पश्चिम एशिया संकट,तेल-गैस की बढ़ती कीमतें, उर्वरक दबाव और भारत की रणनीतिक तैयारी पर केंद्र सरकार की बड़ी तस्वीर
विनोद कुमार सिंह ‘तकियावाला’
विश्व की राजनीति जब युद्ध,तनाव और सामरिक प्रतिस्पर्धा के रास्ते समुद्रों तक पहुँच जाती है,तब उसका असर केवल सीमाओं और कूटनीतिक मंचों तक सीमित नहीं रहता।उसका कोप आम आदमी की रसोई, अन्नदाता किसान के खेत,उद्योगों जगत की मशीनों और देश की अर्थव्यवस्था तक महसूस होता है।आज पूरी दुनिया कुछ ऐसी ही स्थिति का सामना कर रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, समुद्री मार्गों पर मंडराते खतरे और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में जारी अस्थिरता ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को नई चिंता में डाल दिया है।ऐसे में पी आई बी ,भारत सरकार द्वारा आयोजित आज की अंतर-मंत्रालयी प्रेस कॉन्फ्रेंस इसी बढ़ते संकट और उससे निपटने की राष्ट्रीय तैयारी पर केंद्रित रही।पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय,उर्वरक मंत्रालय,नौवहन,वाणिज्य तथा वित्तीय एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि भारत की ऊर्जा आपूर्ति वर्तमान में सुरक्षित है,लेकिन वैश्विक परिस्थितियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव केवल तेल संकट नहीं,बल्कि समुद्री व्यापार,गैस आपूर्ति,उर्वरक उत्पादन, महँगाई और आर्थिक स्थिरता से जुड़ा व्यापक विषय बन चुका है।भारत आज विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।देश की ऊर्जा आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। यही कारण है कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश बन चुका है ,लेकिन विडंबना यह है कि अपनी कुल आवश्यकता का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल भारत आयात करता है।यही नहीं, घरेलू एलपीजी की लगभग 60 प्रतिशत जरूरत भी आयात के माध्यम से पूरी होती है।इन आयातों का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों से होकर भारत पहुँचता है।
इसलिए जैसे ही पश्चिम एशिया में संघर्ष या तनाव बढ़ता है,उसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगता है।
भारत ने समय रहते ऊर्जा सुरक्षा के लिए व्यापक रणनीतिक कदम उठाए हैं।देश के पास वर्तमान में लगभग 60 दिनों का रणनीतिक कच्चा तेल भंडार उपलब्ध है।इसके अतिरिक्त लगभग 45 दिनों का एलपीजी स्टॉक तथा पर्याप्त नेचुरल गैस भंडारण भी मौजूद है।सरकार ने स्पष्ट किया कि देश में पेट्रोल,डीज़ल,एलपीजी और सीएनजी की कोई कमी नहीं है तथा आपूर्ति श्रृंखला सामान्य रूप से कार्य कर रही है।हालाँकि सरकार की इस आश्वस्ति के बावजूद वैश्विक बाजार की अस्थिरता का असर भारत में दिखाई देने लगा है।अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत 113 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुँच गई है।
कुछ माह पहले तक यही कीमत 65 से 70 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी हुई थी।तेल की कीमतों में इस तेज वृद्धि ने सरकार और आम उपभोक्ता दोनों की चिंता बढ़ा दी है।कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का सबसे सीधा असर पेट्रोल और डीज़ल पर दिखाई देता है।हाल के दिनों में देश में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में लगभग 3 रुपये प्रति लीटर तक की वृद्धि दर्ज की गई।
