दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह क्यों?

Why are there questions on the working style of Delhi Police?

प्रमोद शर्मा

देश की सबसे मजबूत और चुस्त दुरुस्त पुलिस का तमगा लेने वाली दिल्ली पुलिस इन दिनों खुद अपनी कार्यशैली से प्रश्न चिन्ह के घेरे में है। दिल्ली के वसंत एन्क्लेव में जाबांज ब्रिगेडियर पर बिना बात के रसूखदारों के हाथों हमला हुआ और प्रश्न चिन्ह लगा पुलिसिया कार्यशैली पर? घटना के बाद थाने में ब्रिगेडियर और उनकी पत्नी और बेटे के साथ शिकायत लेने देने के नाम पर जिस तरह का पुलिसिया व्यवहार किया गया, उससे राजधानी की पुलिस शर्मशार हो गई। इसी तरह दिल्ली के जाफरपुर कलां थाना क्षेत्र में अप्रैल महीने के तीसरे हफ्ते में आधी रात को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल में तैनात हेड कॉन्स्टेबल ने मोटरसाइकिल सवार दो युवकों को सिर्फ इसलिए गोली मार दी, क्योंकि दोनों युवक अपने रिश्तेदार के यहाँ से जन्म दिन की पार्टी करने के बाद घर लौटते पुलिस की आँख में गर गए। हमले के दौरान एक युवक की मौत हो गई जबकि पेट में गोली लगने के बाद दूसरा युवक बुरी तरह जख्मी होकर अस्पताल में भर्ती है। इस मामले में भी अभी तक पुलिस मुख्यालय से कोई ठोस कार्यवाई नहीं होने से पुलिसिया कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह लग रहा है। यह कोई पहला और अंतिम मामला नहीं है। बीते साल सीबीआई की रडार पर दिल्ली पुलिस के रिश्वतखोर अफसर, सब इंस्पेक्टर और दो हेड कांस्टेबल को रंगे हाथ पकड़ने का मामला खूब चर्चित हुआ था। दिल्ली पुलिस में रिश्वतखोरी के मामले बढ़ते जा रहे हैं जहाँ कई पुलिसकर्मी रिश्वत लेते पकड़े गए हैं। विजिलेंस यूनिट और सीबीआई ने कई गिरफ्तारियां की हैं

देश की सबसे पेशेवर मानी जानी वाली दिल्ली पुलिस के दामन पर दाग कम होने का नाम नहीं ले रही है। हाल के वर्षो में इसके पुलिसकर्मी विजिलेंस यूनिट तो कभी सीबीआइ के हाथों रिश्वत लेते पकड़े जा रहे हैं। हौज खास थाने के सबइंस्पेक्टर युद्धवीर सिंह यादव 2.5 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए दबोचा गया। वहीं, पटपड़गंज औद्योगिक क्षेत्र के हेड कांस्टेबल सुधाकर और राजकुमार को 50,000 रुपये की रिश्वत लेते समय गिरफ्तार किया गया।

पुलिस की इस छवि पर दिल्ली पुलिस सेवानिवृत अराजपत्रित अधिकारी संघ ने भी चिंता व्यक्त की है। संघ के अध्यक्ष छिद्दा सिंह रावत ने कहा की दिल्ली पुलिस अंग्रेजो के बनाए कानून से ही चल रहा है। रावत ने कहा कि दिल्ली पुलिस की कार्यशैली में तभी बदलाव होगा, जब कानून में संशोधन किया जाए। पुलिस में भी तनाव व्याप्त है और काम के घंटे तय नहीं है लिहाजा उनका गुस्सा जनता पर ही निकल रहा है।

बीते दिन दिल्ली के वसंत एन्क्लेव में ब्रिगेडियर पर हमला किसी और ने नहीं बल्कि चौधरी एविएशन का मालिक और ढाबा संचालक ने किया था। गुजरात में तैनात ब्रिगेडियर पीएस अरोड़ा व उनके बेटे से वसंत एन्क्लेव स्थित घर के आगे 11 अप्रैल की रात खाना खाने के बाद परिवार के साथ टहलने निकले। दोनों आरोपित ब्रिगेडियर के घर के आगे मर्सिडीज में बैठकर शराब पी रहे थे। उनके बेटे ने मना किया तो अपने साथियों को बुलाकर ब्रिगेडियर व उनके बेटे के साथ पुलिस की मौजूदगी में मारपीट की। मामले में लापरवाही बरतने वाले इंस्पेक्टर (आइओ) को सोमवार को ही लाइन हाजिर कर दिया गया था।

