प्रधानमंत्री की तेल संकट पर देश वासियों से अपील का राजस्थान और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दिखा असर

The Prime Minister's appeal to the nation regarding the oil crisis has had an impact in Rajasthan and the national capital Delhi

दिल्ली सरकार में सप्ताह में दो दिन “वर्क फ्रॉम होम” की पहल

गोपेन्द्र नाथ भट्ट

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा वैश्विक तेल संकट और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच देशवासियों से ईंधन बचत, “वर्क फ्रॉम होम”, सार्वजनिक परिवहन अपनाने तथा अनावश्यक खर्च कम करने की अपील का असर अब राजस्थान में भी दिखाई देने लगा है। राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपनी कार केड़ का काफिला छोटा कर दिया है। इसी प्रकार कई मंत्रियों ने अपनी एस्कॉर्ट गाड़िया हटा दी है। उप मुख्यमंत्री डॉ प्रेम चन्द बैरवा ने राजस्थान रोडवेज की बस में बैठ कर एक सन्देश देने का प्रयास किया है। इसी प्रकार राजस्थान में सरकारी विभागों, व्यापारिक संगठनों और आम नागरिकों के बीच इस अपील को लेकर चर्चा तेज हो गई है। जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और कोटा जैसे बड़े शहरों में कई संस्थानों ने डिजिटल बैठकों और ऑनलाइन कार्य प्रणाली को बढ़ावा देना शुरू कर दिया है। निजी कंपनियाँ कर्मचारियों को सप्ताह में कुछ दिन घर से काम करने की सुविधा देने पर विचार कर रही हैं ताकि ईंधन की खपत कम हो सके।

राजधानी जयपुर में कई व्यापारिक संगठनों और उद्योग मंडलों ने कार पूलिंग तथा सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ावा देने की अपील की है। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों तथा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए लोग अब गैर-जरूरी यात्राओं से बचने लगे हैं।राजस्थान रोडवेज और मेट्रो सेवाओं में भी यात्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लोग निजी वाहनों की बजाय सार्वजनिक परिवहन अपनाते हैं तो इससे ईंधन की बचत के साथ प्रदूषण में भी कमी आएगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही लोगों से पेट्रोल-डीजल का संयमित उपयोग करने, वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने और विदेश यात्राओं से बचने की अपील की थी। इसके बाद राजस्थान में भी कई सामाजिक संगठनों ने “राष्ट्रहित में ईंधन बचाओ” अभियान शुरू करने की तैयारी की है।ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस अपील का असर देखने को मिल रहा है। किसान संगठनों और पंचायत प्रतिनिधियों के बीच डीजल की बचत और सामूहिक परिवहन को लेकर चर्चा बढ़ी है। कई स्थानों पर लोग अनावश्यक वाहन उपयोग कम करने की बात कर रहे हैं।राजस्थान के पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल आर्थिक संकट से जुड़ा विषय नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण से भी जुड़ा हुआ है। यदि लोग ईंधन की खपत कम करते हैं तो कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और शहरों की वायु गुणवत्ता बेहतर हो सकेगी।

हालांकि कुछ व्यापारिक वर्गों में सोने की खरीद कम करने और विदेश यात्राओं पर संयम रखने की अपील को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया भी देखने को मिल रही है। राजस्थान का सर्राफा बाजार देश के बड़े व्यापारिक केंद्रों में गिना जाता है, इसलिए व्यापारी वर्ग स्थिति पर नजर बनाए हुए है।कुल मिलाकर प्रधानमंत्री की अपील ने राजस्थान में ऊर्जा बचत, वैकल्पिक कार्य प्रणाली और जिम्मेदार उपभोग को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार, उद्योग जगत और आम नागरिक इस दिशा में कितने प्रभावी कदम उठाते हैं।

