यदि बंगाल में भाजपा सरकार नहीं बनती तो ‘ चिकन नेक‘ का विकास असंभव था

The development of 'Chicken Neck' would have been impossible if the BJP government had not been formed in Bengal

अशोक भाटिया

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी सरकार के गठन और सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने के बाद सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे ‘चिकन नेक’ कहा जाता है, के विकास और सुरक्षा से जुड़ी लंबित फाइलों को केवल 15 दिनों के भीतर जिम्मेदारी सौंपी दी गई है। जिन हिस्सों की जिम्मेदारी सौंपी गई उनमें से कई हिस्से संकरे और संवेदनशील ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर से होकर गुज़रते हैं, जो पूर्वोत्तर और देश के बाकी हिस्सों के बीच जमीन से जुड़ा एकमात्र रास्ता है।बंगाल की नई सरकार ने अपने शुरुआती फैसलों में से एक में, नेशनल हाईवे के सात हिस्सों को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और नेशनल हाईवेज़ एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड को सौंपने की मंजूरी दे दी है।

इस कदम का असर न सिर्फ़ इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास जैसे सड़कों की मरम्मत और चौड़ीकरण और व्यापार पर पड़ेगा, बल्कि रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ेगा। यह ऐसा विषय हैं जिसपर भाजपा हमेशा से बातें करती रही हैं। अब केंद्र और बंगाल, दोनों जगहों पर भाजपा सत्ता में है।

सौंपे गए सात हिस्सों में से पांच सिलीगुड़ी कॉरिडोर या ‘चिकन नेक’ से होकर गुज़रते हैं। यह 60 किलोमीटर लंबा एक इलाका है, जो अपनी सबसे संकरी जगह पर महज़ 20-22 किलोमीटर चौड़ा है और नेपाल, भूटान और बांग्लादेश के बीच फंसा हुआ है, जबकि इसके उत्तर में सिक्किम के पार चीन स्थित है। इस कॉरिडोर में किसी भी तरह की रुकावट से आठ पूर्वोत्तर राज्यों के साथ कनेक्टिविटी पर असर पड़ सकता है।

सुरक्षा जानकारों ने इस क्षेत्र में ज़्यादा चौड़े और ज्यादा मज़बूत हाईवे की जरूरत पर बार-बार जोर दिया है, खासकर 2017 में चीन के साथ डोकलाम गतिरोध (भारत-भूटान-चीन के मिलन बिंदु पर) और बार-बार होने वाले भूस्खलन को ध्यान में रखते हुए, जिससे अक्सर सिक्किम और पहाड़ी इलाकों से संपर्क टूट जाता है।

बंगाल मुख्य सचिव के दफ़्तर से जारी एक प्रेस नोट में कहा गया है, ‘पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य लोक निर्माण विभाग के NH विंग से राष्ट्रीय राजमार्गों के सात हिस्सों को NHAI और NHIDCL को सौंपने के लिए सैद्धांतिक मंज़ूरी दे दी है।’इसमें कहा गया है कि ये प्रस्ताव केंद्रीय एजेंसियों के बार-बार अनुरोधों के बावजूद लगभग एक साल से राज्य सरकार के पास लंबित थे और औपचारिक रूप से सौंपे जाने के अभाव में इन हिस्सों पर काम रुका हुआ था। भाजपा ने इन हिस्सों को केंद्रीय एजेंसियों को सौंपने में हुई देरी को लेकर ममता बनर्जी की पिछली सरकार पर लगातार हमले किए थे।

भाजपा ने आरोप लगाया था कि बांग्लादेश से हो रही अवैध घुसपैठ जिसे उसने तृणमूल सरकार की ओर से बढ़ावा देने का आरोप लगाया था। आरोपों में कहा गया था कि उत्तरी बंगाल के सीमावर्ती जिलों की आबादी का स्वरूप बदलकर सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा को और भी ज़्यादा कमज़ोर कर दिया है। साल 2020 में दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों के आरोपी शरजील इमाम ने कहा था कि अगर 5 लाख मुसलमान भी इकट्ठा हो जाएं तो चिकन नेक को बंद करके भारत को भारत को नॉर्थ ईस्ट के राज्यों से पूरी तरह काटा जा सकता है। शरजील इमाम ये बात इसलिए कह रहा था, क्योंकि चिकन नेक के इलाके को मुस्लिम अक्सरियत माना जाता है। मुस्लिम अक्सरियत का मतलब ये है कि यहां मुस्लिम आबादी बहुसंख्यक है। अब ये बात इतनी खतरनाक थी कि इसके कारण शरजील इमाम को आज तक अदालत से जमानत नहीं मिली। जबकि केंद्र सरकार ने भी ऐसी कई कोशिशें कीं, जिससे चिकन नेक का इलाका उसकी एजेंसियों और बीएसएफ को पूरी तरह मिल जाए। ममता बनर्जी को इसके लिए कई प्रस्ताव भेजे गए, लेकिन वह ऐसा करने के लिए तैयार नहीं हुईं।

शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद, भाजपा ने यह हवाला देकर कहा था कि बांग्लादेश से आने वाली कट्टरपंथी और भारत-विरोधी आवाज़ें ‘चिकन नेक’ को काटकर भारत को कमजोर करने की बातें कर रही हैं। जहां एक तरफ ममता यह दलील देती रहीं कि सीमा प्रबंधन केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है, वहीं भाजपा ने दावा किया कि केवल डबल-इंजन वाली सरकार ही इस नाज़ुक रास्ते को मज़बूत बनाने में सक्षम है।

