प्रधानमंत्री की फ्रांस और स्लोवाकिया यात्रा : बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की बढ़ती कूटनीतिक, आर्थिक सामरिक भूमिका का महत्वपूर्ण संकेत

Prime Minister's Visit to France and Slovakia: A Significant Indicator of India's Growing Diplomatic, Economic, and Strategic Role in the Evolving Global Landscape

सौरभ वार्ष्णेय

आज भारत के हौसले चहुंओर अपनी विजय पताका पहरा रहे हैं। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फ्रांस और स्लोवाकिया यात्रा केवल एक नियमित विदेश दौरा नहीं है, बल्कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की बढ़ती कूटनीतिक, आर्थिक और सामरिक भूमिका का महत्वपूर्ण संकेत दे रहा है। 13 से 18 जून 2026 तक होने वाली इस यात्रा में फ्रांस के साथ रणनीतिक साझेदारी को नई गति देने, स्लोवाकिया के साथ संबंधों का नया अध्याय खोलने तथा जी-7 शिखर सम्मेलन में भारत की प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराने का अवसर निहित है। फ्रांस में आयोजित 52 वें जी-7 शिखर सम्मेलन में भारत की अविरल भागीदारी है। भारत लगातार कई वर्षों से जी-7 बैठकों में आमंत्रित किया जा रहा है।

फ्रांस भारत का सबसे विश्वसनीय यूरोपीय रणनीतिक साझेदार माना जाता है। रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दोनों देशों के हित समान हैं। प्रधानमंत्री मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के बीच होने वाली बैठक में रक्षा सहयोग, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्टार्टअप और नवाचार के क्षेत्रों पर विशेष जोर रहने की संभावना है। दोनों राजनीतिज्ञ भारत इनोवेट्स 2026 कार्यक्रम का संयुक्त उद्घाटन भी कर रहे हैं, जो भारत-फ्रांस तकनीकी साझेदारी को नई दिशा देने वाला मंच माना जा रहा है। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब विश्व राजनीति बहुधु्रवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है। यूरोप रूस-यूक्रेन संघर्ष, ऊर्जा संकट और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में भारत एक स्थिर, विश्वसनीय और तेजी से उभरती हुई शक्ति के रूप में यूरोपीय देशों के लिए महत्वपूर्ण साझेदार बन गया है। फ्रांस के साथ बढ़ती निकटता भारत की सामरिक स्वायत्तता को भी मजबूत करती है, क्योंकि दोनों देश स्वतंत्र विदेश नीति और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के समर्थक हैं।

इस यात्रा का दूसरा महत्वपूर्ण पड़ाव स्लोवाकिया है। यह विशेष इसलिए भी है क्योंकि 1993 में स्लोवाकिया के स्वतंत्र राष्ट्र बनने के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली यात्रा है। प्रधानमंत्री मोदी की स्लोवाकिया यात्रा मध्य और पूर्वी यूरोप में भारत की सक्रिय कूटनीति का प्रतीक है। यहां प्रधानमंत्री की मुलाकात प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको और राष्ट्रपति से होगी। व्यापार, निवेश, रक्षा उत्पादन, ऑटोमोबाइल, सूचना प्रौद्योगिकी और विनिर्माण क्षेत्रों में सहयोग की नई संभावनाओं पर चर्चा होने की उम्मीद है।
स्लोवाकिया यूरोपीय संघ का सदस्य है और मध्य यूरोप के औद्योगिक केंद्रों में से एक माना जाता है। भारत के लिए यह केवल द्विपक्षीय संबंधों का विषय नहीं, बल्कि पूरे यूरोपीय संघ के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने का माध्यम भी है। ऐसे समय में जब भारत और यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, स्लोवाकिया जैसे देशों के साथ निकटता भारत के हितों को और मजबूत कर सकती है। यात्रा का तीसरा महत्वपूर्ण आयाम फ्रांस में आयोजित 52 वें जी-7 शिखर सम्मेलन में भारत की भागीदारी है। भारत लगातार कई वर्षों से जी-7 बैठकों में आमंत्रित किया जा रहा है, जो उसकी बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है। इस मंच पर भारत जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला, डिजिटल अर्थव्यवस्था और वैश्विक दक्षिण के मुद्दों को मजबूती से उठा सकता है। वास्तव में यह यात्रा तीन स्तरों पर महत्वपूर्ण है—द्विपक्षीय संबंध, यूरोप के साथ व्यापक साझेदारी और वैश्विक मंचों पर भारत की भूमिका। फ्रांस के साथ तकनीकी एवं रक्षा सहयोग, स्लोवाकिया के साथ नए आर्थिक अवसर और जी-7 में भारत की सशक्त उपस्थिति मिलकर यह संदेश देती है कि भारत अब केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक व्यवस्था को प्रभावित करने वाली निर्णायक शक्ति के रूप में उभर रहा है।

कहा जा सकता है कि प्रधानमंत्री मोदी की फ्रांस और स्लोवाकिया यात्रा भारत की विकसित भारत और वैश्विक भारत की परिकल्पना को आगे बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण कड़ी है। यदि इस यात्रा से घोषित सहयोग योजनाएँ ठोस परिणामों में बदलती हैं, तो यह न केवल भारत-यूरोप संबंधों को नई ऊँचाई देगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की प्रतिष्ठा और प्रभाव को भी और मजबूत करेगी।