दुबई में छिपे ड्रग सिंडिकेट के कथित सरगना वीरेंद्र बसोया को भारत लाया गया, अमित शाह बोले- नशा तस्करों को दुनिया के किसी कोने में नहीं मिलेगी पनाह

Virendra Basoya, the alleged kingpin of a drug syndicate hiding in Dubai, has been brought to India; Amit Shah stated that drug smugglers will find no refuge anywhere in the world

नई दिल्ली, रुम्मान उल्ला खान : अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क के खिलाफ भारत की जांच एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने विदेश में छिपे वांछित आरोपी वीरेंद्र सिंह बसोया उर्फ वीरू उर्फ बसोया को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से भारत वापस लाने में सफलता हासिल की है। शुक्रवार सुबह दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचते ही NCB ने उसे अपनी हिरासत में ले लिया।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस कार्रवाई की जानकारी देते हुए इसे नशीले पदार्थों के खिलाफ केंद्र सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति में एक नया मील का पत्थर बताया। शाह ने कहा कि सरकार विदेशों में छिपे ड्रग तस्करों को लगातार तलाश रही है और उनके पूरे नेटवर्क को खत्म करने की दिशा में कठोर कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा कि तस्कर दुनिया में कहीं भी छिप जाएं, भारतीय कानून की पहुंच से बच नहीं सकते।

इंटरपोल रेड नोटिस के बाद UAE में गिरफ्तारी
गृह मंत्रालय के अनुसार वीरेंद्र सिंह बसोया दिल्ली के सरोजिनी नगर इलाके के पिलांजी का रहने वाला है। NCB के अनुरोध पर इंटरपोल ने उसके खिलाफ रेड नोटिस जारी किया था। इसी रेड नोटिस के आधार पर UAE में जून 2026 में उसे गिरफ्तार किया गया। इसके बाद भारतीय एजेंसियों और UAE अधिकारियों के बीच लगातार समन्वय के जरिए उसे भारत वापस लाने की प्रक्रिया पूरी की गई।

भारत पहुंचने के बाद उसे IGI एयरपोर्ट पर NCB ने हिरासत में ले लिया। एजेंसी अब उससे पूछताछ कर उसके कथित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क, भारत में मौजूद सहयोगियों और विदेशों में सक्रिय संपर्कों के बारे में जानकारी जुटा सकती है।

2024 में पुणे से शुरू हुई जांच
बसोया के खिलाफ कार्रवाई की जड़ें फरवरी 2024 में सामने आए पुणे के एक बड़े मेफेड्रोन मामले तक जाती हैं। पुणे सिटी पुलिस ने उस समय करीब 500 ग्राम मेफेड्रोन जब्त किया था। इसके बाद जांच को केवल स्थानीय स्तर पर सीमित न रखते हुए पूरे ड्रग नेटवर्क की पहचान और उसे खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ाया गया।

जांच और उसके बाद की कार्रवाई में पुणे से करीब 867 किलोग्राम तथा दिल्ली से करीब 970 किलोग्राम मेफेड्रोन बरामद किया गया। इस तरह इस मामले में कुल बरामदगी करीब 1,837 किलोग्राम मेफेड्रोन तक पहुंच गई। बाद में मामले की आगे की जांच NCB की मुंबई जोनल यूनिट को सौंप दी गई।

970 किलो मेफेड्रोन की बरामदगी ने खोली नेटवर्क की परतें
जांच एजेंसियों के अनुसार दिल्ली से बरामद करीब 970 किलो मेफेड्रोन एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय खेप का हिस्सा था। आरोप है कि इस खेप को भारत से विदेश भेजने की तैयारी की जा रही थी और इसके लिए कूरियर चैनलों का इस्तेमाल किया जाना था।

जांच में बसोया की भूमिका विदेश में बैठे एक कथित प्रमुख ऑपरेटर के तौर पर सामने आई। एजेंसियों के अनुसार वह विदेश से सिंडिकेट की गतिविधियों का समन्वय कर रहा था और भारत से दूसरे देशों में मेफेड्रोन की खेप भेजने में कथित रूप से मदद करता था।

NCB ने इस मामले की जांच में ‘टॉप-टू-बॉटम’ और ‘बॉटम-टू-टॉप’ दोनों दृष्टिकोण अपनाया। यानी एजेंसी ने केवल ड्रग की बरामदगी तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी, बल्कि यह पता लगाने की कोशिश की कि ड्रग तैयार कौन कर रहा था, उसे कौन स्टोर और ट्रांसपोर्ट कर रहा था, किसके निर्देश पर भेजा जा रहा था और विदेशों में इसका नेटवर्क कौन चला रहा था।

