महेन्द्र तिवारी
भारत ने वैश्विक वित्तीय सुरक्षा और आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ चल रही अंतरराष्ट्रीय लड़ाई में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। पहली बार किसी भारतीय अधिकारी को वित्तीय कार्रवाई कार्यबल के उपाध्यक्ष पद पर चुना गया है। 1994 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी विवेक अग्रवाल जुलाई 2026 से जून 2027 तक इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी संभालेंगे। वर्तमान में वह भारत सरकार के संस्कृति सचिव हैं। पेरिस में आयोजित संस्था की पूर्ण बैठक में सदस्य देशों ने उन्हें इस पद के लिए चुना। यह केवल एक प्रशासनिक नियुक्ति नहीं है, बल्कि वैश्विक वित्तीय शासन व्यवस्था में भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा और प्रभाव का प्रमाण भी है।
यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि भारत 2010 से इस संस्था का सदस्य है, लेकिन पिछले 16 वर्षों में किसी भारतीय को इसके शीर्ष नेतृत्व में स्थान नहीं मिला था। अब पहली बार भारत संस्था के सर्वोच्च नेतृत्व ढांचे का हिस्सा बनेगा और उसकी नीतियों तथा प्राथमिकताओं को आकार देने में प्रत्यक्ष भूमिका निभाएगा। यह भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति, वित्तीय संस्थागत क्षमता और वैश्विक विश्वसनीयता का संकेत माना जा रहा है।
वित्तीय कार्रवाई कार्यबल विश्व स्तर पर धनशोधन, आतंकवाद के वित्तपोषण और सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार से जुड़े वित्तीय नेटवर्कों के खिलाफ मानक निर्धारित करने वाली प्रमुख संस्था है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली का दुरुपयोग अपराधी, आतंकवादी संगठन और अवैध नेटवर्क न कर सकें। यह संस्था सदस्य देशों की नीतियों और कानूनों का मूल्यांकन करती है तथा आवश्यक सुधारों की सिफारिश करती है। इसके निर्णयों का प्रभाव वैश्विक बैंकिंग व्यवस्था, विदेशी निवेश, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आर्थिक विश्वसनीयता पर पड़ता है।
विवेक अग्रवाल की नियुक्ति उनके लंबे प्रशासनिक अनुभव और वित्तीय अपराधों से निपटने में उनकी विशेषज्ञता का परिणाम मानी जा रही है। वह पहले इस संस्था में भारत के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त वे भारत की वित्तीय खुफिया इकाई के निदेशक भी रह चुके हैं। वित्तीय खुफिया इकाई का कार्य संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की निगरानी करना, धनशोधन से जुड़े मामलों की पहचान करना और विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करना होता है। इस अनुभव ने उन्हें वैश्विक वित्तीय सुरक्षा के जटिल मुद्दों को समझने और समाधान विकसित करने की क्षमता प्रदान की।
भारत के लिए यह उपलब्धि केवल प्रतिष्ठा का विषय नहीं है बल्कि रणनीतिक महत्व भी रखती है। पिछले एक दशक में भारत ने धनशोधन और आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ अपने कानूनी और संस्थागत ढांचे को मजबूत किया है। धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत जांच एजेंसियों ने अनेक मामलों का खुलासा किया है। वित्तीय लेनदेन की निगरानी के लिए तकनीकी प्रणालियों को सशक्त बनाया गया है। डिजिटल भुगतान प्रणाली के विस्तार के साथ सुरक्षा मानकों को भी लगातार बेहतर किया गया है। इन प्रयासों के कारण भारत को वैश्विक स्तर पर एक जिम्मेदार और सक्षम साझेदार के रूप में देखा जाने लगा है।
