दुनिया को दिशा दे रहा है नया भारत

A new India is showing the way to the world

सभ्यता, विकास और वैश्विक नेतृत्व के नए युग की कहानी

मुकेश गुप्ता (चेयरमैन)
ग्राफिक एंड लिमिटेड

कुछ सभ्यताएँ केवल नक्शे पर बने देशों की तरह नहीं जीतीं — वे समय के साथ एक विचार, एक दर्शन और एक चेतना बन जाती हैं। भारत भी ऐसी ही एक सनातन चेतना है, जिसका पुनर्जागरण आज केवल भावनात्मक या सांस्कृतिक बदलाव नहीं, बल्कि वैश्विक आंकड़ों और उपलब्धियों से वास्तविकता बन चुका है।
आज भारत विश्व की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इको सिस्टम और डिजिटल भुगतान में विश्व का नंबर-1 देश बन चुका है। UPI के माध्यम से हर महीने 16 अरब से अधिक ट्रांजैक्शन, DBT द्वारा ₹38 लाख करोड़ से अधिक राशि सीधे लोगों के खातों में हस्तांतरित करना, चंद्रयान-3 के माध्यम से चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव तक पहुँचना तथा करोड़ों गरीबों तक योजनाओं का सीधा लाभ पहुँचाना — यह सब उस नए भारत की पहचान है, जिसे आज दुनिया केवल देख नहीं रही, बल्कि गंभीरता से स्वीकार और समझ रही है।

बदलती दुनिया और उभरता भारत
कुछ दशक पहले तक दुनिया का केंद्र पश्चिम माना जाता था। अमेरिका और यूरोप को ही विकास का अंतिम मॉडल समझा जाता था। लेकिन अब वैश्विक समीकरण बदल रहे हैं। IMF और विश्व बैंक के अनुसार भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है और आने वाले वर्षों में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी युवा आबादी है। देश की लगभग 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 वर्ष से कम आयु की है। यही युवा शक्ति भारत को तकनीक, नवाचार और स्टार्टअप का वैश्विक केंद्र बना रही है।
15 जनवरी 2025 तक भारत में DPIIT द्वारा मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या 1.59 लाख से अधिक हो चुकी है। विशेष बात यह है कि लगभग 51 प्रतिशत स्टार्टअप्स Tier-2 और Tier-3 शहरों से उभर रहे हैं। यह केवल आर्थिक परिवर्तन नहीं, बल्कि “न्यू इंडिया” की आत्मनिर्भर और नवाचार आधारित सोच का प्रमाण है। यह नया भारत अब दुनिया को “लीड” करने का सामर्थ्य दिखाने लगा है।

डिजिटल भारत : तकनीक से सशक्त राष्ट्र
एक समय था जब भारत को तकनीक में पिछड़ा कहा जाता था, लेकिन आज दुनिया भारत के डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर मॉडल को समझने का प्रयास कर रही है। NPCI के अनुसार केवल दिसंबर 2024 में UPI के माध्यम से 16.73 अरब से अधिक डिजिटल ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल राशि लगभग ₹23.25 लाख करोड़ रही। पूरे वर्ष 2024 में UPI के माध्यम से लगभग 172 अरब ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए।
आज भारत में रेहड़ी-पटरी वाले, गाँव के दुकानदार और छोटे व्यापारी भी QR कोड से भुगतान ले रहे हैं। दुनिया के कई विकसित देशों में भी इतनी व्यापक और सस्ती डिजिटल भुगतान व्यवस्था नहीं है। यह केवल तकनीक नहीं —यह आर्थिक सशक्तिकरण है।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में इतिहास रचता नया भारत
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने पिछले एक दशक में सुशासन, डिजिटल क्रांति, गरीब कल्याण और आत्मनिर्भर विकास का नया मॉडल प्रस्तुत किया है। जनधन योजना के माध्यम से 50 करोड़ से अधिक लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा गया, जिनमें 56 प्रतिशत महिलाएँ हैं। वहीं DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) व्यवस्था के जरिए वर्ष 2014 से 2024 तक ₹38 लाख करोड़ से अधिक राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजी गई, जिससे लगभग ₹3.48 लाख करोड़ की बचत हुई और भ्रष्टाचार पर बड़ा प्रहार हुआ। आज 300 से अधिक सरकारी योजनाएँ DBT प्लेटफॉर्म से जुड़ी हैं। इसी तरह, प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 4 करोड़ से अधिक गरीब परिवारों को पक्के घर मिले, जबकि उज्ज्वला योजना के तहत 10 करोड़ से अधिक महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन प्रदान किए गए। जल जीवन मिशन के माध्यम से वर्ष 2019 के 3.23 करोड़ कनेक्शनों की तुलना में 2024 तक 15 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों तक नल से जल पहुँचाया गया।
डिजिटल इंडिया अभियान ने भारत को डिजिटल भुगतान में विश्व का अग्रणी राष्ट्र बना दिया है। वहीं मेक इन इंडिया और PLI योजनाओं के कारण भारत में मोबाइल निर्माण ₹18,000 करोड़ से बढ़कर ₹4 लाख करोड़ से अधिक पहुँच चुका है तथा मोबाइल निर्यात ₹1.20 लाख करोड़ के पार चला गया है। आज एप्पल सहित अनेक वैश्विक कंपनियाँ भारत में बड़े स्तर पर निर्माण कर रही हैं।
यह केवल योजनाओं की सफलता नहीं, यह उस नए भारत की तस्वीर है, जो आत्मविश्वास के साथ दुनिया का नेतृत्व करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