वहीं वसंत विहार थाने में बीएनएस की धारा 115(2), 126(2), 351(2), 79, 191(2), 190 के तहत एफआइआर दर्ज कर जांच की जा रही है। दोनों को हिरासत में लेने के साथ ही पुलिस ने घटना में इस्तेमाल 2023 माडल की मर्सिडीज जीएलई 300डी 4मेटिक एलडब्ल्यूडी कार (डीएल 3सीसीवाई 0789) को भी जब्त किया है। ब्रिगेडियर पीएस अरोड़ा वर्तमान में गुजरात में तैनात हैं और 16 अप्रैल तक की छुट्टी लेकर वसंत एन्क्लेव स्थित घर आए थे। घटना का वीडियो व फोटो भी इंटरनेट मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुआ। मामला सेना से जुड़ा होने के बावजूद पुलिस की लचर कार्यशैली को लेकर लोगों ने रोष जाहिर किया। आरोपितों की पहचान मेहरम नगर-नई दिल्ली निवासी 49 वर्षीय सतेंद्र उर्फ सोनू और 56 वर्षीय संजय शर्मा के रूप में हुई है। सतेंद्र ”चौधरी एविएशन प्राइवेट लिमिटेड” नाम से एविएशन कंपनी चलाता है, जिसमें वह निदेशक है। उसकी कंपनी उड़ान सेवाएं (चार्टर्ड उड़ानें, कार्गो उड़ानें आदि) प्रदान करती है।

विमानों के साथ ही उनके पुर्जों की खरीद-बिक्री का भी काम करती है। वहीं दूसरा आरोपित संजय शर्मा मेहरम नगर में ही ”पंडित जी ढाबा” का संचालन करता है। दोनों से पूछताछ की जा रही है।

सैन्य अधिकारी के साथ किसी की बदसलूकी बर्दाश्त नहीं: उपराज्यपाल
घटना को लेकर उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने ब्रिगेडियर पीएस अरोड़ा से फोन पर बात उनका कुशलक्षेम पूछा। साथ ही दिल्ली पुलिस को निर्देश दिए कि परिवार को तत्काल पूर्ण सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजधानी दिल्ली में सैन्य अधिकारियों के साथ बदसलूकी किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने अपने इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा कि वसंत एन्क्लेव में हुई उस घटना को लेकर मैं गहरी चिंता में हूं, जिसमें भारतीय सेना के एक सेवारत ब्रिगेडियर, उनकी पत्नी और उनके 23 वर्षीय बेटे (जो आइआइटी दिल्ली से ग्रेजुएट हैं) के साथ मारपीट की गई। मैंने खुद ब्रिगेडियर पीएस अरोड़ा से फोन पर बात कर घटना और उनके परिवार की हालत के बारे में जानकारी ली है।
इसके साथ ही मैंने पुलिस कमिश्नर और डीसीपी से भी बात की और उन्हें निर्देश दिया कि इस मामले की पूरी और तेज जांच हो, और दोषियों के खिलाफ तुरंत और उचित कार्रवाई की जाए। उन्होंने आगे लिखा कि मैंने दिल्ली पुलिस को यह भी निर्देश दिया है कि अधिकारी और उनके परिवार को पूरी सुरक्षा दी जाए। हम अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और कानून के शासन को बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

