पदम मेहता ने दिल्ली में केन्द्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल से की भेंट : राजस्थान सरकार से इस ऐतिहासिक फैसले को शीघ्र लागू करवाने का किया आग्रह
रविवार दिल्ली नेटवर्क
नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय द्वारा हाल ही राजस्थान सरकार को राजस्थान में सरकारी एवं निजी स्कूलों में प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा राजस्थानी में अनिवार्य शिक्षा लागू करने की नीति बनाने के निर्देश देने के ऐतिहासिक फैसले से उत्साहित ‘विशेष अनुमति याचिका’ दायर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार, दैनिक जलते दीप एवं राजस्थानी मासिक ‘माणक’ के प्रधान संपादक पदम मेहता ने शुक्रवार को अपने नई दिल्ली प्रवास में केन्द्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से भेंट की और उनसे आग्रह किया कि वे राजस्थान सरकार से विशेषकर मुख्यमंत्री भजनलाल जी शर्मा से सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले को शीघ्र से शीघ्र लागू करवायें ताकि प्रदेश के स्कूलों में बच्चों को अन्य प्रदेशों की तरह अपनी मातृ भाषा में प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने की सुविधा मिल सके तथा युवाओं के लिए रोजगार का मार्ग प्रशस्त हो सके। उन्होंने बताया की सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय संविधान की भावना और भारत सरकार की नई शिक्षा नीति तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भावनाओं के अनुरूप है ।
मेहता ने कहा कि सौभाग्य से संविधान निर्माता डॉ भीमराव अम्बेडकर के बाद देश में पहली बार दलित वर्ग से आप जैसे लोकप्रिय नेता भारत के कानून मंत्री हैं और आप न केवल राजस्थान के जनप्रतिनिधि हैं अपितु शुरू से ही राजस्थानी के प्रबल समर्थक हैं। 11 वर्ष पूर्व मई 2015 में नई दिल्ली के जन्तर मंतर पर राजस्थान से आए हजारों लोगों ने राजस्थानी भाषा मान्यता समिति के बैनर तले आयोजित प्रदर्शन कार्यक्रम को अपना आशीर्वाद देने के बाद में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिले प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व भी आपने किया था। मेहता ने श्री मेघवाल को सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले की प्रति के साथ राजस्थानी भाषा से जुड़ी तथ्यात्मक जानकारियां युक्त पत्र एवं 25 अगस्त 2003 को राजस्थान विधानसभा द्वारा सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव की प्रति जिसमें राजस्थानी भाषा की समग्र परिभाषा है, प्रदान करते हुए सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का प्रभावी क्रियान्वयन करवाने का अनुरोध किया। श्री मेहता ने कहा कि देश-विदेश में बसे दस करोड़ से अधिक राजस्थानी पिछले सात दशकों से अधिक लम्बे समय से राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता का इंतजार कर रहे हैं और अब राजस्थानियों के सब्र का बांध टूट रहा है । शिक्षा और रोजगार में राजस्थानी को उसका हक-हकूक दिलवाने के लिए हमारे युवा बहुत उद्वेलित हो रहे हैं। श्री मेघवाल ने विश्वास दिलाया कि वे मुख्यमंत्री भजनलाल जी शर्मा से इस फैसले के शीघ्र क्रियान्वयन बाबत चर्चा करेंगे ।
राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष से भी मेहता ने की मुलाक़ात
पदम मेहता ने अपने दिल्ली प्रवास में राजस्थान स्टेट गेस्ट हाऊस चाणक्यपुरी में ठहरे विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी से भी मुलाक़ात की और उन्हें राजस्थान विधानसभा द्वारा 23 वर्ष पूर्व 25 अगस्त 2003 को राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए सर्वसम्मति से संकल्प पारित कर केन्द्र सरकार को भेजे जाने का स्मरण कराया और अनुरोध किया कि वे राजस्थान सरकार से सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्णय के अनुरूप कार्यवाही कराने के लिए अपने प्रभाव का उपयोग करें । इस प्रस्ताव में दी गई ‘राजस्थानी भाषा’ की परिभाषा के अनुरूप प्रदेश की सरकारी व निजी स्कूलों में प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा ‘राजस्थानी’ में शिक्षा का समावेश करवावें। श्री मेहता ने देवनानी को स्मरण कराया कि आप जब प्रदेश के शिक्षा मन्त्री रहे तब भी आपने वर्तमान में विधानसभा में किए जा रहे नवाचारों की तरह उस समय शिक्षा विभाग में भी कई नवाचार किए थे। साथ ही आपने सिन्धी बच्चों को उनकी मातृभाषा सिंधी में प्राथमिक स्तर पर स्कूलों में शिक्षा का प्रावधान करवाया था। उच्चतम न्यायालय के फैसले अनुसार राजस्थान में सरकारी एवं निजी स्कूलों में प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा राजस्थानी में अनिवार्य शिक्षा लागू करने की नीति बनने से अन्य राज्यों की तरह राजस्थान के विद्यार्थी भी लाभान्वित होंगे और युवाओं के लिए रोजगार के मार्ग खुलेंगे ।
मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री के एसीएस व सचिव से भी भेंट
इससे पहले मेहता ने जयपुर में राजस्थान के मुख्य सचिव वी.श्रीनिवास से मुलाकात की और सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रदेश के स्कूलों में मातृ भाषा राजस्थानी को एक विषय के रूप में शुरू करने की नीति बनाने सम्बन्धी आदेश की त्वरित पालना कराने का आग्रह किया। मुख्य सचिव ने इस दौरान उन्हें राजस्थानी भाषा के भगीरथ की उपमा से नवाजा और पुष्प गुच्छ भेंट कर उन्हें सम्मानित भी किया। साथ ही राजस्थानी भाषा के लिये हर संभव प्रयास का आश्वासन दिया। जयपुर प्रवास में पदम मेहता ने मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) अखिल अरोड़ा और सचिव जितेंद्र सोनी से भी मुलाकात कर मातृभाषा राजस्थानी को प्रदेश के स्कूलों में पढ़ाने के सुप्रीम कोर्ट निर्णय की अनुपालना का आग्रह करते हुए मुख्यमंत्री जी के नाम तत्संबंधी पत्र भी उन्हें प्रदान किए।