दिल्ली में पेट्रोल लगभग 97 रुपये प्रति लीटर तथा डीज़ल 90 रुपये प्रति लीटर के आसपास पहुँच गया। यह वृद्धि केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहती।परिवहन लागत बढ़ने से खाद्यान्न,फल-सब्जियों, निर्माण सामग्री और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतें भी प्रभावित होती हैं।सबसे अधिक चिंता समुद्री मार्गों को लेकर व्यक्त की गई।पश्चिम एशिया का स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ विश्व ऊर्जा व्यापार की धुरी माना जाता है।दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और बड़े पैमाने पर एलएनजी का व्यापार इसी समुद्री मार्ग से होता है।भारत के लिए यह मार्ग और भी महत्वपूर्ण है,क्योंकि देश के तेल और गैस आयात का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है।वर्तमान तनाव को देखते हुए भारत ने अपने आयात स्रोतों और समुद्री मार्गों में विविधता लाने की रणनीति अपनाई है।आज भारत लगभग 40 देशों से कच्चा तेल आयात कर रहा है, जबकि वर्ष 2006-07 में यह संख्या केवल 27 थी।
रूस,अमेरिका,कनाडा,ब्राजील, अफ्रीकी देशों और अन्य वैकल्पिक बाजारों से आयात बढ़ाकर भारत ने पश्चिम एशिया पर निर्भरता कम करने का प्रयास किया है।सरकार के अनुसार अब लगभग 70 प्रतिशत तेल आयात वैकल्पिक मार्गों और नए स्रोतों से किया जा रहा है।यही कारण है कि संकट की स्थिति के बावजूद भारत में ऊर्जा आपूर्ति बाधित नहीं हुई।भारतीय नौसेना और समुद्री सुरक्षा एजेंसियाँ खाड़ी क्षेत्र में भारतीय जहाजों और ऊर्जा आपूर्ति मार्गों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।इस संकट का प्रभाव केवल पेट्रोलियम तक सीमित नहीं है।इसका बड़ा असर उर्वरक क्षेत्र पर भी दिखाई दे रहा है।भारत का उर्वरक उद्योग मुख्यतः नेचुरल गैस आधारित है।यूरिया उत्पादन में गैस प्रमुख कच्चा माल होती है। जैसे-जैसे अंतरराष्ट्रीय गैस कीमतें बढ़ती हैं,वैसे-वैसे उर्वरक उत्पादन की लागत भी बढ़ जाती है।खरीफ सीजन नजदीक होने के कारण यह चिंता और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।उर्वरक मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि किसानों को खाद की कमी नहीं होने दी जाएगी।इसके लिए सरकार ने उर्वरक संयंत्रों को प्राथमिकता के आधार पर गैस आपूर्ति सुनिश्चित की है।सरकारी आंकड़ों के अनुसार घरेलू पीएनजी और सीएनजी उपभोक्ताओं को 100 प्रतिशत गैस आपूर्ति दी जा रही है,जबकि उद्योगों को लगभग 80 प्रतिशत और उर्वरक क्षेत्र को लगभग 70 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराई जा रही है।यह व्यवस्था इसलिए लागू की गई है ताकि घरेलू रसोई,सार्वजनिक परिवहन और कृषि क्षेत्र पर संकट का न्यूनतम असर पड़े। सरकार ने यह भी संकेत दिए कि आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त उर्वरक आयात की व्यवस्था की जा सकती है । सरकार ने जमाखोरी और कृत्रिम संकट फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिए गए हैं कि एलपीजी, पेट्रोल और डीज़ल की उपलब्धता पर निगरानी रखी जाए तथा किसी भी प्रकार की कालाबाजारी या अफवाहों पर तुरंत कार्रवाई हो।
ऊर्जा संकट का असर केवल घरेलू अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रहता।इसका सीधा प्रभाव विदेशी मुद्रा भंडार और चालू खाता घाटे पर भी पड़ता है।भारत जितना अधिक महंगा तेल खरीदेगा,उतना अधिक विदेशी मुद्रा व्यय होगी। यही कारण है कि सरकार ने ऊर्जा आयात बिल को नियंत्रित करने के लिए कई समानांतर रणनीतियों पर कार्य शुरू किया है।भारत अब केवल आयात आधारित ऊर्जा मॉडल पर निर्भर नहीं रह सकता। देश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना होगा। इसी सोच के तहत एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम,ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, बायो फ्यूल,सौर ऊर्जा और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्राथमिकता दी जा रही है।
