रविवार दिल्ली नेटवर्क
स्पीकर श्री देवनानी ने कोलकाता में पश्चिम बंगाल विधानसभा के नवनिर्वाचित विधायकों को वित्तीय कार्य एवं बजटीय प्रक्रिया पर दिया मार्गदर्शन
कोलकत्ता/जयपुर : राजस्थान विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के लोक भवन में राज्यपाल आर. एन. रवि से शिष्टाचार भेंट की तथा उन्हें पुष्पगुच्छ भेंट कर और दुपट्टा ओढाकर उनका अभिवादन किया। स्पीकर देवनानी ने राज्यपाल रवि को राजस्थान विधानसभा का स्मृति चिन्ह और स्व लिखित “सनातन संस्कृति की अटल दृष्टि” पुस्तक भेंट की।
इस अवसर पर दोनों के मध्य लोकतांत्रिक संस्थाओं की सुदृढ़ता, सुशासन, जनकल्याण तथा संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा एवं लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता आदि सम सामयिक विषयों पर चर्चा हुई। देवनानी ने प्राइड ओरिएंटेशन में नए विधायकों को राजस्थान विधानसभा की सर्वोत्तम परंपराओं से अवगत कराया
विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने लोकसभा सचिवालय के पार्लियामेंटरी रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसीज़ (प्राइड) तथा पश्चिम बंगाल विधानसभा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित नवनिर्वाचित विधायकों के राष्ट्रीय प्रबोधन कार्यक्रम में “संसदीय व्यवस्था में वित्तीय कार्य और बजटीय प्रक्रिया” विषय पर अपना अध्यक्षीय उदबोधन देते हुए कहा कि लोकधन पर विधायिका का प्रभावी नियंत्रण ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति है।
उन्होंने कहा कि बजट केवल आय-व्यय का दस्तावेज नहीं, बल्कि जनता के विश्वास, पारदर्शिता, जवाबदेही और लोककल्याण का संवैधानिक संकल्प है। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने कार्यपालिका पर विधायिका का वित्तीय नियंत्रण सुनिश्चित करते हुए ऐसी व्यवस्था विकसित की है कि जनता की गाढ़ी कमाई का एक-एक रुपया सदन की अनुमति के बिना न तो व्यय किया जा सकता है और न ही जनता पर कोई नया कर लगाया जा सकता है। देवनानी ने कहा कि प्रत्येक जनप्रतिनिधि का दायित्व है कि वह बजटीय प्रक्रिया, अनुदान मांगों, विनियोग विधेयक, वित्त विधेयक तथा संचित निधि, आकस्मिकता निधि और लोक लेखा जैसी संवैधानिक व्यवस्थाओं की गहन समझ विकसित करे।
स्पीकर देवनानी ने कहा कि बजट पर होने वाली चर्चा राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मंच नहीं, बल्कि राज्य के आर्थिक विकास और जनकल्याण की दिशा तय करने वाला गंभीर लोकतांत्रिक विमर्श होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विभाग सम्बद्ध स्थायी समितियां कार्यपालिका की वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने उन राज्यों में भी ऐसी समितियों के गठन की आवश्यकता पर बल दिया, जहां अभी तक यह व्यवस्था लागू नहीं है। उन्होंने कहा कि इन समितियों के माध्यम से बजटीय प्रावधानों की गहन समीक्षा होगी, लोकधन के उपयोग पर प्रभावी निगरानी बढ़ेगी तथा बिना पर्याप्त चर्चा के बजट पारित होने जैसी प्रवृत्तियों पर रोक लगेगी।