दिल्ली सरकार द्वारा सप्ताह में दो दिन “वर्क फ्रॉम होम” की पहल

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार ने कार्य संस्कृति में बड़ा बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सरकार ने सप्ताह में दो दिन “वर्क फ्रॉम होम” व्यवस्था लागू करने की दिशा में पहल शुरू की है। इस निर्णय को आधुनिक प्रशासनिक सुधार, पर्यावरण संरक्षण और कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।दिल्ली सरकार का मानना है कि राजधानी में प्रतिदिन लाखों वाहन सड़कों पर उतरते हैं, जिससे ट्रैफिक जाम और वायु प्रदूषण की समस्या गंभीर होती जा रही है। यदि सरकारी और कुछ निजी क्षेत्रों के कर्मचारी सप्ताह में दो दिन घर से कार्य करें, तो यातायात का दबाव कम किया जा सकता है। इससे न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि प्रदूषण में भी कमी आने की उम्मीद है।कोविड-19 महामारी के दौरान “वर्क फ्रॉम होम” व्यवस्था ने यह साबित किया कि अनेक प्रशासनिक और तकनीकी कार्य डिजिटल माध्यम से भी प्रभावी ढंग से किए जा सकते हैं। इसी अनुभव को आधार बनाकर दिल्ली सरकार अब स्थायी हाइब्रिड कार्य प्रणाली विकसित करने पर विचार कर रही है। माना जा रहा है कि प्रारंभिक चरण में सूचना प्रौद्योगिकी, डिजिटल सेवाओं और प्रशासनिक शाखाओं में इस मॉडल को लागू किया जाएगा।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि बदलते समय के साथ कार्य प्रणाली में भी परिवर्तन आवश्यक है। आधुनिक तकनीक ने दफ्तर की परिभाषा बदल दी है और अब कई कार्य कहीं से भी संचालित किए जा सकते हैं। सरकार का उद्देश्य कर्मचारियों को सुविधा देने के साथ-साथ राजधानी की समस्याओं का समाधान निकालना भी है। राज्य सरकार के अनुसार इस व्यवस्था से कर्मचारियों को कई लाभ मिल सकते हैं। रोजाना लंबी दूरी तय कर कार्यालय पहुँचने में लगने वाला समय बचेगा, जिससे मानसिक तनाव कम होगा और पारिवारिक जीवन के लिए अधिक समय मिल सकेगा। इसके अलावा महिलाओं और दिव्यांग कर्मचारियों के लिए यह व्यवस्था विशेष रूप से लाभकारी मानी जा रही है। सरकारी कार्यालयों में डिजिटल फाइल प्रणाली को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि कागज के उपयोग में कमी लाई जा सके। ऊर्जा संरक्षण अभियान के तहत सरकारी भवनों में बिजली की बचत पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन देने और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।हालांकि इस योजना को लागू करने में चुनौतियाँ भी कम नहीं हैं। सभी विभागों में “वर्क फ्रॉम होम” संभव नहीं है। पुलिस, स्वास्थ्य, परिवहन और फील्ड से जुड़े विभागों में कर्मचारियों की प्रत्यक्ष उपस्थिति आवश्यक रहती है। इसके अलावा साइबर सुरक्षा, डेटा गोपनीयता और ऑनलाइन निगरानी जैसी चुनौतियाँ भी सामने आ सकती हैं।कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि घर से काम करने की व्यवस्था लंबे समय तक जारी रहने पर टीम भावना और प्रत्यक्ष संवाद प्रभावित हो सकता है। इसलिए संतुलित हाइब्रिड मॉडल अपनाना जरूरी होगा, जिसमें कार्यालय और घर दोनों से कार्य करने की व्यवस्था हो।राजनीतिक दृष्टि से भी इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दिल्ली जैसे महानगर में प्रदूषण और ट्रैफिक सबसे बड़े मुद्दों में शामिल हैं। ऐसे में सरकार का यह कदम आम नागरिकों को राहत देने और आधुनिक प्रशासनिक सोच प्रस्तुत करने का प्रयास माना जा रहा है।दिल्ली सरकार ने संकेत दिए हैं कि योजना को पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाएगा। इसके परिणामों की समीक्षा के बाद इसे व्यापक स्तर पर लागू करने पर निर्णय लिया जाएगा। यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो भविष्य में निजी क्षेत्र को भी इस दिशा में प्रोत्साहित किया जा सकता है।

कुल मिलाकर दिल्ली सरकार का सप्ताह में दो दिन “वर्क फ्रॉम होम” का प्रस्ताव केवल कार्य प्रणाली में बदलाव नहीं, बल्कि राजधानी की जीवनशैली और प्रशासनिक ढांचे में आधुनिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह व्यवस्था दिल्ली की ट्रैफिक और प्रदूषण समस्या को कम करने में कितनी सफल होगी, यह उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना सफल होती है तो दिल्ली देश के अन्य राज्यों के लिए उदाहरण बन सकती है। दुनिया के कई विकसित देशों में हाइब्रिड कार्य प्रणाली तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इससे कार्यालयों पर खर्च कम होता है और कर्मचारियों की उत्पादकता भी बढ़ती है।