भारत ने एथेनॉल मिश्रण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। कुछ वर्ष पहले जहाँ पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण लगभग 1-2 प्रतिशत था, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 20 प्रतिशत के आसपास पहुँचने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।इससे न केवल तेल आयात पर निर्भरता घटेगी,बल्कि किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।इसी प्रकार सरकार ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के माध्यम से भारत को भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा शक्ति बनाने का प्रयास कर रही है।यदि भारत ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में सफल होता है तो भविष्य में वैश्विक तेल संकटों का असर काफी हद तक कम किया जा सकेगा।लेकिन वर्तमान संकट यह भी बताता है कि ऊर्जा केवल आर्थिक विषय नहीं है।यह राष्ट्रीय सुरक्षा,खाद्य सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता से जुड़ा विषय बन चुका है। यदि तेल महंगा होता है तो ट्रांसपोर्ट महंगा होता है।ट्रांसपोर्ट महंगा होता है तो खाद्यान्न महंगे होते हैं।गैस महँगी होती है तो उर्वरक महंगे होते हैं। उर्वरक महंगे होते हैं तो खेती की लागत बढ़ती है।जब खेती की लागत बढ़ती है,तब अंततः उसका असर देश की आम जनता पर पड़ता है।यही कारण है कि आज की यह प्रेस वार्त्ता केवल एक सरकारी ब्रीफिंग नहीं थी,बल्कि यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा,आर्थिक स्थिरता और भविष्य की रणनीति का व्यापक संकेत भी थी।केन्द्र सरकार ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि भारत स्थिति पर पूरी नजर बनाए हुए है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।फिर भी विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि पश्चिम एशिया का तनाव लंबा खिंचता है तो भारत की चुनौतियाँ और बढ़ सकती हैं।अर्न्तराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत यदि 120 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर स्थिर रहती है तो महंगाई, आयात बिल और वित्तीय घाटे पर गंभीर दबाव पड़ सकता है।हालॉकि भारत की स्थिति कई देशों की तुलना में बेहतर मानी जा रही है।मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार,तेजी से बढ़ती रिफाइनिंग क्षमता,विविध आयात स्रोत और रणनीतिक भंडारण ने भारत को अपेक्षाकृत सुरक्षित स्थिति में रखा है। लेकिन आने वाला समय भारत की ऊर्जा नीति और आत्मनिर्भरता की परीक्षा भी होगा।आज जब समुद्रों में तनाव है,तब भारत के सामने सबसे बड़ा प्रश्न केवल तेल खरीदने का नहीं, बल्कि भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने का है।यह समय केवल संकट प्रबंधन का नहीं, बल्कि दूरदर्शी ऊर्जा नीति बनाने का भी है।पश्चिम एशिया का यह संकट भारत को एक बड़ा संदेश दे रहा है – ऊर्जा आत्मनिर्भरता अब विकल्प नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आवश्यकता बन चुकी है।आने वाले वर्षों में भारत जितनी तेजी से वैकल्पिक ऊर्जा, घरेलू उत्पादन और रणनीतिक भंडारण की दिशा में आगे बढ़ेगा,उतना ही वह वैश्विक ऊर्जा राजनीति के झटकों से स्वयं को सुरक्षित रख पाएगा।आज की अंतर-मंत्रालयी प्रेस वार्त्ता में यह तो स्पष्ट कर दिया कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन साथ ही यह चेतावनी भी दे दी कि दुनिया की बदलती ऊर्जा राजनीति आने वाले समय में हर देश की आर्थिक और रणनीतिक दिशा तय करने वाली है।भारत इस चुनौती को अवसर में बदल पाता है या नहीं,यह तो अभी अतीत के गर्भ में है,जो आने वाले समय बताएगा।