वसंत एनक्लेव की एक कॉलोनी में 11 अप्रैल की रात जो हुआ, वह सिर्फ एक मारपीट की घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता और पुलिस की कथित लापरवाही की कहानी है। देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले आर्मी के एक ब्रिगेडियर अपनी ही कॉलोनी में बेटे को बचाने के दौरान हमलावरों से घिरे रहे। पत्नी मदद के लिए गुहार लगाती रही और पुलिस सामने खड़ी होकर देखती रही। ब्रिगेडियर परमिंदर सिंह अरोड़ा की पत्नी नताशा और बेटा तेजस करीब 25 मिनट तक हमलावरों के बीच घिरे रहे। एनबीटी से बातचीत में नताशा कहती हैं, दुख इस बात का नहीं कि वहां मौजूद 15-20 लोगों ने मदद नहीं की, बल्कि इस बात का है कि पुलिस ने कुछ नहीं किया। मूलरूप से ओडिशा की रहने वाली नताशा पिछले 12 साल से दिल्ली में रह रही हैं। उनका कहना है कि वह लोग पहले शंकर विहार में रहते थे। अब वसंत एनक्लेव में अपने बेटे और बेटी के साथ रहती हैं। बेटा अपना होम-इकोनॉमिक ब्रैंड चला रहा है। जिसमें वह भी उनका साथ दे रही हैं। उनके पति फिलहाल गुजरात में तैनात हैं और 25 मार्च को ही छुट्टी पर दिल्ली आए थे। नताशा के मुताबिक, 11 अप्रैल की रात करीब 9:45 बजे वह अपने पति और बेटे के साथ वॉक पर निकली थीं। पति को शनि मंदिर जाना था। जैसे ही वे वसंत एनक्लेव के एंट्री गेट के पास पहुंचे, उन्होंने देखा कि एक कार में कुछ लोग खुलेआम शराब पी रहे हैं। तेजस ने उनसे पूछा कि वे कहां रहते हैं। कार सवारों ने सोसाइटी में रहने की बात कही, लेकिन सही पता नहीं बताया। नताशा के मुताबिक, उन्होंने उन्हें पब्लिक प्लेस में शराब पीने से मना किया। आरोप है कि इस पर युवकों ने कहा, हम तो ऐसे ही पीते हैं। उसी दौरान एक व्यक्ति लगातार फोन पर बात कर रहा था। उन्होंने तुरंत 112 पर कॉल कर दी।

पुलिस आई, लेकिन कहानी बदल गई
पीसीआर वैन मौके पर पहुंची। नताशा का कहना है कि वह अपना बयान दर्ज ही करवा रही थीं कि कार सवार ने पुलिसकर्मी को फोन पर किसी से बात करवाई। फोन पर ‘कैप्टन सुमित’ नाम दिखाई दिया। नताशा ने जब पुलिसकर्मी से कहा कि वह उनका बयान बीच में छोड़कर कैसे जा सकते हैं, तो जवाब मिला थोड़ी देर हो गई तो क्या आफत हो गई। यहीं से हालात बेकाबू हो गए।

‘हम आर्मी बैकग्राउंड से हैं, इसलिए डरे नहीं’
नताशा कहती हैं, हम आर्मी बैकग्राउंड से हैं, इसलिए डर नहीं लगा। अगर आम आदमी होता तो क्या करता? यह सोचकर ही डर लगता है। घटना के दो दिन बाद तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। जब मामला आर्मी चैनल के जरिए उठाया गया, तब जाकर पुलिस हरकत में आई। नताशा के अनुसार कुछ ही देर में 7-8 लोग अलग-अलग गाड़ियों से वहां पहुंचे। आते ही उन्होंने तेजस को घेर लिया और बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। उनके बेटे को लगातार 15-20 मिनट तक मारते रहे। उसके चेहरे, गर्दन और हाथों में गंभीर चोटें आईं। इधर ब्रिगेडियर ने बेटे को बचाने की कोशिश की तो हमलावरों ने उन्हें भी घेर लिया और उनके साथ भी मारपीट की। वह कभी बेटे को बचाने दौड़तीं तो कभी पति को। हम पूरी तरह बेबस थे। नताशा के अनुसार, उन्होंने बार-बार पुलिसकर्मी से मदद मांगी, लेकिन वह पीसीआर वैन में जाकर बैठ गया और कहा मैं अकेले कुछ नहीं कर सकता।

मेरी टीम आएगी तब देखूंगा। करीब 25 मिनट तक यह सब चलता रहा और हमलावर फरार हो गए। घटना के बाद जब पुलिसकर्मी से कहा कि उन्हें थाने ले चलो, तो उसने गाड़ी की डिग्गी खोलकर कहा बैठ जाओ या लेट जाओ। जब उन्होंने बीच की सीट पर बैठाने को कहा, तो कथित तौर पर जवाब मिला आप इस तरह के लोग नहीं हो, जिन्हें यहां बैठाकर ले जाएं।

आखिरकार परिवार अपनी कार से वसंत विहार थाना पहुंचा। नताशा का आरोप है कि थाने में भी उनका अनुभव अपमानजनक रहा। महिला पुलिसकर्मी ने कहा 10-10 बार PCR कॉल कर रहे हो, हमारे पास और काम नहीं है क्या। उनके पति ने कहा कि ‘आप भी वर्दी में हैं, मैं भी सैनिक हूं’ तो जवाब में कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया। एफआईआर लिखने की बात आई तो कहा गया पहले एमएलसी कराओ। खून से लथपथ बेटे को पति खुद आर्मी अस्पताल ले गए।

