“राष्ट्रीय कृषि जगत के प्रतिष्ठित आयोजन में बस्तर के डॉ. राजाराम त्रिपाठी को स्थान, छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण
रविवार दिल्ली नेटवर्क
- कषि तथा खेती से जुड़े उद्योग, विपणन, परिवहन,उद्यानिकी, वानिकी और नवाचार सहित विभिन्न क्षेत्रों के 100- सफल नेतृत्वकर्ता एक मंच पर आएंगे।
- एग्रीकल्चर टुडे समूह की इस राष्ट्रीय पहल में बस्तर, छत्तीसगढ़ के डॉ. राजाराम त्रिपाठी को भी शामिल किया गया है।
- आयोजन के प्रथम पोस्टर में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, नाबार्ड अध्यक्ष श्री शाजी के.वी. और अन्य पदो विभूतियों के साथ डॉ. त्रिपाठी को स्थान दिया गया है।
- ‘वर्ल्ड एग्रीकल्चर फोरम’ के कार्यकारी निदेशक डॉ. एम.जे. खान और एग्रोस्टार के सीईओ श्री शार्दुल सेठ भी इस पहल से जुड़े प्रमुख नामों में शामिल हैं।
- डॉ राजाराम त्रिपाठी के कृषि नवाचारों, जैविक खेती और उनके किसान सशक्तीकरण के प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने के संदर्भ में यह सहभागिता महत्वपूर्ण
दिल्ली : देश में खेती और खेती से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों के सक्षम, सफल एवं नवाचारी नेतृत्वकर्ताओं को एक मंच पर लाकर सम्मानित करने की दिशा में एग्रीकल्चर टुडे समूह तथा कृषि क्षेत्र से जुड़े अग्रणी शासकीय तथा निजी क्षेत्र संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में AT-100 का गौरवपूर्ण राष्ट्रीय आयोजन किया जा रहा है। इस विशिष्ट पहल में कृषि उत्पादन, कृषि आधारित उद्योग, विपणन, परिवहन, उद्यानिकी तथा खेती से संबंधित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 100 नेतृत्वकर्ताओं और नवाचारकर्ताओं को एक साथ लाने का प्रयास किया जा रहा है। इस राष्ट्रीय आयोजन के संदर्भ में आयोजकों द्वारा जारी किए गए प्रथम आधिकारिक पोस्टर में छत्तीसगढ़ के बस्तर के प्रगतिशील किसान एवं अखिल भारतीय किसान महासंघ (एआईएफए) के अध्यक्ष डॉ. राजाराम त्रिपाठी को भी शामिल किया गया है। देश के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय व्यक्तित्वों के साथ डॉ. त्रिपाठी को इस आयोजन से जोड़ना बस्तर और समूचे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है।
इस प्रथम पोस्टर में भारत सरकार के केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के अध्यक्ष शाजी के.वी., ‘वर्ल्ड एग्रीकल्चर फोरम’ के कार्यकारी निदेशक डॉ. एम.जे. खान तथा एग्रोस्टार के सीईओ शार्दुल सेठ के साथ बस्तर छत्तीसगढ़ के डॉ. राजाराम त्रिपाठी को स्थान दिया गया है।
डॉ. राजाराम त्रिपाठी लंबे समय से जैविक खेती, पर्यावरण संरक्षण, कृषि नवाचार तथा आदिवासी समुदायों के आर्थिक सशक्तीकरण के क्षेत्र में सक्रिय हैं। बस्तर में टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने, किसानों की आय और आजीविका को मजबूत करने तथा आदिवासी किसानों और महिलाओं को कृषि आधारित आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के उनके प्रयास उल्लेखनीय रहे हैं। वे कृषि को केवल उत्पादन तक सीमित न मानकर पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसान स्वावलंबन से जोड़ने की आवश्यकता पर निरंतर जोर देते रहे हैं।
एग्रीकल्चर टुडे समूह की यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि खेती की पूरी व्यवस्था केवल खेत और किसान तक सीमित नहीं है। बीज, कृषि तकनीक, प्रसंस्करण, उद्योग, विपणन, भंडारण, परिवहन और उद्यानिकी जैसे अनेक क्षेत्र मिलकर कृषि अर्थव्यवस्था को गति देते हैं। इन सभी क्षेत्रों के सफल नेतृत्वकर्ताओं और नवाचारकर्ताओं को एक मंच पर लाने से उनके अनुभव, उपलब्धियों और कृषि के भविष्य के लिए किए जा रहे प्रयासों को व्यापक पहचान मिलने का अवसर प्राप्त होगा। बस्तर जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र से जुड़े डॉ. राजाराम त्रिपाठी को इस राष्ट्रीय आयोजन के प्रारंभिक प्रचार अभियान में प्रमुख कृषि नेतृत्वकर्ताओं के साथ स्थान मिलना इस बात का महत्वपूर्ण संकेत है कि देश की कृषि व्यवस्था में जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले लोगों और क्षेत्रीय नवाचारों का भी विशेष महत्व है। यह सहभागिता बस्तर की कृषि संभावनाओं, जैविक खेती की परंपरा और आदिवासी समुदायों के सतत विकास के प्रयासों को राष्ट्रीय विमर्श से जोड़ने की दृष्टि से उल्लेखनीय है।
यह आयोजन कृषि और उससे जुड़े उद्योगों के विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित करने के साथ-साथ भारतीय कृषि को अधिक नवाचारी, आत्मनिर्भर, पर्यावरण-अनुकूल और किसान-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। इस खबर से अखिल भारतीय किसान महासंघ के सहयोगी किसान संगठनों तथा देश के किसानों एवं मां दंतेश्वरी हर्बल समूह की सदस्यों में विशेष रूप से हर्ष व्याप्त है। इस खबर के संदर्भ में डॉक्टर राजाराम त्रिपाठी ने कहा कि देश की खेती किसानी और किसान वर्तमान में अब तक के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं। देश के इन 100 सफल नेतृत्वकर्ताओं को इस स्थिति को बेहतर बनाने के महती लक्ष्य से सीधे-सीधे जोड़ा जाएगा। हमें अगर 140 करोड़ की जनसंख्या वाले इस देश को बचाना है, हमारी खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करना है तो खेती किसानी और किसान की स्थिति को सुधारना ही होगा इसके अलावा हमारे पास और कोई रास्ता बचा भी नहीं है।





