मुंबई (अनिल बेदाग) : भारत के मरीन इंग्रिडिएंट्स उद्योग में सतत विकास की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए इंडियन मरीन इंग्रिडिएंट्स एसोसिएशन ने अपनी राष्ट्रीय सततता पहल का दूसरा महत्वपूर्ण चरण पूरा किया है। महाराष्ट्र–गोवा स्मॉल पेलैजिक फिशरी इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट और इंडियन वेस्ट कोस्ट मल्टी-स्पीशीज़ ट्रॉलर FIP को राष्ट्रीय जिम्मेदार मत्स्य पालन विकास रूपरेखा में शामिल किया गया है।
इंडियन मरीन इंग्रिडिएंट्स एसोसिएशन का लक्ष्य देशभर में जिम्मेदार मत्स्य प्रबंधन के लिए एक समन्वित ढांचा तैयार करना और वैश्विक बाजार में भारत की विश्वसनीयता बढ़ाना है। संगठन ‘वन इंडिया–वन फिशरी इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट’ की अवधारणा के जरिए बिखरे प्रयासों को एक साझा दिशा देने पर जोर दे रहा है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद दावूद सैत ने कहा, “महाराष्ट्र–गोवा स्मॉल पेलैजिक एफआईपी और वेस्ट कोस्ट ट्रॉलर एफआईपी का शामिल होना हमारी राष्ट्रीय सततता पहल का दूसरा महत्वपूर्ण चरण है। अब इसे प्रस्तावित वेस्ट कोस्ट और ईस्ट कोस्ट एफआईपी के माध्यम से तमिलनाडु तक विस्तारित करने की दिशा में काम होगा।”
इस पहल में मछुआरों, उद्योग, प्रसंस्करण इकाइयों, निर्यातकों, विशेषज्ञों और सरकारी एजेंसियों के सहयोग को महत्वपूर्ण माना गया है। एसोसिएशन का मानना है कि सामूहिक प्रयासों से भारत का मरीन इंग्रिडिएंट्स और समुद्री खाद्य क्षेत्र वैश्विक स्तर पर और मजबूत पहचान बना सकता है।





