- हम सूझबूझ से और बेहतर बल्लेबाजी कर सकते थे
- वाशिंगटन सुंदर दिल्ली में टीम के साथ जुड़ जाएंगे
- जानता हूं कि वानखेड़े की पिच पर कैसे बल्लेबाजी करनी है
सत्येन्द्र पाल सिंह
मुंबई : कप्तान सूर्य कुमार यादव की एक छोर से विकेटों के पतझड़ के बीच अविजित 84 रन की तूफानी पारी की बदौलत भारत ने अमेरिका को यहां शनिवार रात वानखेड़े स्टेडियम की दोहरे उछाल वाली पिच पर आईसीसी टी 20क्रिकेट टूर्नामेंट में अपना अभियान 29 रन से जीत के साथ शुरू किया। सूर्य कुमार यादव ने भारत की जीत के बाद मुस्कुराते हुए कहा, ‘मैं ही बस आपको बता सकता हूं कि कितने दबाव में था लेकिन मुझे खुद पर भरोसा था। मैं जानता था कि यदि मैं आखिर तक टिक कर बल्लेबाजी करता हूं तो हालात बदल सकता हूं। वानखेड़े की यह पिच कुछ अलग थी । हम यह जानते थे कि क्योंकि बाहर सूरज बहुत नहीं चमका था। पिच क्यूरेटर ने पूरी कोशिश की, लेकिन सूरज की रोशनी इतनी नहीं कि पिच पर पानी दे इसे रोल किया जा सकता। बावजूद इसके हमें कहीं और बेहतर बल्लेबाजी की जरूरत है। अमेरिका पर संघर्षपूर्ण जीत के बावजूद हमें बहुत कुछ सीखने को मिला। हम सूझबूझ से और बेहतर बल्लेबाजी कर सकते थे। एक दो भागीदारियां हमें आसानी से 160 रन या इससे पार तक आसानी से पहुंचा सकती थी। अभिषेक भी पूरी तरह स्वस्थ नहीं थे। बुमराह को भी बुखार था और इसलिए वह नहीं खेले। अब वाशिंगटन सुंदर दिल्ली में टीम के साथ जुड़ जाएंगे। मैं जानता हूं कि किसी दिन ऐसा होगा कि आपकी बल्लेबाजी नहीं चलेगी। मैंने अपनी टीम की पारी को संभालने की पूरी कोशिश की। मेरा बराबर यह मानना है कि एक बल्लेबाज को आखिर तक बल्लेबाजी करने की जरूरत है। मेरा मानना यह ऐसी पिच नहीं थी जिस पर 180-190 रन बनाए जा सकते थे बल्कि यह कुल मिलाकर इस पर 140 रन के करीब ही रन बनाए जा सकते थे। मैंने यहां वानखेड़े की पिच पर बहुत क्रिकेट खेली है और मैं जानता हूं ऐसी पिच पर कैसी बल्लेबाजी करनी है। छह विकेट मात्र 77 रन पर गंवाने के बाद मैंने आखिर तक बल्लेबाजी की। आपको यह समझना होगा कि किसी को ऐसे में आखिर तक बल्लेबाजी करने की थी। मैंने अपने और अच्छे शॉट खेलने की कोशिश की।
अपनी बल्लेबाजी की शैली को बदलने की जरूरत नहीं : अक्षर
भारत के उपकप्तान अक्षर पटेल ने कहा, ‘मुंबई में वानखेड़े की पिच अमूमन सपाट होती है लेकिन दो ओवर के बाद ही से इसके व्यवहार ने हमें हैरान किया। हमारी बल्लेबाजी वानखेड़े की पिच पर जिस तरह लड़खड़ाई और एक तरह से अच्छा अनुभव रहा। अच्आ यह पहले ही मैच में हो गया इससे हमें आगे के मैचों के लिए बहुत कुछ सीखने को मिला। जब मैं बल्लेबाजी के लए उतरा तो तब हमने यही सोचा कि इस पर 135-140 रन बना लेते हैं तो अच्छा रहेगा लेकिन फिर हमने अमेरिका के तेज गेंदबाज सौरभ नेत्रवलकर के एक ओवर में 21 रन बनाए और सूर्या ने इसके बाद और रन बनाए। क्रिकेट में पिच के मिजाज को समझना