दिलीप कुमार पाठक
हिंदी सिनेमा के सौ साल से ज्यादा के सफर में अगर कोई एक ऐसी आवाज़ है जो बचपन की लोरियों से लेकर जवानी की मस्ती और बुढ़ापे की संजीदगी तक हमारे साथ रही है, तो वो है आशा ताई… आशा भोसले। अक्सर कहा जाता है कि महानता की छाँव में अपना वजूद बनाना सबसे मुश्किल होता है। आशा जी के सामने अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर की वह हिमालय जैसी शख्सियत थी, जिसकी धमक पूरी दुनिया में थी। लेकिन आशा भोसले ने उस छाँव में रुकने के बजाय अपनी एक ऐसी स्वतंत्र राह चुनी, जहाँ वे खुद एक मुकम्मल शिखर थीं।
आशा जी की सबसे बड़ी खूबी उनकी ‘वर्सटैलिटी’ यानी बहुमुखी प्रतिभा है। उन्होंने कभी खुद को किसी एक सांचे में नहीं ढलने दिया। संगीत के उस दौर में जब गायिकाओं के लिए कुछ खास दायरे तय थे, तब आशा जी ने उन सब सीमाओं को लांघ दिया। एक तरफ ‘उमराव जान’ की वो रूहानी गजलें हैं – ‘इन आँखों की मस्ती के’ या ‘दिल चीज़ क्या है’-जिनमें उन्होंने नज़ाकत की पराकाष्ठा को छुआ, तो दूसरी तरफ ‘पिया तू अब तो आजा’ और ‘दम मारो दम’ जैसे गानों में अपनी जादुई सांसों के इस्तेमाल से रॉक संगीत को भारतीय रगों में उतार दिया। उनकी आवाज़ में वह लचीलापन है कि वे ‘दो लफ़्ज़ों की है दिल की कहानी’ में जितनी सौम्य लगती हैं, ‘हुस्न के लाखों रंग’ में उतनी ही आक्रामक और मादक।आशा जी के करियर में महान संगीतकारों के साथ उनकी जुगलबंदी ने कला की नई ऊँचाइयाँ छुईं। ओ.पी. नैय्यर साहब ने उस दौर में आशा की आवाज़ की उस विशेष खनक और बिंदास अंदाज़ को पहचाना, जो संगीत प्रेमियों के लिए एक ताज़ा हवा के झोंके जैसा था। ‘झुमका गिरा रे’ और ‘कजरा मोहब्बत वाला’ जैसे गानों ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बनाया। नैय्यर साहब की तेज़ लय और आशा की सहज चंचलता ने संगीत का एक नया सौंदर्यबोध विकसित किया। इसके बाद आर.डी. बर्मन यानी पंचम दा के साथ उनकी जुगलबंदी तो जैसे सुरों का एक अद्भुत संगम थी। पंचम के वेस्टर्न बीट्स और आशा की प्रयोगधर्मी आवाज़ ने मिलकर ‘ओ हसीना ज़ुल्फ़ों वाली’ और ‘चुरा लिया है’ जैसे कालजयी गीत दिए। इन दोनों ने मिलकर हिंदी संगीत को वह वैश्विक रंग दिया, जिसकी गूँज आज के रैप के दौर में भी उतनी ही प्रभावशाली है।
सह-गायकों के साथ उनकी केमिस्ट्री किसी जादुई संवाद जैसी रही। मोहम्मद रफ़ी के साथ उनके युगल गीतों में एक मखमली अहसास और गरिमा थी, जैसे ‘दीवाना हुआ बादल’ या ‘उड़ें जब जब जुल्फें तुम्हारी’। रफ़ी साहब की शालीनता और आशा जी की मिठास मिलकर श्रोताओं के कानों में रस घोलती थी। वहीं, किशोर कुमार के साथ उनकी जोड़ी नटखटपन और असीमित ऊर्जा का प्रतीक बनी। किशोर और आशा जब माइक पर साथ होते थे, तो ऐसा अनुभव होता था जैसे दो पुराने दोस्त मिलकर सुरों के साथ लुका-छिपी खेल रहे हों। ‘हाल कैसा है जनाब का’ या ‘एक मैं और एक तू’ जैसे गानों में दोनों की जो आपसी लय सुनाई देती है, वह आज भी ताज़गी का अहसास कराती है।आशा जी का प्रभाव केवल भारतीय सिनेमा तक सीमित नहीं रहा; उन्होंने सरहदों को पार कर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी भारत का गौरव बढ़ाया। उन्होंने ब्रिटिश बैंड ‘कॉर्नरशॉप’ के साथ मिलकर ‘ब्रिमफुल ऑफ आशा’ जैसा गीत दिया, जो वैश्विक स्तर पर हिट रहा। मशहूर गायक ‘बॉय जॉर्ज’ के साथ उनका सहयोग उनकी आधुनिक सोच और वैश्विक संगीत की गहरी समझ का प्रमाण है। वे उन विरल गायिकाओं में से हैं जिन्होंने ‘क्रोनोस क्विंटेट’ जैसे विश्वविख्यात शास्त्रीय पश्चिमी कलाकारों के साथ काम करके भारतीय गायकी की जटिलताओं को दुनिया को समझाया। उनकी उपलब्धियों का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें 2000 में ‘दादा साहब फाल्के पुरस्कार’ और 2008 में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म विभूषण’ से नवाजा गया। साथ ही, वे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दुनिया की सबसे ज़्यादा गाने रिकॉर्ड करने वाली गायिका के रूप में भी दर्ज हुईं।
समाज ने अक्सर लता जी और आशा जी के संबंधों को प्रतिस्पर्धा के नज़रिए से देखा, लेकिन वास्तव में वे एक-दूसरे की पूरक थीं। लता जी यदि संगीत की मर्यादा थीं, तो आशा जी संगीत के विस्तार का प्रतीक बनीं। आशा जी ने हमेशा अपनी बड़ी बहन के प्रति अटूट सम्मान बनाए रखा, लेकिन अपनी अथक मेहनत से यह भी सुनिश्चित किया कि उनकी पहचान स्वतंत्र रहे। शुरुआती दौर में उन्हें अक्सर वे गीत मिलते थे जो चुनौतीपूर्ण या लीक से हटकर होते थे, लेकिन उन्होंने अपनी साधना से उन्हीं गीतों को अपनी विशिष्ट शैली बना दिया। 90 साल की उम्र के पड़ाव पर भी जब वे मुस्कुराकर गाती थीं, तो उनकी आवाज़ में वही ताज़गी और कशिश महसूस होती है। वे सिर्फ एक गायिका नहीं, बल्कि एक शानदार कुक और सफल बिज़नेसमैन भी थीं, जिनके नाम से दुनिया भर में ‘आशाज़’ रेस्तरां की चेन चलती है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि समय के साथ कदम मिलाना ही असली जीवन है, आशा जी सांसरिक रूप से दुनिया अलविदा कह गईं हों लेकिन उनकी आवाज़ कल भी हमारे साथ थी, आज भी है और अनंतकाल तक एक उम्मीद बनकर गूँजती रहेगी, महान आशा ताई को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि..





