रस्सी जल गई पर बल नहीं गया…!!

The rope burnt but the strength did not go away…!!

अशोक भाटिया

भारतीय राजनीति में अरविंद केजरीवाल पिछले कुछ समय से महत्वपूर्ण चेहरा माने जा रहे थे । दिल्ली से राजनैतिक सफर की शुरुआत करने वाले अरविंद केजरीवाल ने बहुत कम समय में राजनैतिक गलियारों में अपना नाम अंकित करवाया तथा अपनी पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी का भी दर्जा दिलवाया, परंतु दिल्ली में संपन्न हुए चुनाव में केजरीवाल को पराजय का सामना करना पड़ा था । पिछले काफी समय से अरविंद केजरीवाल को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है तथा दिल्ली में हार से सभी लोग उनके राजनैतिक भविष्य पर प्रश्न चिन्ह लगता रहा हैं। अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक झटके ऐसे लगे है जब उनके भविष्य के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा कर रहे है। सबसे बद्दा झटका तब लगा जब राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रमजीत साहनी और स्वाति मालीवाल समेत AAP के 7 राज्यसभा सांसदों ने पार्टी से इस्तीफा देकर भाजपा (BJP) का दामन थाम लिया है। उधर कोर्ट में उन पर शराब घोटाले का केस भी चल रहा है ।

पर कहते है न कि रस्सी जल जाती है पर बट नहीं जाता वैसे ही दिल्ली के पूर्व सीएम और AAP के प्रमुख अरविंद केजरीवाल का बट नहीं जा रहा है ।आज भी वो प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहे है । सोमवार को एक सभा में उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री के तौर पर 2026 पूरा नहीं कर पाएंगे। मेरा दिल और राजनीतिक समझ कहती है कि मोदी और अमित शाह जाने वाले है। केजरीवाल ने कहा कि मोदी जी की पॉपुलैरिटी आज पाताल लोक पहुंच चुकी है। उनका साम्राज्य जाने वाला है।केजरीवाल ने यह बात शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत की किताब लॉन्च के दौरान दिल्ली में कही। इस दौरान दिग्विजय सिंह, कपिल सिब्बल और संजय सिंह समेत कई विपक्षी नेता मौजूद थे।

देखने वाली बात यह है कि सोशल मीडिया पर आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल का एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। यह वीडियो पंजाब के होशियारपुर का है। इस वीडियो में दिख रहा है कि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जो ना तो कोई मंत्री हैं ना कहीं के विधायक, फिर भी उनके काफिले में दर्जनों लक्जरी कार और कमांडो साथ हैं। खुद को आम आदमी बताने वाले केजरीवाल के इसी दोहरापन पर लोग उनसे नाराज हैं। विपश्यना के लिए पंजाब पहुंचे केजरीवाल के काफिले पर दिल्ली सरकार में कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि उनके काफिले का नजारा देखने वाला था। उनके काफिले में पचास से अधिक गाड़ियां शामिल थीं, जिनमें से दो-दो करोड़ रुपए की लैंड क्रूजर शामिल थीं। इसके अलावा 100 से अधिक पुलिस कमांडो उनके साथ थे। यही नहीं, एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां भी शामिल थीं और वह कहते हैं कि शांति लेने के लिए वहां गए हैं। मैं पूछता हूं कि यह कैसी शांति है, जिसके लिए पंजाब के लोगों के खजाने से लाखों रुपए उड़ाए जा रहे हैं।केजरीवाल के काफिले पर तंज कसते हुए उनकी पूर्व सहयोगी स्वाति मालीवाल ने कहा कि सारी दुनिया को वीआईपी कल्चर पर टोकने वाले केजरीवाल जी आज ख़ुद डोनाल्ड ट्रंप से बड़ा सुरक्षा घेरा लेकर घूम रहे हैं।

पंजाब से कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने तो कहा कि रस्सी जल गई पर बल नहीं गया…!! यह काफिला देश के प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री का नहीं, बल्कि एक हारे हुए विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का है। आये है 10 दिन के लिए ध्यान लगाने, पर काफिला 10 किलोमीटर लम्बा! दिल्ली में हारते ही शांति ढूंढने पंजाब आ गए? अगर ध्यान लगाना था तो वीआईपी काफिला क्यों? क्या यह आम आदमी की तपस्या है यां महाराजाओं की राजशाही?