सबसे अहम होता है। अमेरिका के खिलाफ शुरू में बल्लेबाजी के लड़खड़ाने से हम खुद को अगले मैचों में बेहतर ढंग से तैयार हो सकेंगे। इशान जब बल्लेबाजी कर रहे तो तब उन्होंने कहा कि इस पिच पर दोहरा उछाल है और तब हमने महसूस किया था कि इस पर 170 रन कर स्कोर अच्छा होगा हम लगभग इसके करीब पहुंचे। हमें विकेट गिरने के बावजूद अपने शुरू से दे दनादन की अपनी बल्लेबाजी शैली को बदलने की जरूरत नहीं। हमें बस हमें खुद को बेहतर ढंग से हालात के मुताबिक ढालने की जरूरत है। कुछ ओवरों में जरा संभल कर हमें बस हर गेंद को उड़ाने से बचने की जरूरत थी।जब मैं कप्तान सूर्य के साथ बल्लेबाजी कर रहा था और हम दोनों के बीच उपयोगी भागीदारी हुई तब जब चीफ कोच गौतम गंभीर मैदान पर आए तो बस यही चर्चा हुई कि पारी को आखिरी ओवर तक ले जाने की जरूरत और यह देखने के हममें से कौन किस गेंदबाज का सामना करना है।‘
अल्लाह ने 24 घंटे के भीतर मेरी तकदीर बदल दी : सिराज
सिराज ने अचानक से टी 20 विश्व कप के लिए भारतीय टीम में शामिल किए जाने पर यहां कहा, ‘ अल्लाह ने 24 घंटे के भीतर मेरी तकदीर ही बदल दी। मैं अपने परिवार के साथ वक्त बिता रहा था। तभी भारत के स्ट्रेंग्थ और कंडीशनिंग कोच ली रॉ ने मुझे मेसेज कर पूछा कि मेंक्या कर रहा हूं। इस पर मैंने उन्हें जवाब दिया कि आप मुझे अभी मेसेज नहीं करें। मैं दो चार दिवसीय मैच खेल आराम कर रहा हूं। मुझे आराम की जरूरत है।‘ तकदीर का खेल देखें कि तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह तेज बुखार के चलते अमेरिका के खिलाफ यहां मुंबई में भारत के अमेरिका के खिलाफ टी 20 विश्व कप मैच में नहीं खेले और हर्षित राणा के घुटने की चोट के चलते बाहर होने के बाद भारत के पास बतौर खालिस गेंदबाज चुनने को अर्शदीप सिंह के साथ सिराज ही उपलब्ध थे और उन्हें एकादश में जगह मिल गई।
सिराज ने कहा, ‘मैं चूंकि रणजी ट्रॉफी मैच खेल यहां भारत के लिए टी 20 विश्व कप में खेलने उतरा था तो मैं अपनी उसी लेंग्थ पर यहां भी काबिज रहा। जब हम इस मैच में पहले बल्लेबाजी कर रहे थो मैंने देखा था कि नई गेंद पर आसानी से बल्ले पर नहीं आ रही थी।ऐसे में विकेट टू विकेट गेंदबाजी करने की योजना कारगर रही। मैं खुश हूं कि अपनी योजना को अमली जामा पहना मैं अमेरिका के खिलाफ विकेट चटका पाया। आपको जेहनी तौर पर टी 20 विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट को खेलने के लिए तैयार रहने की जरूरत होती है । भारत के लिए खेलना शुरू किए मुझे अब दस बरस होने को हैं। भारतीय टीम के साथ इतने लंबे समय रहने के साथ मैं जानता हूं कि मुझे टी 20अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के लिए किस तरह तैयार रहना है और इसके लिए किस तरह की जेहनी सोच होनी चाहिए। मैंने सोने से पहले खुद से बस यही कहा कि मुझे अपने लिए कारगर रही रणनीति पर काबिज रहने की जरूरत है