इसी प्रकार जाफरपुर कलां थाना क्षेत्र में अप्रैल के तीसरे हफ्ते की एक दिन आधी रात को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल में तैनात हेड कॉन्स्टेबल ने मोटरसाइकिल सवार दो युवकों को गोली मार दी। हमले के दौरान एक युवक की मौत हो गई जबकि पेट में गोली लगने के बाद दूसरा युवक बुरी तरह जख्मी है। वारदात के बाद आरोपित हेड कॉन्स्टेबल मौके से फरार हो गया। हादसे में गोली लगने से जिनकी मौत हुई है उनका नाम पांडव कुमार है। वहीं डीडीयू अस्पताल में पांडव के दोस्त कृष्ण की हालत नाजुक बनी हुई है। वारदात के समय पांडव, कृष्ण और बाकी युवक दोस्त के बेटे की जन्मदिन पार्टी से घर लौट रहे थे। आरोप है कि इस दौरान ही हेड कॉन्स्टेबल आधी रात को भीड़ लगाने का कारण पूछने लगा। पुलिस ने इस मामले में आरोपित के खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर आरोपित की तलाश शुरू कर दी है। आरोप है कि आरोपित हेड कॉन्स्टेबल शराब के नशे में था और पीड़ित पक्ष के लोगों के साथ गाली-गलौज करने लगा। जैसे ही पीड़ित पांडव कुमार ने इस पर नाराजगी जताई वह आग बबूला हो गया। उसने पिस्टल निकालकर पांडव के सीने से सटाकर गोली चला दी। गोली आरपार होकर इसके साथ मोटरसाइकिल पर पीछे कृष्ण के पेट में जा लगी।

बीते साल जुलाई में दिल्ली पुलिस के तीन जवानों को सीबीआई ने रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा है। हौज खास थाने के एसआई युद्धवीर सिंह यादव 2.5 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए दबोचा। वहीं, पटपड़गंज औद्योगिक क्षेत्र के हेड कांस्टेबल सुधाकर और राजकुमार को 50,000 रुपये की रिश्वत लेते समय गिरफ्तार किया गया। सीबीआई ने रिश्वतखोरी के दो अलग-अलग मामलों में दिल्ली पुलिस के एक सब इंस्पेक्टर और दो हेड कांस्टेबल को गिरफ्तार किया है। हौज खास थाने में तैनात एसआई युद्धवीर सिंह यादव को उस समय गिरफ्तार किया गया, जब वह कथित तौर पर 2.5 लाख रुपये की रिश्वत ले रहा था। दूसरे मामले में, पटपड़गंज औद्योगिक क्षेत्र में तैनात हेड कांस्टेबल सुधाकर और राजकुमार को कुल 50,000 रुपये की रिश्वत राशि में से 10,000 रुपये लेते हुए गिरफ्तार किया गया। यादव के खिलाफ एक अदालती मामले में अनुकूल कार्रवाई रिपोर्ट के लिए तीन लाख रुपये की रिश्वत मांगने का मामला दर्ज किया गया था। सीबीआई ने आरोप लगाया है कि बातचीत के बाद राशि घटाकर 2.5 लाख रुपये कर दी गई थी।

अधिकारियों ने बताया कि उसे रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया। जिस मामले में हेड कांस्टेबलों को गिरफ्तार किया गया, वह सीबीआई ने सुधाकर और दिल्ली पुलिस के स्पेशल स्टाफ के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ दर्ज किया था। आरोप है कि सादे कपड़ों में चार लोग शिकायतकर्ता की दुकान पर आए और उनमें से दो ने खुद को स्पेशल स्टाफ, दिल्ली पुलिस, आनंद विहार का सदस्य बताया।

देश की सबसे पेशेवर मानी जानी वाली दिल्ली पुलिस के दामन पर दाग कम होने का नाम नहीं ले रही है। हाल के वर्षो में इसके पुलिसकर्मी विजिलेंस यूनिट तो कभी सीबीआइ के हाथों रिश्वत लेते पकड़े जा रहे हैं। पुलिस विभाग के रिकार्ड को देखें तो रिश्वत के लालच में दिल्ली पुलिस के जवान अपनी नौकरी दांव पर लगा रहे हैं। रिश्वत लेते पकड़े जाने पर उनके नौकरी से बर्खास्त होने की प्रबल संभावना रहती है। अदालत में जब तक पुलिसकर्मियों के मामले चलते हैं तब तक वे निलंबित ही रहते हैं। इस दौरान उन्हें आधा वेतन मिलता है, पदोन्नति से वंचित रहते हैं। खुद के साथ-साथ वे विभाग की छवि खराब करते हैं। इस साल अब तक 22 पुलिसकर्मी मामूली रिश्वत की रकम लेते गिरफ्तार हो चुके हैं।

