महंगाई की मार , जनता लाचार

Hit by inflation, people helpless

अशोक भाटिया

मई 2026 में भारत में थोक महंगाई दर (WPI) बढ़कर 8।30% के उच्च स्तर पर पहुंच गई है, जिसने 42 महीने का रिकॉर्ड तोड़ा है। रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल और सब्जियों की बढ़ती कीमतों ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। खाद्य पदार्थों में बेतहाशा वृद्धि से घरेलू बजट पूरी तरह से बिगड़ गया है, जिससे आम आदमी परेशान है।

गौरतलब है कि पश्चिम एशिया संकट के बीच जिसका डर था वो हो गया। उसके बाद महंगाई डायन ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। आम आदमी पर दूध के बाद अब सीएनजी और पेट्रोल-डीजल वाली महंगाई की मार पड़ी है। जी हां, ईंधन संकट की आहट के बीच अब पेट्रोल-डीजल और सीएनजी की कीमतों में बड़ा इज़ाफा हो गया है। जिस बात को लेकर आशंका जताई जा रही थी, वह शुक्रवार को सच हो गया। पेट्रोल-डीजल के दाम में करीब तीन रुपए से अधिक की बढ़ोतरी हो गई है। वहीं, सीएनजी के दाम भी बढ़ गए हैं। जी हां, महंगाई से जूझ रहे आम आदमी को पिछले 48 घंटे में एक के बाद एक तीन बड़े झटके लगे हैं। पहले दूध के दाम बढ़े, फिर मुंबई में CNG महंगी हुई और अब पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो गई है। इतना ही नहीं, अब देशभर में भी सीएनजी के दाम में दो रुपए की बढ़ोतरी हो गई है। लगातार बढ़ती कीमतों ने घर के बजट पर नया दबाव डाल दिया है। रसोई से लेकर सफर तक हर चीज महंगी होती नजर आ रही है, जिससे लोगों की चिंता बढ़ गई है।आज पेट्रोल ₹3।14 प्रति लीटर महंगा होकर ₹97।77 तक पहुंच गया है, जबकि डीजल ₹3।11 प्रति लीटर बढ़कर ₹90।67 हो गया है।

दरअसल ईरान जंग का असर पूरी दुनिया में दिख रहा है। भारत में महंगाई भी उसी का असर है। सबसे पहले परसों यानी बुधवार को दूध महंगा हुआ था। उसके ठीक बाद कल यानी गुरुवार को मुंबई में CNG के दाम बढ़ गए। अब आज यानी शुक्रवार को पेट्रोल-डीजल के रेट भी बढ़ गए हैं। इस तरह महज 48 घंटे में तीन बड़े झटके लगने से घरेलू बजट बिगड़ गया है। पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे, इसकी आशंका जताई जा रही थी। खुद सरकार भी इसे मान रही थी। तभी तो पीएम मोदी ने पेट्रोल-डीजल बचाने की लोगों से अपील की थी। वह खुद भी कम गाड़ियों वाले काफिले से चल रहे हैं। ऐसे में अब आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ना तय है।

पहला झटका तब लगा जब दूध कंपनियों ने कीमतों में इजाफा किया। अमूल, मदर डेयरी समेत कई बड़े ब्रांड्स ने दूध के दाम प्रति लीटर 2 रुपये तक बढ़ा दिए हैं। कंपनियों का कहना है कि पशुओं के चारे, ट्रांसपोर्ट और उत्पादन लागत बढ़ने की वजह से यह फैसला लेना पड़ा। लेकिन इसका सीधा असर आम परिवारों पर पड़ रहा है। दूध हर घर की जरूरत है और इसकी कीमत बढ़ने से चाय, दही, घी और मिठाई जैसी चीजें भी महंगी हो सकती हैं।

दूध की कीमत बढ़ने के बाद अब CNG के दाम भी बढ़ा दिए गए। पहले मुंबई में सीएनजी महंगी हुई, अब देशभर में हो गई है। एमजीएल यानी मुंबई गैस लिमिटेड ने CNG कीमत 2 रुपये बढ़ाकर 84 रुपये किलो कर दी। अब तो देश में 2 रुपए किलो सीएनजी महंगी हो गई। इसके बाद CNG से चलने वाले ऑटो, टैक्सी और निजी वाहनों का खर्च बढ़ गया है। माना जा रहा है कि इसका असर जल्द ही लोकल ट्रांसपोर्ट के किराए पर भी दिख सकता है। रोजाना सफर करने वाले लाखों लोगों के लिए यह बढ़ोतरी परेशानी बढ़ाने वाली है।

तीसरा झटका और सबसे तगड़ा झटका तब लगा जब अब पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी बढ़ोतरी ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। तेल कंपनियों की ओर से जारी नई कीमतों के बाद कई शहरों में पेट्रोल और डीजल महंगे हो गए हैं। पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का असर सिर्फ वाहन चलाने वालों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर हर चीज पर पड़ता है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से सब्जियों, राशन और रोजमर्रा के सामान की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।

