सुरेन्द्र अग्निहोत्री
आज का परिवेश दिनों-दिन प्रतिस्पर्धी होता जा रहा है ऐसे में युवाओं को शिक्षा व करियर में आने वाली चुनौतियों से निपटने में आधुनिक शिक्षा महत्वपूर्ण भूमिका उच्च क्वालिटी के गुणवत्ता युक्त शिक्षा से प्रदान हो सके। उत्तर प्रदेश के शैक्षिक संस्थान उच्च गुणवत्ता की शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान कर युवाओं को एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी युवा बनाना है जो जीवन में उत्तरोत्तर प्रगति कर देश प्रदेश और अपना नाम रोशन कर सके। राष्ट्रीय शिक्षा नीति और आईसीटी के उपयोग कर प्रदेश की उच्च शिक्षा को नई पहचान मिल रही है।
उत्तर प्रदेश के स्वप्नदर्शी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में छात्रों और शिक्षकों को न सिर्फ भविष्य की चुनौतियों से निपटने में सक्षम बनाया , बल्कि इसके अनुरूप तैयार किया जा रहा है ।
उच्च शिक्षा मंत्री, योगेंद्र उपाध्याय के नेतृत्व में उच्च शिक्षा विभाग भविष्य की चुनौतियों के अनुसार उच्च शिक्षा के पठन-पाठन को विकसित करने के लिए बचनचद्धता के साथ कार्य कर रहा है।सरकार का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को एक ऐसा मंच उपलब्ध कराना है, जहां वे विश्व स्तरीय शिक्षा और संसाधनों का लाभ उठाकर अपने करियर को नई दिशा दे सकें।
उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षा को डिजिटल और तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। छात्रों को टैबलेट और मोबाइल उपकरण वितरित किए गए हैं, और प्रयागराज में ऑनलाइन शिक्षा के लिए ई-स्टूडियो की स्थापना की गई है। इसके अतिरिक्त, 41 लाख से अधिक छात्र अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स में पंजीकृत हो चुके हैं, और राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में श्समर्थ-ईआरपीश् प्रणाली लागू की जा चुकी है। इसके साथ ही, उच्च शिक्षा संस्थानों में क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए केंद्र स्थापित किए गए हैं और स्थानीय भाषाओं में ई-सामग्री तैयार की जा रही है ताकि शिक्षा को अधिक सुलभ बनाया जा सके।
भारतीय संस्कृति और परंपराओं को छात्रों से जोड़ने के उद्देश्य से प्रत्येक विषय की पहली इकाई में भारतीय ज्ञान प्रणाली को शामिल किया गया है, जिससे विद्यार्थियों को भारत की प्राचीन कला, संस्कृति और विज्ञान से परिचित कराया जा सके। इसके अतिरिक्त, मेले के दौरान कई निवेशकों ने उत्तर प्रदेश में विश्वविद्यालय और कॉलेजों की स्थापना के प्रति रुचि दिखाई, जो प्रदेश को एक शैक्षिक हब के रूप में उभरते हुए देख रहे हैं।शोध कार्यों के लिए राज्य विश्वविद्यालयों को 57.38 लाख रुपये का अनुदान स्वीकृत किया है।यह अनुदान प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों में शोध कार्यों की गुणवत्ता में सुधार और नवाचार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रदान किया गया है।
उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि शोध और अनुसंधान शिक्षा का आधार स्तंभ हैं और प्रदेश सरकार का यह कदम राज्य के विश्वविद्यालयों में शोध और नवाचार को गति प्रदान करने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इससे हमारे शिक्षण संस्थानों में न केवल शोध की दिशा में नई ऊर्जा का संचार होगा, बल्कि छात्रों को भी विश्वस्तरीय शोध वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में यह एक अहम कदम है।विश्वविद्यालयों को अनुदान प्राप्त हुआ है, उनमें लखनऊ विश्वविद्यालय, महात्मा ज्योतिबा फुले रूहेलखण्ड विश्वविद्यालय (बरेली), महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ (वाराणसी), वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय (जौनपुर) और सिद्धार्थ विश्वविद्यालय (कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर) शामिल हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए इस योजना के अंतर्गत कुल 57,38,800 रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है, जो निर्धारित शर्तों और प्रतिबंधों के अधीन वितरित की जाएगी।
