महेन्द्र तिवारी
आधुनिक युग में विभिन्न सामाजिक मंचों पर अपने जीवन के विशेष क्षणों को साझा करना मानवीय व्यवहार का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। जब कोई व्यक्ति किसी मनोरम स्थान की यात्रा पर जाता है, मित्रों के साथ आनंदमय समय बिताता है, या प्रतिदिन अपनी नई तस्वीरें अपलोड करता है, तो उसका उद्देश्य अपनी खुशियों और अनुभवों को दुनिया के साथ साझा करना होता है। इन चित्रों के माध्यम से लोग अपनी भावनाएं, जीवनशैली और व्यक्तिगत उपलब्धियां समाज तक पहुंचाते हैं। परंतु, तकनीक की तीव्र गति ने अब इन चित्रों को केवल सुंदर स्मृतियों तक सीमित नहीं रखा है। आज यही तस्वीरें हमारी व्यक्तिगत पहचान और वित्तीय सुरक्षा के लिए एक अत्यंत गंभीर खतरा बनती जा रही हैं। विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता के निरंतर बढ़ते प्रभाव ने अंतरजाल आधारित अपराधों को एक सर्वथा नया और चिंताजनक मोड़ दे दिया है।
वर्तमान समय में सुरक्षा विशेषज्ञ यह चेतावनी दे रहे हैं कि हमारे दूरभाष या चित्र-यंत्र से ली गई एक सामान्य सी तस्वीर से भी किसी व्यक्ति की उंगलियों के निशान चोरी किए जा सकते हैं और भविष्य में उनका अवांछित दुरुपयोग पूरी तरह संभव है। वर्तमान समय में अत्याधुनिक साधन किसी भी धुंधली तस्वीर को अत्यधिक स्पष्ट और सघन बनाने में सक्षम हैं। तस्वीरों की बारीक रेखाओं को साफ करना, उनके विस्तार को बढ़ाना और उनमें छिपे अत्यंत सूक्ष्म स्वरूपों को पहचानना अब इन प्रणालियों के लिए बहुत सरल हो चुका है। यही कारण है कि मानवीय उंगलियों के पोरों पर पाई जाने वाली अद्वितीय और अत्यंत बारीक रेखाएं भी अब इलेक्ट्रॉनिक विश्लेषण के माध्यम से आसानी से निकाली जा सकती हैं। अंतरजाल सुरक्षा विशेषज्ञ ली चांग ने अपने हालिया प्रदर्शनों में यह प्रमाणित करके दिखाया है कि उच्च गुणवत्ता वाली साधारण तस्वीरों से भी पूरी तरह उपयोग में लाए जा सकने वाले उंगलियों के निशान प्राप्त किए जा सकते हैं।
इस सुरक्षा संकट से जुड़े वैज्ञानिक अध्ययनों और आंकड़ों पर दृष्टि डालें तो यह स्थिति और भी भयावह प्रतीत होती है। सुरक्षा विशेषज्ञों के विश्लेषण के अनुसार, यदि कोई तस्वीर लगभग 1.5 मीटर की दूरी से ली गई हो और उपकरण के चित्र-यंत्र की गुणवत्ता उत्तम स्तर की हो, तो उस चित्र से उंगलियों के निशान शत-प्रतिशत स्पष्टता के साथ प्राप्त किए जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, यदि तस्वीर 1.5 से 3 मीटर की दूरी से भी ली गई हो, तब भी आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणालियों की सहायता से उंगलियों के लगभग 50 प्रतिशत तक के रेखा-स्वरूप को सफलतापूर्वक निकाला जा सकता है। यद्यपि सामान्य जन के लिए यह एक साधारण सा आंकड़ा लग सकता है, परंतु अंतरजाल अपराध और पहचान की चोरी करने वाले अपराधियों के लिए इतनी आंशिक जानकारी भी अत्यंत विनाशकारी सिद्ध हो सकती है। आज के समय में प्रयुक्त होने वाले कई अत्याधुनिक सुरक्षा उपकरण उंगलियों के केवल आंशिक या आधे निशानों के मिलान से भी पहचान सत्यापित करने की क्षमता रखते हैं, जिससे अपराधियों का काम और अधिक सुगम हो जाता है।
