गोलरक्षक पीआर श्रीजेश से बतौर गोलरक्षक हमने बहुत कुछ सीखा
सत्येन्द्र पाल सिंह
नई दिल्ली : कर्नाटक के गोलरक्षक एचएस मोहित का मात्र 24 बरस की उम्र में भारत के लिए पहला हॉकी विश्व कप में खेलने का सपना पूरा होने जा रहा है। एचएस मोहित अनुभवी सूरज करकेरा के साथ 15से 30 अगस्त तक एफआईएच बेल्जियम और नीदरलैंड 2026 हॉकी विश्व कप के लिए भारतीय पुरुष हॉकी टीम में चुने गए दो गोलरक्षकों में से एक हैं। मोहित भले ही सूरज जितने अनुभवी गोलरक्षक नहीं हैं लेकिन उन्होंने बतौर के रूप में अपनी मुस्तैदी से हर किसी को प्रभावित किया है। मोहित ने अपने जीवट और बहादुरी से राष्ट्रीय हॉकी चयनकर्ताओं को
प्रभावित कर भारतीय टीम में चुनने को मजबूर किया। मोहित भारत के लिए हॉकी विश्व कप में खेलने के लिए मिले मौके को भुनाने को तैयार हैं। भारत ने अब तक केवल 1975 में अशोक कुमार सिंह के निर्णायक गोल से पाकिस्तान को 1975 में हॉकी विश्व कप फाइनल में 2-1 से हरा कर मात्र एक बार खिताब जीता है।
भारत ने एफआईएच प्रो हॉकी लीग 2025-26 में अपना अभियान नीदरलैंड ,जर्मनी और इंग्लैंड पर यादगार जीत के साथ खत्म किया और इससे वह एफआईएच हॉकी विश्व कप में बुलंद हौसले से उतरेगा। भारतीय टीम की हॉकी विश्व की तैयारियों की बाबत मोहित ने कहा, ‘नीदरलैंड और जर्मनी को एफआईएच प्रो लीग में हराने से हमें बहुत आत्मविश्वास मिला है।
मुझे लगता है कि विश्व कप में हम उम्मीद के मुताबिक तैयार हैं। निजी तौर पर मेरा लक्ष्य भारत के लिए मैदान पर उतर पूरी शिद्दत से अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है। मेरी सोच हमेशा ही भारत के लिए बड़े टूर्नामेंट में बतौर गोलरक्षक नुमाइंदगी करने की थी। जब मैं भारत के लिए जूनियर पुरुष हॉकी विश्व कप में खेला था तब हम पदक नहीं जीत पाए और चौथे स्थान पर है। तभी से मेरा सपना भारत के लिए कुछ बड़ा करने का था। मुझे इससे पहले इससे बड़ा मौका नहीं मिला है। मैं भारत को एक बार फिर हॉकी विश्व चैंपियन बनाने की कोशिश करूंगा।’
मोहित संयोग से ही गोलरक्षक बन गए। मोहित की बतौर हॉकी खिलाड़ी स्कूल में यात्रा संयोग से शुरू हुई। मोहित चूंकि खासे लंबे कद के थे और उनकी स्कूल टीम में कोई गोलरक्षक उपलब्ध नहीं था तो तो उनके कोच का मानना था कि अपनी लंबे के चलते वह गोलस्तंभ की बहुत मुस्तैदी से हिफाजत कर सकते हैं तो उन्हें टीम का गोलरक्षक बना दिया गया। संयोग से मोहित को बतौर गोलरक्षक मिला मौका जल्द ही शानदार करियर में बदल गया। तब से सीनियर भारतीय हॉकी टीम में बतौर गोलरक्षक चुने जाने से पहले मोहित ने भारत की जूनियर पुरुष हॉकी विश्व कप में नुमाइंदगी की। मोहित ने भारत को दो ओलंपिक में कांसा जिताने वाले अगली पीढ़ी को प्रेरित करने वाले गोलरक्षक पीआर श्रीजेश से मिली सीख को भी माना। मोहित ने कहा, ‘हमने बतौर गोलरक्षक पीआर श्रीजेश से बहुत सीखा। ऐसा नहीं है कि चूंकि श्रीजेश ने भारत के लिए बेहतरीन प्रदर्शन किया और हमें पर उनकी जगह भरने का दबाव है। हम मैदान पर विश्व कप में अपनी पूरी ताकत झोंक देंगे और देखेंगे कि आगे क्या होता है।‘