अधिकारियों ने बताया कि यह हस्तांतरण फैसला उन राजमार्गों के लंबे समय से अटके विस्तार, मज़बूतीकरण और मरम्मत के काम में तेजी ला सकता है, जिन्हें रक्षा लॉजिस्टिक्स, व्यापार, पर्यटन और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिए बेहद अहम माना जाता है। खास तौर पर, NH10 मॉनसून से होने वाले नुकसान की चपेट में आता रहा है, जिससे सिक्किम को होने वाली सप्लाई में बार-बार रुकावटें आती रही हैं। दार्जिलिंग को जोड़ने वाले NH110 को भी सालों से भूस्खलन, ज़मीन धंसने और ट्रैफिक जाम जैसी पुरानी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

इस पूरे क्षेत्र को ‘चिकन नेक’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि भौगोलिक रूप से इसका आकार मुर्गी की गर्दन जैसा पतला है। यह पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्से में दार्जिलिंग और जलपाईगुड़ी के पास स्थित है। लगभग 60 किलोमीटर लंबे इस पूरे इलाके की सबसे संकरी जगह महज 20 से 22 किलोमीटर चौड़ी है। आकार में छोटा होने के बावजूद यह भारत का सबसे संवेदनशील भूभाग माना जाता है।सिलीगुड़ी कॉरिडोर सिर्फ आंतरिक रूप से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इसकी अंतरराष्ट्रीय सीमाएं इसे और भी संवेदनशील बनाती हैं। यह इलाका नेपाल और बांग्लादेश की सीमाओं से घिरा हुआ है। इसके साथ ही, सिक्किम और तिब्बत की चुंबी वैली सहित भूटान का डोकलाम ट्राई-जंक्शन भी इसके बेहद करीब स्थित है। चीन की नजरें हमेशा इस इलाके के पास टिकी रहती हैं, जिससे इस भूभाग पर किसी भी तरह का प्रशासनिक या ढांचागत व्यवधान पूरे देश की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है।

गौरतलब है कि इन प्रमुख रणनीतिक मार्गों का सीधा नियंत्रण केंद्र सरकार के पास आने का सबसे बड़ा फायदा भारतीय सेना को मिलेगा। यहां सेना की 33 कोर सहित कई अन्य महत्वपूर्ण सैन्य इकाइयां तैनात रहती हैं। उत्तर-पूर्व की सीमाओं पर साजो-सामान, भारी हथियार और सैनिकों की त्वरित तैनाती के लिए इन सड़कों का हर समय बेहतरीन स्थिति में होना बेहद जरूरी है। अब केंद्र के सीधे नियंत्रण से सामरिक तैयारी मजबूत होगी और आपातकालीन स्थितियों में सेना बिना किसी रुकावट के तेजी से कदम उठा सकेगी।

अब तक राज्य और केंद्र सरकार के अलग-अलग विभागों के बीच आपसी तालमेल और प्रशासनिक मंजूरियों के अभाव में इन राजमार्गों के चौड़ीकरण और मरम्मत का काम सालों से अधर में लटका हुआ था। एनएच-10 और एनएच-55 जैसे महत्वपूर्ण मार्ग जो सिक्किम और दार्जिलिंग को जोड़ते हैं, वे अक्सर भूस्खलन और खराब रखरखाव से प्रभावित रहते थे। अब एनएचएआई सीधे तौर पर इन सड़कों का जिम्मा संभालेगी, जिससे फंड की कमी या फाइलों के अटके रहने जैसी प्रशासनिक देरी गुजरे जमाने की बात हो जाएगी।

इन रणनीतिक मार्गों के सुचारू होने से सिक्किम, दार्जिलिंग और पूरे उत्तर-पूर्व के पर्यटन और स्थानीय व्यापार को नई रफ्तार मिलेगी। सड़कों की हालत सुधरने से परिवहन की लागत कम होगी और समय की बचत होगी। इसके अलावा, बदलते वैश्विक और भू-राजनीतिक हालातों को देखते हुए इस 22 किलोमीटर चौड़ी पट्टी का केंद्र के मजबूत नियंत्रण में होना बेहद आवश्यक था। यह कदम भारत को किसी भी बाहरी नाकाबंदी या सामरिक चुनौती का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह सक्षम बनाता है।अब नियंत्रण हस्तांतरण से रक्षा रसद, व्यापार, पर्यटन और क्षेत्रीय संपर्क में सुधार के लिए आवश्यक राजमार्गों के लंबे समय से रुके हुए उन्नयन, सुदृढ़ीकरण और मरम्मत कार्यों में तेजी आ सकती है। केंद्र सरकार द्वारा इन महत्वपूर्ण रणनीतिक मार्गों की सीधी निगरानी से भारतीय सेना को काफी लाभ होगा। यह क्षेत्र कई महत्वपूर्ण सैन्य इकाइयों का घर है।

बताया जाता है कि भारत सरकार इस इलाके में अंडरग्राउंड रेल नेटवर्क बना रही है ताकि भविष्य में अगर किसी आपातकालीन स्थिति में सड़क मार्ग अवरुद्ध भी हो जाए, तब भी सेना की आवाजाही जारी रहे और नॉर्थ ईस्ट के राज्यों का भारत से संपर्क टूटे नहीं। पार्टी का दावा है कि नई सरकार बनने के बाद इस दिशा में तेजी से फैसले लिए जा रहे हैं। वहीं विपक्षी दलों का आरोप है कि इस मुद्दे को धार्मिक और वोटबैंक की राजनीति से जोड़कर पेश किया जा रहा है। उनका कहना है कि सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले सभी समुदायों के लोग देशभक्त हैं और सुरक्षा के सवाल को सांप्रदायिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।