प्रदेश की उच्च शिक्षा में यह अनुदान एक मील का पत्थर साबित होगा। हमारा लक्ष्य है कि उत्तर प्रदेश को देश का अग्रणी शोध केंद्र बनाया जाए, और यह अनुदान उस दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है।
असेवित जनपदों में विश्वविद्यालय खोलने के लिए नई पॉलिसी
प्रदेश की अर्थव्यवस्था को 01 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने हेतु असेवित जनपदों में जहाँ कोई विश्वविद्यालय नहीं है, वहाँ पर नई पॉलिसी तैयार कीे है। भारत के टॉप विश्वविद्यालयों तथा विदेशी विश्वविद्यालयों को उत्तर प्रदेश में विश्वविद्यालय खोलने के लिए आमंत्रित किया गया है। उत्तर प्रदेश में विश्वविद्यालय खोलने में प्रदेश सरकार अनेक सुविधाएं एवं सहायता प्रदान कर रही है। जिससे कि उत्तर प्रदेश के युवाओं को कहीं और शिक्षा प्राप्त करने के लिए बाहर न जाना पड़े। इससे उत्तर प्रदेश के युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए अधिक विकल्प मिलें उत्तर प्रदेश में विदेशी छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का हब बनेगा, जिससे विदेशी छात्र भी उत्तर प्रदेश में शिक्षा ग्रहण करने आयें।
58 सेंटर ऑफएक्सीलेंस की स्थापना उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य केविश्वविद्यालयों को राष्ट्रीय और एक और ऐतिहासिक कदम उठाया है। इसके तहत योगीसरकार प्रदेश के 8 प्रमुख विश्वविद्यालयों में कुल 58 सेंटरऑफ एक्सीलेंस की स्थापना करने जा रही है। सरकार की इस पहल का उद्देश्य उच्च शिक्षाके क्षेत्र में शोध, नवाचार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण को बढ़ावा देना है, जिससेछात्रों और शिक्षकों को न सिर्फ भविष्य की चुनौतियों से निपटने में सक्षम बनाया जासके, बल्किइसके अनुरूप तैयार किया जा सके। इसके लिए सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिएविश्वविद्यालयों को कुल 03 करोड़ 88 लाख 77 हजार 8 सौ रुपए की धनराशि स्वीकृत की गई है। इस धनराशि सेछात्रों और शिक्षकों को अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
सरकार प्रदेश के विश्वविद्यालयों को वैश्विक मानकोंके अनुरूप तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना से नकेवल छात्रों को शोध और तकनीकी विशेषज्ञता के क्षेत्र में नई संभावनाएं मिलेंगी, बल्कियह विश्वविद्यालयों की शैक्षिक गुणवत्ता में भी सुधार लाएगा। ‘‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस‘‘ योजना के तहत प्रदेश के प्रमुखविश्वविद्यालयों को जोड़ा जा रहा है। इस योजना के तहत महात्मा ज्योतिबा फुलेरुहेलखण्ड विश्वविद्यालय बरेली, वीर बहादुर सिंह पूर्वाचल विश्वविद्यालय जौनपुर, लखनऊविश्वविद्यालय, डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय अयोध्या, ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय लखनऊ, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी, डॉ.राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय लखनऊ और छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर को शामिल किया गया है।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस योजना के तहत राज्य के विश्वविद्यालयों में प्रोजेक्ट फेलो के साथ-साथ अत्याधुनिक शोध उपकरण, पुस्तकालयों का विकास और डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता को सुनिश्चित किया जाएगा। अपराष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के क्रियान्वयन, शिक्षा में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के उपयोग, क्षेत्रीय भाषाओं के प्रचार-प्रसार और भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस) को उच्च शिक्षा में एकीकृत कर अपनाया है।





