अजय कुमार बियानी
किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति उसकी युवा पीढ़ी होती है। वही भविष्य का निर्माण करती है, नई दिशा देती है और समय आने पर इतिहास भी रचती है। दुर्भाग्य यह है कि आज समाज का एक छोटा-सा उग्र और शोरगुल करने वाला समूह पूरे युवा वर्ग का चेहरा बनाकर प्रस्तुत किया जाने लगा है। कुछ लोग सार्वजनिक स्थलों पर अनुशासनहीनता करें, अभद्र भाषा का प्रयोग करें, राष्ट्रीय संस्थाओं का अपमान करें या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाएँ, तो उसे पूरी नई पीढ़ी का प्रतिनिधि मान लेना न केवल अन्याय है, बल्कि करोड़ों परिश्रमी युवाओं का अपमान भी है।
भारत की वास्तविक युवा शक्ति उन हाथों में है जो प्रयोगशालाओं में शोध कर रहे हैं, खेल मैदानों में पसीना बहा रहे हैं, गणित के कठिन प्रश्न हल कर रहे हैं, कृत्रिम बुद्धि, अंतरिक्ष विज्ञान, रक्षा प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहे हैं। वे सामाजिक माध्यमों पर शोर नहीं मचाते, बल्कि अपनी उपलब्धियों से देश का नाम विश्व मंच पर ऊँचा करते हैं।
हाल के अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अनेक स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीतकर तिरंगे का गौरव बढ़ाया। जब विजेता मंच पर राष्ट्रध्वज ऊपर उठता है और राष्ट्रगान की धुन बजती है, तब उन खिलाड़ियों की आँखों में छलकते आँसू किसी भाषण से कहीं अधिक प्रभावशाली संदेश देते हैं। वे बताते हैं कि राष्ट्रभक्ति नारे लगाने से नहीं, कर्म से सिद्ध होती है।
अंतरराष्ट्रीय गणित प्रतियोगिता में भारतीय विद्यार्थियों ने स्वर्ण और रजत पदक जीतकर यह सिद्ध किया कि भारतीय प्रतिभा केवल परीक्षा कक्ष तक सीमित नहीं है। यह वही पीढ़ी है जो कठिन समीकरणों का समाधान खोजती है, नई खोजों में विश्वास रखती है और ज्ञान को अपनी सबसे बड़ी पूँजी मानती है।
शतरंज के क्षेत्र में भारतीय युवाओं ने विश्व को चौंकाया है। कम आयु में विश्व स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले खिलाड़ियों ने यह सिद्ध किया है कि धैर्य, अनुशासन और निरंतर अभ्यास किसी भी सफलता की वास्तविक कुंजी हैं। इसी प्रकार भाला फेंक, कुश्ती, बैडमिंटन, निशानेबाजी और अनेक खेलों में भारतीय युवा विश्व के सामने नई पहचान बना रहे हैं।
खेल ही क्यों, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भी यही पीढ़ी भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जा रही है। कोई उपग्रह निर्माण में लगा है, कोई नई तकनीक विकसित कर रहा है, कोई कृत्रिम बुद्धि के क्षेत्र में शोध कर रहा है, तो कोई अर्धचालक निर्माण, अंतरिक्ष उद्योग और रक्षा अनुसंधान में अपना योगदान दे रहा है। यही वे युवा हैं जो भारत को आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाने की आधारशिला रख रहे हैं।
समस्या यह है कि समाज और माध्यमों का ध्यान प्रायः उन्हीं घटनाओं पर अधिक जाता है जहाँ शोर अधिक होता है। कैमरे वहीं पहुँचते हैं जहाँ विवाद हो, उत्तेजना हो और सनसनी हो। परिणामस्वरूप करोड़ों परिश्रमी, अनुशासित और राष्ट्रनिर्माण में लगे युवाओं की उपलब्धियाँ अपेक्षित स्थान नहीं पा पातीं। इससे यह भ्रम उत्पन्न होता है कि नई पीढ़ी केवल विरोध, आक्रोश और असंतोष की प्रतीक है, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल भिन्न है।
यह भी समझना होगा कि किसी भी समाज में कुछ असामाजिक तत्व अवश्य होते हैं। उन्हें पूरे युवा वर्ग का प्रतिनिधि मान लेना वैसा ही है जैसे कुछ भ्रष्ट लोगों के कारण पूरे प्रशासन को दोषी ठहरा देना। जो लोग अभद्रता, हिंसा, अराजकता और सार्वजनिक संपत्ति के विनाश को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता समझते हैं, वे किसी पीढ़ी के प्रतिनिधि नहीं हो सकते। उन्हें उसी रूप में देखा जाना चाहिए जैसे किसी भी कानून तोड़ने वाले व्यक्ति को देखा जाता है।
भारत की नई पीढ़ी महत्वाकांक्षी है, तकनीकी रूप से दक्ष है, विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का आत्मविश्वास रखती है और अपनी प्रतिभा के बल पर नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। यह पीढ़ी अवसर चाहती है, संघर्ष से नहीं डरती और अपनी पहचान परिश्रम से बनाना चाहती है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि समाज उन युवाओं को अधिक देखे जो मौन रहकर सृजन कर रहे हैं। विद्यालयों, विश्वविद्यालयों, खेल मैदानों, अनुसंधान संस्थानों और नवाचार केंद्रों में बैठी यही पीढ़ी भारत का वास्तविक भविष्य है। इनकी उपलब्धियों को जितना अधिक सम्मान मिलेगा, उतनी ही अधिक प्रेरणा आने वाली पीढ़ियों को मिलेगी।
भारत के सामने युवा समस्या नहीं है। चुनौती केवल दृष्टि की है। यदि हमारा ध्यान केवल नकारात्मक घटनाओं पर रहेगा तो हमें अंधकार ही दिखाई देगा। यदि हम परिश्रम, प्रतिभा और उपलब्धियों को पहचानेंगे तो स्पष्ट होगा कि भारत की नई पीढ़ी शोर नहीं, श्रम की भाषा बोलती है; विरोध नहीं, विकास की दिशा में आगे बढ़ रही है।
राष्ट्र का भविष्य उन हाथों में सुरक्षित है जो पदक जीतते हैं, नए आविष्कार करते हैं, कठिन प्रश्नों का समाधान खोजते हैं और तिरंगे को विश्व के सर्वोच्च मंच तक पहुँचाते हैं। यही भारत की वास्तविक युवा शक्ति है, यही आने वाले भारत का स्वर्णिम चेहरा है।