हालांकि, पेट्रोल-डीजल के दाम में अभी और बढ़ोतरी होने की आशंका थी कारण कि पश्चिम एशिया और होर्मुज का संकट टला नहीं है। अगर पश्चिम एशिया में स्थिति ऐसी ही रही तो आगे और बढ़ोतरी हो सकती है। पेट्रोल-डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट का खर्चा बढ़ेगा, जिससे सब्जी, फल, अनाज जैसी रोजमर्रा की चीजें भी महंगी हो जाएंगी। डीजल पर निर्भर ट्रक, बस और ट्रैक्टर प्रभावित होंगे। बढ़ती महंगाई खासतौर पर मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों के लिए यह स्थिति मुश्किल पैदा कर रही है।

सरकार और कंपनियों की ओर से बढ़ी कीमतों के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार, कच्चे तेल की कीमत और बढ़ती लागत को वजह बताया जा रहा है। तेल कंपनियां पश्चिम एशिया संकट के कारण घाटे में चल रही है। होर्मुज बंद होने से सप्लाई चेन प्रभावित हो गया है। इस वजह से दाम बढ़े हैं। लेकिन आम लोगों के लिए इससे राहत की कोई खबर फिलहाल नजर नहीं आ रही। अब लोगों के मन में सवाल है कि क्या अब एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ेंगे?

इसके अलावा शायद ही कोई ऐसी वस्तु हो, जो महंगाई के दायरे से बाहर नजर आ रही हो। पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस के अलावा खाने-पीने के सामान से लेकर फल-सब्जियां तक महंगा हो गयी है। इसका सबसे ज्यादा असर मध्यवर्ग से लेकर गरीब तबके तक पर साफ नजर आ रहा है। हालात जिस तरह के बने हुए हैं उससे तो लगता नहीं कि हाल-फिलहाल महंगाई से कोई राहत मिल पाएगी। जहां तक सवाल है पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम बढ़ने का, तो इस मामले में सरकार बार – बार कह रही है कि यह विदेशी बाजार में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के दाम बढ़ने का नतीजा है। ऐसे में उसके हाथ में कुछ नहीं है। जाहिर है, महंगाई अपनी रफ्तार से बढ़ेगी और आम आदमी को ही इसका बोझ ढोना होगा।

वैसे महंगाई बढ़ना अर्थव्यवस्था के लिए कोई खराब संकेत नहीं होता। महंगाई बढ़ने का एक मतलब यह भी है कि बाजार में मांग बढ़ रही है, इसलिए चीजें मंहगी हो रही हैं। लेकिन यह तब तक ही अच्छा है जब खर्च करने के लिए लोगों के हाथ में पैसा हो और अर्थव्यवस्था मजबूत हो। पर अभी हालात ऐसे तो हैं नहीं। लोग महामारी से पैदा हालात खासतौर से आर्थिक संकट से उबरे भी नहीं हैं। पिछले डेढ़ साल में उद्योगों और बाजार पर महामारी का काफी बुरा असर पड़ा था । करोड़ों लोगों का कामधंधा चौपट हो गया था । आमदनी में भारी गिरावट जारी है।

असंगठित क्षेत्र का हाल तो और बुरा है। रोज कमाने-खाने वाले तबके के हालात कहीं ज्यादा चिंताजनक हैं। अभी भी लाखों लोगों के पास रोजगार नहीं है। ऐसे में लोगों के पास खर्च करने को पैसा आएगा कहां से? चिंता की बात इसलिए भी है कि भारत में महंगाई बिना मांग के बढ़ रही है। पूर्णबंदी के बाद शुरू हुए उद्योगों ने अपने उत्पादों के दाम बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसके पीछे तर्क उत्पादन लागत बढ़ने से ढुलाई तक के खर्च बढ़ने का दिया गया। इसके साथ ही पेट्रोल, डीजल के दाम तो लगातार बढ़ ही रहे हैं। देश के ज्यादातर शहरों में पेट्रोल एक सौ दस और डीजल सौ रुपए से ऊपर बिक रहा है। ऐसे में ढुलाई भी महंगी होती जा रही है। इसलिए हर चीज के दाम आसमान छू रहे हैं।

सवाल है कि महंगाई से राहत कैसे मिले? ऐसा नहीं है कि महंगाई पर काबू पाने के लिए सरकार के पास कोई उपाय बचे नहीं हैं। लंबे समय से यह मांग उठ रही है कि केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल और डीजल पर वसूले जाने करों को घटाएं। इससे इन उत्पादों के दाम नीचे आएंगे और फिर हर चीज के दाम पर उसका असर दिखना शुरू होगा। महंगाई को लेकर रिजर्व बैंक पहले ही चिंता जता चुका है और वह भी सरकार को पेट्रोल, डीजल पर लगने वाले करों में कटौती का सुझाव दे चुका है। हाल में रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने भी पेट्रोलियम उत्पादों पर लगने वाले करों में कटौती की जरूरत बताई है। हालांकि सरकार का तर्क है कि पेट्रोल-डीजल पर वसूले जा रहे करों से जो पैसा आ रहा है उसी से गरीबों के लिए कल्याणकारी योजनाएं चल रही हैं। लेकिन सवाल है कि अभी लोगों को महंगाई की और मार से कैसे बचाया जाए? आम लोगों पर महंगाई की मार के दूरगामी असर होते हैं, जो उन्हें गरीबी की ओर धकेलते हैं। इसलिए महंगाई काबू करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए, जो फिलहाल नजर आ नहीं रही।