गोपेन्द्र नाथ भट्ट
पश्चिम एशिया का अत्यंत संवेदनशील समुद्री क्षेत्र स्टेट ऑफ हॉर्मुज (हॉर्मुज जलडमरूमध्य) एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय तनाव का केंद्र बन गया है। हाल ही में एक भारतीय व्यापारिक जहाज पर ईरानी बलों द्वारा अटैक की गई कार्रवाई ने न केवल भारत बल्कि पूरे वैश्विक समुदाय को चिंतित कर दिया है। इस जहाज पर सवार भारतीय चालक दल में राजस्थान के मर्चेंट नेवी अधिकारी भी शामिल बताए जा रहे हैं, जो फिलहाल असमंजस और अनिश्चितता की स्थिति में फंसे हुए हैं।
स्टेट ऑफ हॉर्मुज (हॉर्मुज जलडमरूमध्य) विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि या टकराव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ता है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में होने वाली हर छोटी-बड़ी घटना पर दुनिया की नजर बनी रहती है।
इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव है। पिछले कुछ समय से दोनों देशों के संबंध लगातार बिगड़ते रहे हैं। परमाणु समझौते, क्षेत्रीय प्रभाव और सैन्य गतिविधियों को लेकर दोनों पक्षों के बीच अविश्वास गहराता गया है। हाल के घटनाक्रम में यह तनाव और अधिक स्पष्ट रूप से सामने आया है।
भारतीय जहाज पर ईरानी कार्रवाई को इसी व्यापक भू-राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है। हालांकि ईरान की ओर से अक्सर ऐसी कार्रवाइयों को सुरक्षा कारणों या नियमों के उल्लंघन के संदर्भ में उचित ठहराया जाता है, लेकिन इससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों और व्यापारिक स्वतंत्रता को लेकर प्रश्न उठते हैं। जहाज पर सवार भारतीय नागरिकों की स्थिति को लेकर भारत में चिंता बढ़ गई है, विशेष रूप से उन परिवारों में जिनके सदस्य इस जहाज पर कार्यरत हैं।
भारत सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय के माध्यम से तत्काल कूटनीतिक पहल शुरू की है। ईरानी अधिकारियों से संपर्क स्थापित कर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और शीघ्र रिहाई सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है। भारत की विदेश नीति परंपरागत रूप से संतुलित और संवाद-आधारित रही है, और ऐसे मामलों में भी वह शांति एवं वार्ता के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास करता है।
इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच संभावित संघर्ष को रोकने के लिए इस्लामाबाद में चल रही कूटनीतिक कोशिशों में फिलहाल कोई ठोस सफलता नहीं मिल पाई है। युद्धविराम (सीजफायर) को लेकर समय सीमा बढ़ा दी गई है, लेकिन स्थायी समझौते की दिशा में प्रगति सीमित ही दिखाई देती है। इससे क्षेत्र में अनिश्चितता बनी हुई है और तनाव कम होने के बजाय लंबे समय तक बने रहने की आशंका प्रबल हो गई है।इस स्थिति का असर केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं है। यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ता है, तो इसका सीधा प्रभाव वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ेगा। तेल की कीमतों में वृद्धि से भारत जैसे आयात-निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और शिपिंग मार्गों की सुरक्षा को लेकर भी नई चुनौतियां सामने आ सकती हैं।
राजस्थान के मर्चेंट नेवी अधिकारियों का इस संकट में फंसना इस बात का संकेत है कि वैश्विक घटनाओं का असर स्थानीय स्तर तक कैसे पहुंचता है। यह केवल एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा नहीं, बल्कि उन परिवारों की चिंता और पीड़ा का विषय भी है, जो अपने प्रियजनों की सुरक्षित वापसी का इंतजार कर रहे हैं।
कुल मिला कर्च स्टेट ऑफ हॉर्मुज (हॉर्मुज जलडमरूमध्य) में बढ़ता तनाव वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। भारत सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए यह आवश्यक है कि वे कूटनीतिक प्रयासों को और तेज करें, ताकि न केवल फंसे हुए नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित हो सके, बल्कि इस महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र में स्थायी शांति भी स्थापित हो सके ।





