प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने युद्धविराम का स्वागत किया
गोपेन्द्र नाथ भट्ट
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच हुए युद्धविराम का भारत सहित पूरी दुनिया ने राहत के साथ स्वागत किया है। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस घटनाक्रम का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्रीय और वैश्विक शांति के लिए एक सकारात्मक कदम बताया है। पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते सैन्य तनाव और संघर्ष की आशंकाओं के बीच यह युद्धविराम न केवल क्षेत्रीय स्थिरता बल्कि वैश्विक आर्थिक संतुलन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हाल के घटनाक्रमों ने यह संकेत दिया है कि लगातार बढ़ते सैन्य तनाव के बाद दोनों पक्ष फिलहाल प्रत्यक्ष संघर्ष को सीमित करने के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं। यह युद्धविराम उस समय सामने आया है जब क्षेत्र में अस्थिरता चरम पर पहुंच रही थी और तेल आपूर्ति से लेकर वैश्विक व्यापार मार्गों तक पर संकट के बादल मंडराने लगे थे। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को आशंका थी कि संघर्ष लंबा खिंचने पर ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित होगी, वहीं ईरान भी आर्थिक प्रतिबंधों और आंतरिक चुनौतियों के बीच व्यापक युद्ध का जोखिम नहीं लेना चाहता था।
युद्धविराम की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इससे तत्काल सैन्य टकराव का खतरा कम हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप, मिसाइल हमले और प्रॉक्सी समूहों के माध्यम से संघर्ष लगातार बढ़ता रहा है। ऐसी स्थिति में संवाद और संयम का कोई भी प्रयास क्षेत्रीय शांति के लिए सकारात्मक संकेत माना जाएगा। हालांकि इतिहास बताता है कि ईरान-अमेरिका संबंधों में अविश्वास इतना गहरा है कि केवल युद्धविराम से स्थायी समाधान की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी।
इस घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण पक्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था भी है। पश्चिम एशिया विश्व के ऊर्जा बाजार का प्रमुख केंद्र है। जब भी इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिलता है। युद्धविराम की खबरों से अंतरराष्ट्रीय बाजारों को राहत मिली है और निवेशकों का भरोसा कुछ हद तक लौटा है। भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों के लिए भी यह सकारात्मक संकेत है क्योंकि तेल कीमतों में स्थिरता से महंगाई और व्यापार घाटे पर नियंत्रण रखने में मदद मिल सकती है।
राजनीतिक दृष्टि से देखें तो यह युद्धविराम दोनों पक्षों की रणनीतिक मजबूरी का परिणाम भी माना जा सकता है। अमेरिका की प्राथमिकताएं अब केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं हैं। वह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र, चीन की बढ़ती शक्ति और वैश्विक आर्थिक प्रतिस्पर्धा पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है। दूसरी ओर ईरान भी अपने क्षेत्रीय प्रभाव को बनाए रखते हुए आर्थिक दबावों से राहत चाहता है। ऐसे में प्रत्यक्ष युद्ध दोनों के हितों के अनुकूल नहीं दिखता।
फिर भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पश्चिमी देशों की चिंताएं अभी समाप्त नहीं हुई हैं। अमेरिका और उसके सहयोगी चाहते हैं कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर अधिक पारदर्शिता दिखाए, जबकि ईरान इसे अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़ा विषय मानता है। इसके अलावा क्षेत्र में सक्रिय विभिन्न सशस्त्र समूहों की भूमिका भी शांति प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। यदि किसी भी पक्ष से उकसावे वाली कार्रवाई होती है तो युद्धविराम की स्थिति जल्दी टूट सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम में कूटनीति की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। युद्धविराम केवल संघर्ष को रोक सकता है, लेकिन स्थायी शांति के लिए विश्वास निर्माण, संवाद और राजनीतिक समझौते आवश्यक हैं। संयुक्त राष्ट्र तथा क्षेत्रीय शक्तियों के लिए भी यह अवसर है कि वे दोनों पक्षों के बीच संवाद को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
पश्चिम एशिया लंबे समय से वैश्विक राजनीति का सबसे संवेदनशील और विस्फोटक क्षेत्र रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच दशकों से चला आ रहा तनाव समय-समय पर सैन्य टकराव, आर्थिक प्रतिबंधों और कूटनीतिक संघर्षों के रूप में सामने आता रहा है। ऐसे माहौल में यदि दोनों देशों के बीच युद्धविराम की स्थिति बनती है तो यह केवल दो देशों के संबंधों का मामला नहीं रह जाता, बल्कि इसका प्रभाव पूरे विश्व की राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ता है। कुल मिलाकर ईरान-अमेरिका युद्धविराम को पश्चिम एशिया में राहत की सांस के रूप में देखा जा सकता है। यह क्षेत्र को तत्काल युद्ध की आशंकाओं से कुछ हद तक बाहर निकालता है और वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी स्थिरता का संदेश देता है। लेकिन यह तभी ऐतिहासिक उपलब्धि साबित होगी जब इसे व्यापक राजनीतिक समाधान और स्थायी शांति की दिशा में पहला कदम बनाया जाए। अन्यथा यह केवल एक अस्थायी विराम बनकर रह जाएगा, जिसके बाद तनाव फिर से उभर सकता है। आने वाले दिनों में दुनिया की नजरें इसी बात पर टिकी रहेंगी कि क्या यह युद्धविराम शांति की शुरुआत है या अगले संघर्ष से पहले का शांत अंतराल!!





