुरुआती जानकारी के अनुसार इसे आत्महत्या का मामला माना जा रहा है, लेकिन अब तक उनकी मौत के पीछे की परिस्थितियों को लेकर कई सवाल अनसुलझे हैं। हैरानी की बात यह है कि इस मामले की गहन जांच के नाम पर स्थानीय विकासपुरी थाने की पुलिस लीपापोती करती नजर आ रही है।
बताया जा रहा है कि 6 अप्रैल 2026 को दोपहर करीब 1ः30 बजे अभिषेक गुप्ता के न्यूज चैनल प्लेटफॉर्म प्राइम टाइम न्यूज नेटवर्क पर उनकी मौत की खबर सामने आई। इस घटना के बाद जहां शोक की लहर फैल गई, वहीं कई लोगों ने इस बात पर भी सवाल उठाए कि उनके करीबी सहयोगी और मीडिया जगत से जुड़े कई लोग उस मुश्किल समय में दिखाई क्यों नहीं दिए। पोस्टमार्टम से लेकर अंतिम संस्कार तक उनके अभिन्न साथियों की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी हुई है।
इस मामले को और गंभीर तब माना गया जब अभिषेक गुप्ता की मौत के तुरंत बाद उनके नेटवर्क के व्हाट्सएप चैनल से उनसे जुड़े कई वीडियो, संदेश और अन्य सामग्री हटाए जाने की बात सामने आई। यह अब तक साफ नहीं हो पाया है कि यह सामग्री किसके निर्देश पर और किस उद्देश्य से हटाई गई। ऐसे में यह पहलू जांच एजेंसियों के लिए अहम माना जा रहा है।
करीबी सूत्रों का दावा है कि मौत से पहले अभिषेक गुप्ता मानसिक तनाव से गुजर रहे थे। उनके सोशल मीडिया पोस्ट और गतिविधियों में भी बेचैनी और मानसिक दबाव के संकेत दिखाई दिए थे। लेकिन पुलिस ने अभी तक जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति की है। इस केस के आईओ हरेती लाल की गतिविधियों जांच को लेकर संदिग्ध बताइ्र्र जा रही है।
फिलहाल, यह मामला कई सवालों और आशंकाओं के बीच खड़ा है। जरूरत इस बात की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और गहन जांच हो, ताकि वास्तविक कारण सामने आ सकें और तथ्यों के आधार पर ही किसी निष्कर्ष तक पहुंचा जा सके।





