- राष्ट्र के विकास में सक्रिय भागीदारी होना आवश्यक
- भारत विभाजन पीडादायक अध्याय- विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी
रविवार दिल्ली नेटवर्क
जयपुर : राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस (चौदह अगस्त) पर वर्ष 1947 के विभाजन के दौरान अपने प्राण गंवाने वाले लोगों तथा उस कठिन दौर में पीड़ा और विस्थापन झेलने वाले परिवारों को स्मरण करते हुए कहा कि भारत का विभाजन इतिहास का अत्यंत पीडादायक अध्याय है।
देवनानी ने कहा कि विभाजन के कारण लाखों लोगों को अपना घर, परिवार और अपनी जन्मभूमि छोड़कर विस्थापित होना पड़ा। असंख्य लोगों ने हिंसा और बिछोह की पीड़ा सहन की। उन्होंने कहा कि यह दिवस हमें उस दौर की पीड़ा को स्मरण करने के साथ-साथ देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव को और मजबूत करने की प्रेरणा देता है।
राजस्थान ने अपनाया-
देवनानी ने कहा कि विभाजन की त्रासदी से हमें यह सीख लेनी चाहिए कि नफरत, हिंसा और वैमनस्य किसी भी समाज और राष्ट्र के लिए हितकारी नहीं हो सकते। भारत की शक्ति उसकी विविधता में एकता, आपसी भाईचारे, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत में निहित है। राजस्थान ने विभाजन के समय विस्थापित होकर आए लोगों को अपनाया और उन्हें नए जीवन की शुरुआत करने में सहयोग दिया। यह हमारी उस महान संस्कृति का परिचायक है, जिसमें मानवता, सह-अस्तित्व और ‘वसुधैव कुटुम्बकम् का भाव सर्वोपरि रहा है।
इतिहास से सीखें, भविष्य को उज्ज्वल बनायें-
विधानसभाध्यक्ष देवनानी ने कहा कि भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का उद्देश्य अतीत की पीड़ा को स्मरण कर समाज में वैमनस्य उत्पन्न करना नहीं, बल्कि इतिहास से सीख लेकर भविष्य को अधिक सुरक्षित, शांतिपूर्ण और एकजुट बनाना है। उन्होंने कहा कि हमें आने वाली पीढ़ियों को विभाजन की त्रासदी के कारणों और उसके परिणामों से अवगत कराते हुए उनमें देश की एकता, अखंडता, लोकतांत्रिक मूल्यों और आपसी सम्मान के प्रति प्रतिबद्धता विकसित करनी चाहिए।
विविधताओं के साथ एकता कायम रहे –
देवनानी ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे विभाजन की पीड़ा को स्मरण करते हुए सामाजिक सद्भाव, भाईचारे और आपसी सम्मान की भावना को मजबूत करने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि देश की एकता और अखंडता को मजबूत रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। हम सभी मिलकर ऐसा भारत बनाने की दिशा में आगे बढ़े, जहां विविधताओं के बीच एकता कायम रहे और आने वाली पीढ़ियों को एक सशक्त, शांतिपूर्ण, समरस एवं एकजुट राष्ट्र मिले।
`विभाजन केवल भूगोल का बंटवारा नहीं, करोड़ों लोगों के दर्द और विस्थापन की कहानी –
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद (एनसीपीएसएल) एवं सिंधी संगीत समिति अजमेर के संयुक्त तत्वाधान में अजमेर के होटल मेट्रो-इन में आयोजित विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि वर्ष 1947 में हुआ भारत का विभाजन दुनिया का सबसे बड़ा मजबूरी का पलायन था।
देवनानी ने विस्थापन के दर्द को बयां करते हुए कहा कि इतिहास के इस काले अध्याय को केवल सरकारी दस्तावेजों या संपत्ति के आंकड़ों से नहीं समझा जा सकता। विभाजन का वास्तविक इतिहास उस वृद्ध की आंखों में है जिसने अपने घर की अंतिम चौखट को देखा, उस मां के दर्द में है जिसने यात्रा के दौरान अपने बच्चे को चुप कराया और उन मौन स्मृतियों में सुरक्षित है जिन्हें लोगों ने अपने दिलों में छुपा कर रखा।
देवनानी ने समाज के गौरवशाली सफर की सराहना करते हुए कहा कि जिस सिंधी समाज से इतिहास ने उसका भूगोल छीन लिया, उसने अपने कड़े परिश्रम से अपना नया भविष्य निर्मित किया। समाज ने स्वयं को कभी विस्थापित कहकर जीवन की इतिश्री नहीं की, बल्कि शिक्षा, व्यापार, उद्यम और समाजसेवा के बल पर स्वयं को निर्माता के रूप में पुनस्र्थापित किया। अजमेर, जयपुर, जोधपुर सहित देश के अनेक शहरों में समाज ने शून्य से शुरुआत कर राख से भी प्रगति की नई अग्नि प्रज्वलित की है।
मातृभाषा के संरक्षण पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए विधानसभाध्यक्ष ने कहा कि भाषा केवल ध्वनि नहीं, बल्कि स्मृति की संरचना होती है। किसी समाज का सांस्कृतिक पतन तब शुरू होता है जब उसकी अगली पीढ़ी पूर्वजों की भाषा बोलना बंद कर देती है । उन्होंने स्पष्ट किया कि सिंधी भाषा की रक्षा केवल एक समुदाय की मांग नहीं, बल्कि भारत की बहुलतामूलक सभ्यता की रक्षा का प्रश्न है।
कार्यक्रम में उपस्थित युवाओं को प्रेरित करते हुए देवनानी ने कहा कि अपनी जड़ों से जुड़े रहना आधुनिकता से पीछे हटना नहीं है। उन्होंने कहा आप विश्व की भाषाएं सीखिए, विज्ञान सीखिए, कृत्रिम बुद्धिमत्ता सीखिए, वैश्विक अर्थव्यवस्था में प्रवेश कीजिए, लेकिन घर लौटकर अपने दादा-दादी की भाषा में उनसे दो शब्द बोलने की क्षमता को आधुनिक जीवन की कीमत मत बनने दीजिए।
कार्यक्रम संयोजक घनश्याम ठारवानी ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण के साथ किया गया। लोक गायक घनश्याम भगत द्वारा देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति दी गई। स्वामी सर्वानंद विद्या मंदिर के बच्चों ने वंदे मातरम की प्रस्तुति दी व राष्ट्रभक्ति से ओत प्रोत लघु नृत्य नाटिका पेश की। पूर्व पार्षद रमेश चेलानी ने बताया कि इस अवसर पर समाज के प्रतिभाशाली बच्चों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
मुख्य वक्ता राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद के सदस्य मनीष देवनानी ने नई पीढ़ी को मातृभाषा से जोड़ने की बात कही। सम्राट पृथ्वीराज चौहान महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. हासो दादलानी एवं राजकीय अल्प भाषाई शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान की व्याख्याता लता ठारवानी ने भी विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि झूलेलाल सिंधी सेंट्रल पंचायत के अध्यक्ष राजा डी. थारवानी, समाजसेवी रामचंद्र गुलाबानी, गोविंद खटवानी, विजय शाहानी, चंद्र लखानी, जितेंद्र रंगवानी, अशोक मंगलानी, भगवान वरलानी आदि का सहयोग रहा।