सबसे ज्यादा पार्टी को बड़ा झटका दिया संदीप पाठक ने। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक़, बीजेपी में जाने की तो छोड़ ही दीजिए शायद ही किसी ने कल्पना की होगी संदीप पाठक आम आदमी पार्टी छोड़ देंगे।कहा जाता है कि संदीप पाठक आम आदमी पार्टी के दूसरे नेताओं की तुलना में भले ही सार्वजनिक मंचों पर कम दिखते रहे हों लेकिन साल 2016 में पार्टी में शामिल होने के बाद से ही कोर लीडरशिप में उनका असर बढ़ता ही गया।संदीप पाठक को आम आदमी पार्टी की चुनावी रणनीति का चाणक्य कहा जाता रहा है। आम आदमी पार्टी पर क़रीबी नज़र रखने वालों का दावा है कि पार्टी को 2022 का पंजाब विधानसभा चुनाव जिताने का श्रेय भी संदीप पाठक को जाता है।संदीप पाठक की चुनावी रणनीति बनाने की काबिलियत की वजह से ही उन्हें 2022 में पार्टी की राजनीतिक मामलों की कमेटी का जनरल सेक्रेट्री बना दिया गया था।

पार्टी में इतनी मजबूत स्थिति के बावजूद उनका इसे छोड़कर चले जाना राजनीतिक पर्यवेक्षकों को हैरान कर गया।हालांकि आम आदमी पार्टी के कामकाज पर नज़दीकी नज़र रखने वालों का कहना है देर-सवेर ऐसा होना ही था।आम आदमी पार्टी को लंबे समय तक कवर करने वाले पत्रकार विक्रांत यादव का कहना है, “संदीप पाठक ने शुरू में आम आदमी पार्टी के लिए अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने आम आदमी पार्टी के लिए 2017 और 2022 के पंजाब चुनावों की रणनीति बनाने में अहम भूमिका निभाई।”

“कई राजनीतिक सर्वे कराए। 2022 का चुनाव जिताने में भी उनका रोल अहम रहा। लेकिन पिछले एक डेढ़-साल से पार्टी और संदीप के रिश्ते में दूरियां आ गई थीं।”आख़िर चुनावी रणनीति में इतनी अहम भूमिका में रहे संदीप पाठक और पार्टी की दूरियों की वजह क्या थी?विक्रांत यादव कहते हैं, ”संदीप और आम आदमी पार्टी के नेतृत्व के बीच दूरियों की असली वजह थी दिल्ली विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार। कहा गया कि चुनाव से पहले करवाए जाने वाले पार्टी के सर्वे ठीक नहीं हुए। इसके लिए संदीप को ज़िम्मेदार ठहराया गया और आख़िरकार पार्टी की करारी हार के लिए भी उन्हें कटघरे में खड़ा किया गया। तभी से संदीप और पार्टी का कनेक्ट कम होता गया।”विश्लेषकों का कहना है कि हालांकि इसके बाद भी संदीप पाठक पूरी तरह पार्टी से दूर नहीं हुए थे। पार्टी को उनकी विशेषज्ञता का एहसास था।

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि राघव चड्ढा और अशोक मित्तल के बीजेपी में जाने का अंदेशा तो पार्टी नेतृत्व को था। अशोक मित्तल जैसे नेताओं पर तो बीजेपी आईटी और ईडी रेड का डर दिखाकर दबाव बना रही थी। लेकिन आम आदमी पार्टी को अंदाज़ा नहीं था कि संदीप भी बीजेपी की राह पकड़ेंगे।राघव चड्ढा और अशोक मित्तल के बीजेपी में जाने की ख़बर मिलने के बावजूद पार्टी ने उन्हें मनाने की कोशिश नहीं की।लेकिन आम आदमी पार्टी की ओर से संजय सिंह ने गुरुवार को संदीप पाठक से बात कर उन्हें मनाने की कोशिश की थी।

आम आदमी पार्टी के कामकाज को लंबे समय से देख रहीं पत्रकार रूपाश्री नंदा का कहना है कि 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में पार्टी को जीत दिलाने में संदीप पाठक की भूमिका बेहद अहम थी। इसके लिए उन्हें पार्टी के बाहर और भीतर दोनों जगह तारीफ़ मिली।

उनका कहना है कि राज्य में पार्टी के गठन से लेकर उम्मीदवारों के चयन, टिकट बंटवारे से लेकर चुनाव पूर्व सर्वे की संदीप की भूमिका की वजह से पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने उन्हें राज्यसभा की सीट के लिए नॉमिनेट किया।

कहा जा रहा है कि केजरीवाल और संदीप पाठक के रिश्ते शुरू में काफ़ी अच्छे रहे। लेकिन 2025 में दिल्ली विधानसभा चुनाव और इसके बाद पार्टी में किनारे किए जाने से संदीप पाठक आहत थे। अलगाव के बीज यहीं से पड़ने शुरू हो गए थे।

