प्रमोद शर्मा
कोलकाता/जोधपुर : राजस्थान में सरकारी एवं निजी विद्यालयों में राजस्थानी भाषा को शिक्षा के माध्यम के रूप में अनिवार्य किए जाने संबंधी माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर अखिल भारतीय मारवाड़ी सम्मेलन ने खुशी व्यक्त करते हुए इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है।
अखिल भारतीय मारवाड़ी सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन कुमार गोयनका ने दैनिक जलतेदीप के मुख्य संपादक एवं प्रकाशक पद्म मेहता को भेजे बधाई पत्र में कहा कि यह फैसला राजस्थानी भाषा, संस्कृति और समाज के सम्मान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय वर्षों से चल रहे सामाजिक संघर्ष, जागरूकता और पत्रकारिता के माध्यम से उठाई गई आवाज को दिया।
पत्र में कहा गया है कि मातृभाषा में शिक्षा केवल प्रशासनिक सुविधा का विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति का संवैधानिक और सांस्कृतिक अधिकार है। सम्मेलन ने माना कि नई शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप यह निर्णय आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखेगा।
गोयनका ने कहा कि राजस्थानी भाषा को विद्यालयी शिक्षा में स्थान मिलने से प्रदेश के करोड़ों राजस्थानी भाषियों की अस्मिता को मजबूती मिलेगी तथा भाषा संरक्षण को नई दिशा प्राप्त होगी। उन्होंने पत्रकारिता जगत की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि समाजहित में निरंतर चलाए गए अभियान और लेखनी के प्रयासों का यह सकारात्मक परिणाम है।
अखिल भारतीय मारवाड़ी सम्मेलन ने इस निर्णय पर पूरे राजस्थानी समाज को शुभकामनाएं देते हुए इसे ऐतिहासिक विजय बताया।