इस पूरे परिदृश्य में सबसे अधिक संवेदनशील और खतरनाक स्थिति तब उत्पन्न होती है जब लोग कैमरे के सम्मुख अपनी उंगलियों को सीधा करके विजय सूचक या शांति सूचक चिह्न बनाते हैं। युवाओं और बच्चों के बीच यह मुद्रा अत्यधिक लोकप्रिय है और सामाजिक माध्यमों पर ऐसी करोड़ों तस्वीरें उपलब्ध हैं। इस विशिष्ट मुद्रा में व्यक्ति की उंगलियों के पोर सीधे उपकरण के सामने केंद्रित होते हैं, जिसके कारण तस्वीर में उंगलियों की रेखाएं सबसे अधिक स्पष्ट और प्रकाशमान दिखाई देती हैं। जापान के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने कई वर्ष पूर्व ही इस विषय पर गहन शोध करके दुनिया को सचेत किया था कि इस प्रकार की मुद्राओं वाली तस्वीरों से उंगलियों के निशानों को बहुत सुगमता से पढ़ा जा सकता है। अब जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता की शक्ति कई गुना बढ़ चुकी है, तब इस तकनीकी खतरे की गंभीरता पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक हो चुकी है।
उंगलियों के निशानों के लीक होने का यह संकट किसी भी सामान्य कूटशब्द की चोरी से अत्यधिक गंभीर माना जाता है। यदि किसी उपयोगकर्ता का कोई कूटशब्द या गोपनीय संख्या चोरी हो जाती है, तो वह तत्काल उसे बदलकर एक नया और सुदृढ़ कूटशब्द निर्मित कर सकता है। इसके विपरीत, मनुष्य की उंगलियों के निशान उसके संपूर्ण जीवनकाल में अपरिवर्तनीय रहते हैं। कोई भी व्यक्ति अपनी उंगलियों के प्राकृतिक निशानों को बदल नहीं सकता है। यही मुख्य कारण है कि इस प्रकार के जैव-पहचान संबंधी आंकड़ों का दुरुपयोग किसी भी व्यक्ति के लिए दीर्घकालिक समस्या उत्पन्न कर सकता है। एक बार यदि किसी अपराधी समूह या अवांछित प्रणाली के पास किसी नागरिक की उंगलियों के निशानों का सटीक रेखा-स्वरूप पहुंच जाता है, तो वह अपराधी भविष्य में कई वर्षों तक उस व्यक्ति के नाम पर विभिन्न प्रकार के वित्तीय अपराध करने का प्रयास कर सकता है।
आज संपूर्ण विश्व में आधुनिक दूरभाष, संगणक, बैंकिंग सेवाएं, सरकारी प्रणालियां और उच्च सुरक्षा वाले संस्थान उंगलियों के निशानों पर आधारित पहचान प्रणाली पर पूरी तरह निर्भर हो चुके हैं। अधिकांश कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए इन जैव-पहचान उपकरणों का ही उपयोग किया जाता है। इसके साथ ही हवाई अड्डों, सीमा सुरक्षा चौकियों और अन्य संवेदनशील राष्ट्रीय संस्थानों में भी पहचान की पुष्टि के लिए उंगलियों के निशानों का उपयोग निरंतर बढ़ रहा है। ऐसी संवेदनशील व्यवस्था में यदि किसी निर्दोष नागरिक की जैव-पहचान संबंधी गोपनीय जानकारी गलत हाथों में चली जाती है, तो उसके परिणामस्वरूप पहचान की चोरी, गंभीर बैंकिंग धोखाधड़ी, बैंक खातों से धन की अवैध निकासी और प्रतिबंधित क्षेत्रों में अनधिकृत प्रवेश जैसी अत्यंत विकट समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर आधारित इस तकनीक के क्षेत्र में हो रहे नित नए शोधों से कुछ और चौंकाने वाले तथ्य भी सामने आए हैं। वैज्ञानिक अध्ययनों में यह देखा गया है कि मशीन पर आधारित आधुनिक कलन विधियां अब ऐसे कृत्रिम अथवा नकली उंगलियों के निशान भी तैयार कर सकती हैं जो विभिन्न सुरक्षा उपकरणों को भ्रमित करने में सक्षम हैं। वैज्ञानिकों ने प्रयोगशालाओं में ऐसे कृत्रिम और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जनित निशानों को विकसित करने में सफलता पाई है जिन्हें कुछ संवेदनशील सुरक्षा प्रणालियों ने वास्तविक मानकर स्वीकार कर लिया। यह उभरती हुई स्थिति स्पष्ट संकेत देती है कि आने वाले समय में अंतरजाल सुरक्षा की चुनौतियां मानवीय कल्पना से भी अधिक जटिल और बहुआयामी होने वाली हैं।
