तकनीक के युग में मजदूर अब भी मौत के मुहाने पर: व्यवस्था की असफलता ?

In the age of technology, workers are still on the verge of death: A failure of the system?

सुनील कुमार महला

मध्य प्रदेश और ओडिशा में हुए दो दर्दनाक हादसों ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि हमारे देश में आज भी गरीब और मजदूर वर्ग की सुरक्षा को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जाता। हाल ही में मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के बीहरपुवा गांव में कुआं खोदते समय मिट्टी धंसने से पांच लोगों की मौत हो गई। वहीं ओडिशा के कालाहांडी में सेप्टिक टैंक की जहरीली गैस के कारण छह लोगों ने अपनी जान गंवा दी। कहना ग़लत नहीं होगा कि ये दोनों हादसे केवल दुर्घटनाएं नहीं, बल्कि हमारी व्यवस्था की लापरवाही और असंवेदनशीलता का परिणाम हैं।हम सब यह जानते हैं कि आज विज्ञान और तकनीक का दौर है। बड़े-बड़े निर्माण कार्य और खतरनाक सफाई के काम मशीनों से किए जा सकते हैं। इसके बावजूद आज भी गरीब मजदूर अपनी जान जोखिम में डालकर ऐसे काम करने को मजबूर हैं। यदि कुएं की खुदाई और सेप्टिक टैंक की सफाई पूरी सुरक्षा व्यवस्था और मशीनों के माध्यम से की जाती, तो शायद इतनी जानें नहीं जातीं।

बहरहाल, यहां यह कहना भी ग़लत नहीं होगा कि यह घटना देश में पेयजल संकट की गंभीर स्थिति को भी सामने लाती है। आज भी कई गांवों और शहरों में लोगों को साफ पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। कई स्थानों पर भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है और हैंडपंप सूख चुके हैं। ऐसे में, मजबूरी में लोगों को गहरे कुएं और तालाबों पर निर्भर रहना पड़ता है। सोशल मीडिया पर अक्सर ऐसी तस्वीरें दिखाई देती हैं, जिनमें महिलाएं और बच्चियां अपनी जान जोखिम में डालकर गहरे कुंडों में उतरकर पानी भरती नजर आती हैं। अब यहां सवाल यह उठता है कि क्या यह स्थिति आधुनिक भारत के लिए चिंता का विषय नहीं है ?

आधुनिक दौर में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई का काम भी आज तक पूरी तरह सुरक्षित नहीं बन पाया है। सरकार द्वारा संसद में दिए गए आंकड़ों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में सैकड़ों सफाईकर्मियों की मौत जहरीली गैस के कारण हो चुकी है। वास्तव में, यह साफ दर्शाता है कि सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम अब भी नहीं किए गए हैं। निस्संदेह, सरकार स्मार्ट सिटी और आधुनिक विकास योजनाओं पर काम कर रही है, लेकिन किसी भी सरकार का सबसे पहला कर्तव्य अपने नागरिकों को भोजन, साफ पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना होता है। यदि लोग सुरक्षित नहीं हैं, तो विकास अधूरा ही कहा जा सकता है।सबसे दुखद बात तो यह है कि ऐसी घटनाओं के बाद कुछ दिनों तक चर्चा होती है, मुआवजे की घोषणा होती है और फिर सब कुछ भुला दिया जाता है। जिम्मेदार अधिकारियों पर अक्सर कोई कठोर कार्रवाई नहीं होती। वास्तव में, यदि लापरवाही करने वालों को समय पर सख्त से सख्त सजा मिले और सुरक्षा नियमों का ईमानदारी से पालन हो, तभी ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।

अंत में यही कहूंगा कि आज जरूरत इस बात की है कि जल संरक्षण और सफाई से जुड़े सभी कार्य पूरी संवेदनशीलता और आधुनिक तकनीक के साथ किए जाएं। सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई पूरी तरह मशीनी बनाई जाए तथा मजदूरों को उचित प्रशिक्षण और सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाएं।तभी हम ऐसा अच्छा, सुरक्षित और संवेदनशील समाज बना पाएंगे, जहां अमीर-गरीब का भेद किए बिना हर इंसान की जान को समान महत्व दिया जाए और किसी को भी लापरवाही के कारण अपनी जान न गंवानी पड़े।