13,000 करोड़ रुपये के ड्रग सिंडिकेट से भी जुड़ा नाम
बसोया का नाम दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल द्वारा अक्टूबर 2024 में उजागर किए गए एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट की जांच में भी सामने आया। इस मामले को कई रिपोर्टों में करीब 13,000 करोड़ रुपये के ड्रग सिंडिकेट से जोड़ा गया है।

दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के दौरान दिल्ली, हापुड़ और गाजियाबाद में अलग-अलग ठिकानों के अलावा गुजरात के अंकलेश्वर स्थित एक फैक्ट्री में भी छापेमारी की गई थी। जांच के दौरान कोकीन, मेफेड्रोन और हाइड्रोपोनिक वीड समेत 1,300 किलोग्राम से अधिक नशीले पदार्थ बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई थी।

NDTV की रिपोर्ट के अनुसार इस नेटवर्क की जांच में कई कंपनियों और कथित सप्लाई चैनलों का नाम सामने आया। जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया कि नशीले पदार्थों को कभी रासायनिक खेप तो कभी अन्य सामान के बीच छिपाकर भेजा जाता था। नेटवर्क के तार दिल्ली-NCR के अलावा पंजाब, मुंबई, हैदराबाद और गोवा तक बताए गए हैं। विदेशी संपर्कों में यूके, मलेशिया, पाकिस्तान, थाईलैंड और दुबई का भी उल्लेख जांच रिपोर्टों में किया गया है।

विदेश से चल रहा था कथित नेटवर्क
जांच एजेंसियों का आरोप है कि भारत में कार्रवाई शुरू होने के बाद भी बसोया विदेश में रहकर नेटवर्क के संचालन में भूमिका निभा रहा था। यही वजह है कि उसके खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस जारी कराया गया।

NCB की ‘ऑपरेशन ग्लोबल-हंट’ पहल का उद्देश्य विदेशों में छिपे प्रमुख ड्रग तस्करों और भगोड़ों को तलाशना तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए उन्हें भारत वापस लाना है। इस अभियान में इंटरपोल रेड नोटिस के साथ-साथ विदेशी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय को महत्वपूर्ण भूमिका दी जा रही है।

अमित शाह ने NCB की कार्रवाई को बताया बड़ी उपलब्धि
वीरेंद्र बसोया को UAE से भारत लाए जाने के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने NCB और भारतीय एजेंसियों की कार्रवाई की सराहना की। उन्होंने कहा कि सरकार विदेशों में छिपे नशा तस्करों का लगातार पीछा कर रही है और उनके पूरे इकोसिस्टम को खत्म करने के लिए कठोर कार्रवाई की जा रही है।

शाह के अनुसार बसोया को भारत वापस लाना नशीले पदार्थों के खिलाफ सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति में एक नया मील का पत्थर है। उन्होंने जांच एजेंसियों की ‘टॉप-टू-बॉटम’ और ‘बॉटम-टू-टॉप’ रणनीति का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे यह संदेश गया है कि ड्रग तस्कर दुनिया के किसी भी हिस्से में छिपें, वे भारतीय कानून की पहुंच से बाहर नहीं हैं।

अब पूछताछ से खुल सकते हैं कई राज
वीरेंद्र सिंह बसोया की भारत वापसी के बाद जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसके कथित नेटवर्क की पूरी संरचना को सामने लाने की होगी। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर सकती हैं कि भारत में ड्रग निर्माण, भंडारण, परिवहन और वितरण में कौन-कौन लोग शामिल थे तथा विदेशों में बैठे ऑपरेटरों के साथ उनका किस तरह संपर्क था।

इसके अलावा 970 किलो मेफेड्रोन की खेप, पुणे और दिल्ली से हुई कुल करीब 1,837 किलो मेफेड्रोन की बरामदगी और दिल्ली पुलिस के अलग अंतरराष्ट्रीय ड्रग मामले में सामने आए कथित संबंधों को जोड़कर जांच एजेंसियां नेटवर्क की व्यापक तस्वीर तैयार कर रही हैं।

बसोया की पूछताछ से विदेश में सक्रिय कथित ड्रग नेटवर्क, उसके वित्तीय लेन-देन, भारत में मौजूद सहयोगियों और अन्य भगोड़ों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद की जा रही है। हालांकि इन सभी आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में होने वाली न्यायिक प्रक्रिया के दौरान ही होगी।

इस कार्रवाई को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब भारतीय एजेंसियां अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क के खिलाफ केवल देश के भीतर कार्रवाई करने के बजाय विदेशों में छिपे कथित सरगनाओं तक पहुंचने पर भी जोर दे रही हैं। UAE से बसोया की वापसी इसी रणनीति का एक प्रमुख उदाहरण है।