हालांकि, इस विषय के दूसरे पहलू को स्पष्ट करते हुए विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि सामाजिक माध्यमों पर डाली गई प्रत्येक तस्वीर से तत्काल कोई बैंक खाता अवरुद्ध नहीं हो जाता और न ही हर सामान्य चित्र इतना बड़ा संकट उत्पन्न करता है। किसी भी तस्वीर से उंगलियों के निशानों को सफलतापूर्वक निकालने के लिए अत्यधिक अनुकूल और सटीक परिस्थितियों की आवश्यकता होती है। इसके लिए चित्र लेते समय प्रकाश की व्यवस्था अत्यंत उत्तम होनी चाहिए, उपकरण का केंद्रन पूरी तरह से उंगलियों पर होना चाहिए और तस्वीर की स्पष्टता बहुत उच्च स्तर की होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त, वर्तमान समय के अधिकांश अत्याधुनिक उपकरण केवल उंगलियों के निशानों पर ही पूरी तरह आश्रित नहीं होते हैं। उनमें सुरक्षा की अतिरिक्त परतें जैसे गुप्त संख्या, चेहरे की पहचान और डेटा सुरक्षा प्रणालियां भी अंतर्निहित होती हैं। इसके बावजूद, तकनीक के इस निरंतर होते विकास के कारण इस खतरे को कदापि कम करके नहीं आंका जाना चाहिए।
इस नए युग के अंतरजाल खतरों से निपटने के लिए सामाजिक माध्यमों का उपयोग करने वाले नागरिकों के बीच व्यापक जागरूकता का होना सबसे महत्वपूर्ण उपाय है। आज के दौर में अंतरजाल और सामाजिक मंचों का उपयोग पूरी तरह से बंद कर देना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है, परंतु अपनी आदतों में थोड़ा सा सुधार करके इस खतरे को न्यूनतम अवश्य किया जा सकता है। तस्वीरें लेते समय उपकरण की ओर सीधे उंगलियां दिखाने वाली मुद्राओं से पूर्णतः बचना चाहिए। अत्यधिक निकटता से ली गई उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरों को सार्वजनिक मंचों पर साझा करने से परहेज करना चाहिए। यदि ऐसी तस्वीरें अपलोड करना आवश्यक ही हो, तो अपलोड करने से पूर्व उनकी गुणवत्ता को थोड़ा कम कर देना चाहिए ताकि यदि कोई उन्हें अत्यधिक बड़ा करके भी देखे, तो उंगलियों की रेखाएं स्पष्ट रूप से दिखाई न दें। इसके साथ ही, अपने व्यक्तिगत खातों की गोपनीयता सेटिंग्स को सदैव मजबूत रखना चाहिए ताकि अपरिचित व्यक्ति आपकी तस्वीरों तक न पहुँच सकें।
इसके अतिरिक्त, केवल उंगलियों के निशानों पर आधारित सुरक्षा व्यवस्था पर ही पूर्ण निर्भरता उचित नहीं है। सभी महत्वपूर्ण वित्तीय और व्यक्तिगत खातों में दोहरी प्रमाणीकरण प्रणाली का उपयोग अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए। इसके अंतर्गत गुप्त संख्या, संदेश आधारित तत्काल सत्यापन और अन्य सुरक्षात्मक उपायों को आपस में जोड़ा जाना चाहिए। अंतरजाल अपराधी सदैव हमारी असावधानी और सुरक्षा तंत्र की कमजोरियों की ताक में रहते हैं, इसलिए इस आभासी संसार में निरंतर सतर्कता ही हमारी सबसे बड़ी रक्षा कवच है। अंततः, यह तकनीक का युग है जो मानव जीवन को सुगम बनाने के साथ-साथ नई चुनौतियां भी दे रहा है। आज एक साधारण सा स्व-चित्र केवल एक सुंदर दृश्य नहीं है, बल्कि वह हमारी अत्यंत निजी जानकारी का स्रोत भी बन सकता है। इसलिए आवश्यकता इस बात की है कि हम तकनीक के लाभों का सहर्ष उपयोग करें, किंतु उसके छिपे हुए खतरों के प्रति भी समान रूप से सजग रहें। थोड़ी सी सतर्कता हमें भविष्य के किसी बड़े नुकसान से बचा सकती है।