रूपाश्री नंदा कहती हैं, “विधानसभा चुनाव में अलग-अलग लोग और एजेंसी सर्वे कर रहे थे और रणनीति बना रहे थे। जेल से निकलने के बाद अरविंद केजरीवाल ने खुद ही कमान संभाल ली थी। संदीप पाठक को वो भूमिका नहीं मिली जो वो चाहते थे। इससे वो काफ़ी नाराज थे।” “उन्होंने पार्टी की इस नीति की आलोचना की। इसके बाद उन्हें पार्टी के अंदर कई अहम ज़िम्मेदारियों से हटा दिया गया। पार्टी में उन्हें साइडलाइन कर दिया गया।”वो कहती हैं, “भले ही संदीप पाठक को साइडलाइन कर दिया गया हो लेकिन मैं उनके बीजेपी में जाने को लेकर बेहद आश्चर्यचकित हूं। दूसरे लोगों को आईटी और ईडी रेड का डर था। पंजाब में अशोक मित्तल और संजीव अरोड़ा के ख़िलाफ़ छापेमारी हुई है। संदीप पाठक का वित्तीय मामलों से कोई लेना-देना नहीं था। इसलिए उन्हें ऐसा कोई डर भी नहीं था। फिर भी वो बीजेपी में चले गए।”

रूपाश्री नंदा कहती हैं, “मुझे लगता है कि अरविंद केजरीवाल से मोहभंग होना और पार्टी में बराबरी का दर्जा न मिलना ही उन्हें पार्टी छोड़ने की ओ ले गया। इसके बावजूद मैं इसका विश्लेषण नहीं कर पा रही हूं कि आख़िर वो बीजेपी में क्यों चले गए?”

गौरतलब है कि संदीप पाठक ने आम आदमी पार्टी को 2022 का पंजाब विधानसभा चुनाव जिताने में जो अहम भूमिका निभाई इसके लिए उन्हें ‘जीत का हीरो’ भी कहा गया। 2017 के पंजाब चुनाव में ज़्यादातर एग्जिट पोल में आम आदमी पार्टी की जीत की भविष्यवाणी की गई थी लेकिन पार्टी राज्य में अपनी छाप छोड़ने में नाकाम रही और 20 सीटें ही जीत पाई।लेकिन 2022 के पंजाब विधानसभा चुनावों के लिए संदीप पाठक ने चुनाव से दो साल पहले ही राज्य में अपना काम शुरू कर दिया था।उन्होंने गांव के स्तर तक जाकर पार्टी के ढांचे का पुनर्गठन किया। पार्टी को इसका फ़ायदा मिला और उसने 117 सीटों में से 92 सीटें जीतकर सरकार बनाई।आम आदमी पार्टी की पंजाब में जीत से पहले संदीप ने पूर्व चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर के साथ मिलकर 2020 के विधानसभा चुनावों के लिए दिल्ली में पार्टी के अभियान की योजना बनाने में भी अहम भूमिका निभाई।

हालांकि पंजाब में जीत के बाद ही वो लाइमलाइट में आए। 2022 में एक इंटरव्यू में संदीप पाठक ने कहा था कि ‘उनका दिमाग एक वैज्ञानिक की तरह काम करता है न कि एक राजनेता की तरह।’पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत के बाद ही उन्हें आम आदमी पार्टी का नेशनल जनरल सेक्रेट्री बनाया गया। कहा गया कि यह पद विशेष रूप से उन्हीं के लिए सृजित किया गया था।उन्हें पार्टी की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था, राजनीतिक मामलों की समिति का स्थायी आमंत्रित सदस्य भी बनाया गया।

अप्रैल 2022 में राज्यसभा सांसद बनने के बाद बिलासपुर (छत्तीसगढ़) की अपनी पहली यात्रा के दौरान, पाठक ने वहां एक जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने खुद को ‘छत्तीसगढ़ का बेटा’ बताया।उन्होंने कहा, ”मैं नौ से दस साल तक अमेरिका और इंग्लैंड में रहा। मैं उन देशों में बड़ी-बड़ी नौकरियां छोड़कर भारत वापस आया।”संदीप पाठक ने कहा, “मैं दिल्ली आईआईटी में प्रोफ़ेसर था। सरकारी नौकरी थी और ज़िंदगी सुख-सुविधाओं से भरी थी। लेकिन मैंने वह नौकरी छोड़कर राजनीति में एंट्री ली। मैंने देखा कि हमसे बाद में आज़ादी पाने वाले देश हमसे आगे निकल गए हैं।” “लेकिन भारत भ्रष्टाचार की वजह से पिछड़ा हुआ है। यहां की पॉलिटिक्स में गड़बड़ियां हैं। यहां के स्कूल और अस्पताल ठीक नहीं है। यहां की राजनीति ख़राब है। देश के राजनेताओं ने राजनीति को बिगाड़ कर रख दिया है।”माना जा रहा है कि संदीप पाठक के जाने के बाद केजरीवाल को अगले पंजाब चुनाव कठिनाई आ सकती है ।