तीन करोड़ रिश्वत: IPS अधिकारी दीपक गहलावत गिरफ़्तार

₹3 Crore Bribe: IPS Officer Deepak Gehlawat Arrested

इंद्र वशिष्ठ

सीबीआई ने नकली दवाओं का धंधा करने वाले‌ अपराधियों से तीन करोड़ रुपये रिश्वत मांगने वाले हरियाणा कैडर के (2012 बैच) आईपीएस दीपक गहलावत को गिरफ़्तार किया है, दीपक अभी दिल्ली में ब्यूरो ऑफ़ सिविल एविएशन सिक्योरिटी ( बीसीएएस) में रीजनल डायरेक्टर के पद पर तैनात है।

सीबीआई ने 8 जून 2026 को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच में तैनात इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह, नकली दवाओं का धंधा करने वाले एन राजा और उसके सहयोगी राजकुमार के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया था। जांच के दौरान पता चला कि आईपीएस अधिकारी दीपक गहलावत ने एन राजा से 3 करोड़ रिश्वत की मांग की थी, जिसमें डेढ़ करोड़ रुपये एडवांस मांगे थे। दीपक ने आश्वासन दिया कि वह अपने निजी प्रभाव/ संपर्क/ सांठगांठ का इस्तेमाल करके पुडुचेरी में नकली दवाओं की बिक्री से जुड़े सीबीआई द्वारा जांच किए जा रहे मामलों में आरोपी एन राजा को राहत दिला देगा हैं। सीबीआई ने 8 जून को पुख्ता सूचना के आधार जाल बिछाया और दिल्ली पुलिस इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ लिया। इसके अलावा 6 अन्य व्यक्तियों को गिरफ़्तार किया गया था। इस दौरान लगभग 25 लाख रुपये की ट्रैप राशि और 90 लाख रुपये बरामद किए गए थे।

इस मामले में सीबीआई की भूमिका पर सवालिया निशान लग गया था। इस मामले में आईपीएस अधिकारी शामिल था। इसलिए सीबीआई ने इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह की गिरफ्तारी की आधिकारिक तौर पर जानकारी मीडिया को नहीं दी। सीबीआई ने एफआईआर में आईपीएस दीपक गहलावत का नाम भी दर्ज नहीं किया।

सीबीआई की एफआईआर में इंस्पेक्टर प्रदीप, सीबीआई के मामले के आरोपी एन राजा, उसके सहयोगी राजकुमार का तो पूरा ब्यौरा दिया गया था।

सीबीआई के अनुसार विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी से पता चला कि दिल्ली पुलिस, क्राइम ब्रांच का इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह, आरोपी एन. राजा उर्फ ​​वल्लियप्पन राजशेखर, एन. राजा का सहयोगी राजकुमार उर्फ ​​मदनराज, अन्य अज्ञात सरकारी अफसरों और निजी व्यक्तियों के साथ आपराधिक साजिश रचकर सीबीआई जांच अधिकारियों और जांच से जुड़े अन्य सरकारी अफसरों पर प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए सीबीआई मामलों में अनुचित राहत दिलाने के लिए अवैध रिश्वत के भुगतान में सहयोग कर रहे हैं।

14.05.2026 को एन. राजा उर्फ ​​वल्लियप्पन उर्फ ​​ राजशेखर और राजकुमार मदनराज ने नई दिल्ली के आईजीआई हवाई अड्डे के पास एयरोसिटी में इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह से मुलाकात की। इसके बाद, प्रदीप सिंह उन दोनों को पास ही स्थित एक अज्ञात वरिष्ठ सरकारी अफसर के कार्यालय में ले गया। मुलाकात के दौरान, उक्त वरिष्ठ सरकारी ने एन. राजा उर्फ ​​वल्लियप्पन उर्फ ​ राजशेखर को सीबीआई के मामले में बचाने का आश्वासन दिया। उसने तीन करोड़ रुपये रिश्वत मांगी। जिसमें डेढ़ करोड़ रुपये एडवांस मांगे। लेकिन इसके बावजूद सीबीआई ने एफआईआर में वरिष्ठ अफसर का नाम न लिख कर अज्ञात वरिष्ठ सरकारी अफसर दर्ज किया।

सीबीआई के पास जब इतनी पुख्ता जानकारी थी कि हवाला से रकम मंगा कर आठ जून को दिल्ली में इंस्पेक्टर प्रदीप को दी जाएगी। इस सूचना के आधार पर ही सीबीआई ने इंस्पेक्टर प्रदीप और एन राजा के साथी राजकुमार को गिरफ्तार भी कर लिया।

ऐसे में क्या देश की तेजतर्रार मानी जाने वाली सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने से पहले इंस्पेक्टर के आका आईपीएस का नाम मालूम नहीं होगा। इस बात पर कोई भी विश्वास नहीं करेगा। इससे तो यह लगता है कि सीबीआई ने जानबूझकर एफआईआर में उसका नाम नहीं लिखा।