विधानसभाध्यक्ष देवनानी ने राजस्थान विधानसभा की परंपराओं और नवाचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि राजस्थान में बजट पर सामान्य चर्चा और अनुदान मांगों पर पर्याप्त समय दिया जाता है तथा पहली बार निर्वाचित होकर आए सदस्यों को भी व्यापक भागीदारी का अवसर उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने बताया कि जनलेखा समिति, प्राक्कलन समिति तथा राजकीय उपक्रम समिति जैसी समितियां सार्वजनिक धन के उपयोग की गहन समीक्षा करती हैं। साथ ही विधानसभा सचिवालय की शोध एवं संदर्भ शाखा सदस्यों को बजटीय विषयों पर तथ्यात्मक अध्ययन सामग्री, सांख्यिकीय विश्लेषण और संदर्भ सामग्री उपलब्ध कराकर गुणवत्तापूर्ण बहस में सहयोग प्रदान करती है। उन्होंने विधान मंडलों की वित्तीय स्वायत्तता का विषय प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि जब कार्यपालिका विधायिका के प्रति जवाबदेह है, तब विधानसभाओं की वित्तीय आवश्यकताओं के लिए कार्यपालिका पर निर्भर रहना शक्ति पृथक्करण की संवैधानिक भावना के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि राजस्थान विधानसभा इस दिशा में लगातार प्रयास कर रही है तथा वर्तमान में विधानसभा अध्यक्ष को वर्षभर में 50 लाख रुपये तक के विकास एवं प्रशासनिक कार्य पूर्व स्वीकृति के बिना कराने का अधिकार प्राप्त है। उन्होंने कहा कि देश के सभी विधान मंडलों को स्वतंत्र वित्तीय अधिकार और अपना स्वायत्त बजट मिलना चाहिए, जिससे वे पूर्ण स्वतंत्रता के साथ अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकें।
स्पीकर देवनानी ने संसद और राज्य विधान मंडलों की व्यवस्थाओं की तुलना करते हुए कहा कि संसद के बजटीय प्रस्तावों को सम्मानपूर्वक मुख्य बजट का हिस्सा बनाया जाता है, जबकि अनेक राज्यों में विधानसभाओं के बजटीय प्रस्तावों में कार्यपालिका द्वारा कटौती कर दी जाती है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता की दृष्टि से गंभीर विषय बताते हुए इस दिशा में राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक विमर्श और आवश्यक सुधारों की आवश्यकता जताई।
उन्होंने इस अवसर पर उपस्थित लोकसभा सचिवालय के पूर्व संयुक्त सचिव श्री विनय मोहन के संसदीय अनुभव का उल्लेख करते हुए नवनिर्वाचित विधायकों से संवाद सत्र का अधिकतम लाभ उठाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि संसदीय प्रक्रियाओं, वित्तीय नियमों और कार्यपालिका की जवाबदेही सुनिश्चित करने के व्यावहारिक उपायों की समझ प्रभावी जनप्रतिनिधित्व की आधारशिला है।
देवनानी ने नवनिर्वाचित विधायकों का आह्वान किया कि वे बजट के आंकड़ों के पीछे निहित जनकल्याण के उद्देश्यों को समझें, अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों की समस्याओं को प्रभावी ढंग से सदन में उठाएं तथा वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के माध्यम से लोकतांत्रिक संस्थाओं को और अधिक सशक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
स्पीकर देवनानी ने कोलकाता के ऐतिहासिक कालीघाट मंदिर में किए माँ काली के दर्शन-पूजन
स्पीकर वासुदेव देवनानी ने पश्चिम बंगाल प्रवास के दौरान शुक्रवार को कोलकाता स्थित प्रसिद्ध एवं प्राचीन कालीघाट मंदिर में विधि-विधान से माँ काली के दर्शन एवं पूजन-अर्चना की। इस अवसर पर देवनानी ने माँ काली से देश और प्रदेशवासियों की सुख, समृद्धि, शांति एवं राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि माँ काली की कृपा सभी के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, साहस, सद्बुद्धि और लोककल्याण की भावना का संचार करे।
दर्शन-पूजन के उपरांत देवनानी ने मंदिर की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा की सराहना करते हुए कहा कि भारत के प्राचीन तीर्थस्थल हमारी सनातन संस्कृति, आस्था और आध्यात्मिक विरासत के जीवंत प्रतीक हैं। इनके दर्शन से आत्मिक शांति एवं नई ऊर्जा का अनुभव होता है।