इसी तरह दिल्ली पुलिस के सहायक सब इंस्पेक्टर राकेश कुमार को 15000 रुपये की रिश्वत लेते समय विजिलेंस यूनिट ने रंगे हाथों पकड़ा। विजिलेंस टीम को देखकर उसने पैसे हवा में उछाल दिए, जिनमें से 5000 रुपये भीड़ ने लूट लिए। आरोपी झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर रिश्वत मांग रहा था।

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की विजिलेंस यूनिट ने हौज काजी थाने में तैनात असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर राकेश कुमार को 15000 रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोपी ने रिश्वत की रकम लेते समय विजिलेंस टीम को देखकर नोट हवा में उछाल दिए, लेकिन टीम ने उसे दबोच लिया। इस घटना में 10000 रुपये बरामद किए गए, जबकि बाकी के 5000 रुपये भीड़ में मौजूद लोगों ने लूट लिए और मौके से चलते बने। पुलिस की विजिलेंस यूनिट के मुताबिक, एक स्थानीय व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई थी कि एएसआई राकेश कुमार उसे झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर 15000 रुपये की रिश्वत मांग रहा था। शिकायतकर्ता ने 9 सितंबर को विजिलेंस शाखा में लिखित शिकायत दी और बताया कि एएसआई ने उसे दोपहर 12:30 बजे हौज काजी थाने में रिश्वत देने के लिए बुलाया था। शिकायत के आधार पर विजिलेंस यूनिट ने ट्रैप लगाने की योजना बनाई। दोपहर करीब 12:30 बजे शिकायतकर्ता थाने पहुंचा और रिश्वत की रकम एएसआई को सौंपी। जैसे ही शिकायतकर्ता ने विजिलेंस टीम को पहले से तय इशारा किया, टीम ने आरोपी को पकड़ने के लिए दौड़ लगा दी। विजिलेंस टीम को देखते ही एएसआई राकेश कुमार ने जल्दी से रिश्वत की रकम हवा में उछाल दी। हौज काजी के भीड़भाड़ वाले इलाके में कुछ लोगों ने मौके का फायदा उठाकर 10000 रुपये में से 5000 रुपये की रकम उठा ली और चलते बने।

सीबीआई कोर्ट दिल्ली, ने सोमवार को रिश्वतखोरी के मामले में जगमाल सिंह देशवाल (तत्कालीन सब-इंस्पेक्टर और जेडओ, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस) को 3 साल के कठोर कारावास और 50,000 रुपये के जुर्माने की सज़ा सुनाई है। सीबीआई ने आठ फरवरी 2022 को शिकायतकर्ता संदीप यादव से 22 हजार रुपए लेते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के नांगलोई सर्किल में तैनात जेडओ /सब-इंस्पेक्टर जगमाल सिंह देशवाल को पकड़ा था। नजफगढ़ के खैरा गांव निवासी संदीप यादव और उसके भाई का ट्रांसपोर्ट का कारोबार हैं। उनके पास 12 ट्रक हैं। उनके ट्रक मुंडका से होते हुए हरियाणा के चरखी दादरी जाते थे। संदीप यादव ने 7 फरवरी 2022 को सीबीआई को शिकायत दी, कि ट्रैफिक पुलिस के मुंडका जोन में तैनात सब-इंस्पेक्टर जगमाल सिंह देशवाल उससे दो हजार रुपए प्रति ट्रक के हिसाब से 24 हजार रुपए प्रति महीने की रिश्वत मांग रहा है। रिश्वत ना देने पर उनके ट्रकों का चालान करने और ट्रकों को बंद करने की धमकी दी है। सीबीआई ने जाल बिछाया और सब- इंस्पेक्टर जगमाल सिंह को रंगे हाथों पकड़ लिया। सीबीआई ने 26.07.2022 को आरोपी जगमाल सिंह के खिलाफ चार्जशीट दायर की। कोर्ट ने सुनवाई के बाद, आरोपी को दोषी ठहराया और तदनुसार सज़ा सुनाई।