वैश्विक मंच से अंतरिक्ष तक भारत की उड़ान
ISRO ने सीमित संसाधनों में असंभव को संभव कर दिखाया है। भारत अब तक 430 से अधिक विदेशी सैटेलाइट लॉन्च कर चुका है और चंद्रयान-3 के माध्यम से चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुँचने वाला दुनिया का पहला देश बना। इतना ही नहीं,भारत का मंगलयान मिशन दुनिया के सबसे कम लागत वाले सफल मंगल अभियानों में शामिल रहा। आज अनेक देश भारत की सैटेलाइट लॉन्च सेवाओं पर भरोसा कर रहे हैं, जो भारत की बढ़ती वैज्ञानिक और तकनीकी शक्ति का प्रमाण है।
कोरोना महामारी के दौरान जब दुनिया के कई शक्तिशाली देश असहाय दिखाई दे रहे थे, तब भारत ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए “वैक्सीन मैत्री” अभियान के तहत 100 से अधिक देशों को वैक्सीन और आवश्यक दवाइयाँ उपलब्ध कराईं। साथ ही देश में 220 करोड़ से अधिक वैक्सीन डोज लगाकर दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चलाया गया।
भारत के डिजिटल CoWIN प्लेटफॉर्म को WHO सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने सराहा। यह भारत की “वसुधैव कुटुम्बकम्” की जीवंत भावना थी।

विश्व राजनीति में भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा
G20 समिट ने भारत की कूटनीतिक शक्ति और वैश्विक नेतृत्व का ऐतिहासिक उदाहरण बना। भारत ने अपनी थीम ” एक धरती, एक परिवार, एक भविष्य” के माध्यम से दुनिया को संतुलन, सहयोग और मानवता का संदेश दिया। सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे वैश्विक मतभेदों के बीच भी नई दिल्ली घोषणा-पत्र सर्वसम्मति से पारित हुआ। G20 के दौरान भारत में 200 से अधिक बैठकों का आयोजन 60 से अधिक शहरों में किया गया, जिसने भारत की सांस्कृतिक और वैश्विक प्रतिष्ठा को नई ऊँचाई दी।

सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रनिर्माण का नया दौर
भारत के इस पुनर्जागरण के पीछे केवल सरकारी योजनाएँ ही नहीं, बल्कि मजबूत नेतृत्व, सांस्कृतिक आत्मविश्वास और राष्ट्रभाव की निरंतर चेतना भी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने सांस्कृतिक गौरव सहित सभी क्षेत्रों में नई ऊँचाई प्राप्त की है।
वहीं बीजेपी के प्रेरणास्रोत संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने लगभग एक शताब्दी से सेवा, संगठन, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की भावना को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का कार्य किया है। शिक्षा, ग्राम विकास, सेवा कार्य, आपदा राहत और सामाजिक समरसता के क्षेत्र में लाखों स्वयंसेवक निरंतर सक्रिय हैं।

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, महाकाल लोक, अयोध्या में भव्य राम मंदिर, केदारनाथ पुनर्विकास और नालंदा धरोहर संरक्षण — ये केवल निर्माण कार्य नहीं, बल्कि भारत की आत्मा के पुनर्जागरण के प्रतीक हैं। भारत अब अपनी सभ्यता को छुपा नहीं रहा, बल्कि गर्व से दुनिया के सामने प्रस्तुत कर रहा है।

विश्व को नई दिशा देता भारत
भारत का उदय किसी दूसरे देश के पतन की कहानी नहीं, बल्कि मानवता के संतुलन, सहअस्तित्व और नई वैश्विक दिशा की कहानी है।
यह वही भूमि है जहाँ भगवान बुद्ध ने करुणा का संदेश दिया,
जहाँ स्वामी विवेकानंद ने आत्मविश्वास जगाया,
जहाँ महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा का मार्ग दिखाया,
और जहाँ आज का युवा दुनिया बदलने का सपना देख रहा है। भारत अब दुनिया के पीछे चलने वाला राष्ट्र नहीं रहा। भारत अब दुनिया को दिशा देने वाला राष्ट्र बन चुका है। इसी कारण आज पूरी दुनिया भारत को केवल देख नहीं रही बल्कि अनुकरण करने की कोशिश कर रही है।