नरेंद्र तिवारी
सेंधवा (नरेंद्र तिवारी) पहाड़ पर्यावरण के रक्षक एवं गांव कि शान होते हैं। गाँव के रहवासी इन पहाडो से भलीभांती परिचित होते हैं । इन्ही पहाड़ो से ग्रामीणजन अपनी आजीविका का साधन जुटाते हैं। गाँव के इन्ही पहाडो पर सड़क निर्माण के बहाने जेसीबी चलाकर मुरूम, बंड़े, पत्थर आदि निकाले जा रहे हैं। पहाड़ो पर चल रही जेसीबी पर्यावरण को तो नुकसान पहुंचा रही हैं। सरकारी खजाने पर भी डाका डाल रही हैं। इन सब पर लोक निर्माण विभाग, राजस्व और खनिज विभाग ने आश्चर्यजनक मौन धारण कर लिया हैं। गांव के पहाड़ो पर चल रही जेसीबी गाँव के भूगोल को बदल रही हैं। बरसात में पहाड़ो के कटने का परिणाम ग्रामीण कृषको को भारी क़ीमत देकर भुगतना पड़ेगा, जब तेज बरसात में पानी खेतो में प्रवेश करेगा। किसान कि पूरी मेहनत मिट्टी में मिल जाएगी, किंतु यह चिंता न लोक निर्माण विभाग को हैं, न ही सड़क निर्माण ठेकेदार को और न ही राजस्व एवं खनिज विभाग को, जिनकी खामोशी गाँव के भूगोल को बिगाड़ रही हैं, पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही हैं और गाँव के किसानों के लिए परेशानी को आमंत्रित कर रही हैं।
सेंधवा अनुभाग में पहाड़ो पर निरंतर जेसीबी चल रही हैं। यहाँ ग्राम बाबदड़ से हिंदली, मोहाला, रेलावती मार्ग का निर्माण जारी हैं, करीब 12 किमी के इस निर्माण में ठेकेदार द्वारा अनेको जगह पहाडो पर जेसीबी चलाई जा रही है। पहाडो से करोडो रु कि मुरूम, पत्थर, मिट्टी आदि का खनन किया जा रहा हैं। लोक निर्माण विभाग के सेंधवा एसडीओ से इस संबंध में जानकारी चाही गयी किंतु उनके द्वारा कोई जानकारी नहीं दी जाकर टालने का निरंतर प्रयास किया जा रहा हैं। इस सड़क निर्माण के ठेकेदार ओंकार यादव हैं, जिनका सब ठेकेदार बड़वानी निवासी धन्यजय सिँह हैं। बड़वानी जिले के खनिज अधिकारी, लोक निर्माण विभाग के स्थानीय एसडीओ एवं राजस्व विभाग को भी इसकी सूचना वाट्सएप के माध्यम से दी गयी किंतु सभी का मौन अनेको प्रश्न खडे कर रहा हैं। सड़क निर्माण में समतलीकरण और गड्ढे भराई में इस सड़क निर्माण ठेकेदार ने शाहपुरा फाटे से मोहाला मार्ग पर गाँव गोंदी जो ग्राम पंचायत नांदिया का एक फलिया हैं, के पहाड़ के मध्य अपना अड्डा बना रखा हैं। जहां डम्फरो से इस पहाड़ कि खुदाई कि जा रही हैं, जिसकी सूचना स्थानीय अधिकारियो को अनेको बार भी भेजी गयी किंतु किसी ने संतोषप्रद जवाब देने कि कोशिश नहीं कि न ही इस विषय में किसी कार्यवाही को अंजाम दिया। इस ठेकेदार ने सड़क निर्माण के लिए करोडो रु कि मुरूम, मिट्टी, पत्थर इस पहाड़ से निकालकर सड़क निर्माण में उपयोग कर लिया।
लोक निर्माण विभाग द्वारा सेंधवा अनुभाग में एक और सड़क मार्ग का निर्माण किया जा रहा हैं, जो ग्राम रामकोला से किरचाली, सुरानी, चाचरिया पहुंच मार्ग हैं। इस मार्ग का ठेका रामलाल चौधरी एन्ड कम्पनी जोधपुर के द्वारा किया जा रहा हैं। मार्ग 6 किमी से कुछ अधिक हैं। कार्य प्रारम्भ वर्ष 2023 से हुआ था। उक्त ठेकेदार ने सड़क के समतलीकरण एवं भराव के लिए गिट्टी, मिट्टी, पत्थर ग्राम सुरानी के शामरी फलिया के पहाड़ पर जेसीबी चलाकर किया हैं। गाँव के किसान ग्यारसीलाल ने बताया हमारे खेत के पास जेसीबी चलाकर पहाड़ खोद दिया गया। मना करने पर सरकारी निर्माण का भय कारित किया गया। पहाड़ कि खुदाई बरसात में हमारे खेतो को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
पहाड़ खोदकर गाँव के भूगोल को बिगाड़ने का यह क्रम ग्राम पीसनावल में आरईएस विभाग के माध्यम से डिसीएम निर्माण कम्पनी द्वारा किये जा रहे 2 किमी के डामरीकरण मार्ग में भी किया जा रहा हैं। ऐसा ही दृश्य आमझिरी से शिवन्यापानी सड़क निर्माण में भी दिखाई दिया।। यहाँ भी जगह जगह पहाडो कि बेतरतीब खुदाई कर कि जा रही हैं। सड़क निर्माण के इन ठेकेदारों द्वारा कि वैध अनुमति अगर हैं तो लोक निर्माण विभाग इसे बताने में गुरेज क्यों कर रहा हैं। क्यों जिले का खनिज विभाग मौन हैं। क्या गाँव पहाड़ पर जेसीबी चलाने कि जानकारी ग्राम पंचायत को नहीं देना चाहिए। अचम्भा इस बात का हैं। गाँव के पहाड़ पर खनन कि जानकारी से ग्राम पंचायत को भी अवगत नहीं कराया जा रहा हैं। गाँव सुरानी में तो वन विभाग के पहाड़ पर जेसीबी चलाकर खनन को अंजाम दिया गया।
सड़क निर्माण आवश्यक हैं, प्रगति के लिए इन सड़को कि बहुत जरूरत हैं। सड़क प्रगति कि पहिचान मानी जाती हैं, किंतु सड़क निर्माण के लिए गाँव के पहाडो कि बलि देना कहा तक न्याय संगत हैं। सेंधवा अनुभाग कि सड़को कि आड़ में पहाड़ो पर लगातार जेसीबी के चलने कि यह कहानी सिर्फ सेंधवा कि नहीं, इन पहाड़ो कि खुदाई कि कहानी सम्पूर्ण बड़वानी जिले एवं सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में दोहराई जा रही हैं। सड़क निर्माण कि आड़ में गाँव के भूगोल को बिगाड़ने कि तेजी से चलती उक्त प्रक्रिया को गाँव एवं पर्यावरण के हित में रोका जाना बहुत जरुरी हैं। पहाड़ सिर्फ मिट्टी पत्थर का ढेर नहीं गांव के पर्यावरण का रक्षक हैं। इसकी सुरक्षा करना किसी एक कि नहीं सबकी जवाबदेही हैं। सरकारी एजेंसी कि उपेक्षा और अनदेखी पर्यावरण के इस रक्षक को नुकसान पहुंचा रही हैं।