वर्ष 2024 में भारत के मूल्यांकन के दौरान संस्था ने भारत के धनशोधन और आतंकवाद वित्तपोषण विरोधी ढांचे की सराहना की थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत ने प्रभावी परिणाम प्राप्त करने वाला ढांचा विकसित किया है। यही कारण है कि आज भारत को केवल एक सदस्य देश के रूप में नहीं बल्कि नीति निर्माण में योगदान देने वाले नेतृत्वकारी देश के रूप में देखा जा रहा है।
उपाध्यक्ष का पद संस्था की कार्यप्रणाली में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। उपाध्यक्ष अध्यक्ष के साथ मिलकर संस्था के एजेंडा, बैठकों, प्राथमिकताओं और वैश्विक रणनीतियों को आगे बढ़ाने में सहयोग करता है। सदस्य देशों के बीच सहमति निर्माण, नई चुनौतियों पर नीति निर्धारण और वैश्विक वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। विवेक अग्रवाल इस जिम्मेदारी के साथ उन विषयों पर भी काम करेंगे जो तेजी से बदलती डिजिटल अर्थव्यवस्था और नई वित्तीय तकनीकों से जुड़े हैं।
आज दुनिया के सामने केवल पारंपरिक धनशोधन की चुनौती नहीं है। आभासी परिसंपत्तियां, सीमा पार डिजिटल लेनदेन, साइबर अपराध, ऑनलाइन धोखाधड़ी और आतंकवादी नेटवर्कों की बदलती रणनीतियां नई चिंताएं पैदा कर रही हैं। भारत ने एक ओर डिजिटल भुगतान को व्यापक बनाया है तो दूसरी ओर सुरक्षा और निगरानी के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। यही अनुभव अब वैश्विक स्तर पर नीति निर्माण में उपयोगी साबित हो सकता है।
भारत की एक और विशेषता यह है कि उसने वित्तीय समावेशन और वित्तीय सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया है। जनधन खातों, आधार आधारित पहचान प्रणाली और डिजिटल भुगतान तंत्र ने करोड़ों लोगों को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ा है। साथ ही वित्तीय अपराधों की रोकथाम के लिए निगरानी तंत्र को भी मजबूत किया गया है। यह मॉडल अनेक विकासशील देशों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहा है। भारत की बढ़ती भूमिका इस अनुभव को वैश्विक मंच पर साझा करने का अवसर प्रदान करेगी।
यह नियुक्ति भारत की विदेश नीति के लिए भी महत्वपूर्ण है। आज आर्थिक कूटनीति और वित्तीय सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। किसी देश की विश्वसनीयता केवल उसकी सैन्य शक्ति से नहीं बल्कि उसकी वित्तीय प्रणाली की मजबूती और पारदर्शिता से भी आंकी जाती है। भारत लंबे समय से आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ कठोर वैश्विक कार्रवाई की वकालत करता रहा है। ऐसे में इस संस्था के शीर्ष नेतृत्व में भारत की उपस्थिति उसकी आवाज को और अधिक प्रभावशाली बनाएगी।
अक्सर यह चर्चा होती है कि इस संस्था की निगरानी सूची में शामिल होने का किसी देश पर कितना प्रभाव पड़ता है। जिन देशों को बढ़ी हुई निगरानी के दायरे में रखा जाता है, उन्हें विदेशी निवेश, अंतरराष्ट्रीय ऋण और वैश्विक वित्तीय लेनदेन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए दुनिया के अधिकांश देश संस्था के मानकों को गंभीरता से लेते हैं। यही कारण है कि इसके नेतृत्व में स्थान प्राप्त करना किसी भी देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है।
विवेक अग्रवाल की नियुक्ति को भारत सरकार ने एक बड़ी उपलब्धि बताया है। विदेश मंत्रालय ने इसे भारत की सफलता करार दिया और कहा कि यह वैश्विक आतंकवाद वित्तपोषण नेटवर्कों के खिलाफ भारत की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है। यह नियुक्ति इस बात का भी संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय भारत की संस्थागत क्षमता और उसके अनुभव पर भरोसा करता है।
स्वयं विवेक अग्रवाल ने भी इस नियुक्ति को भारत के सामूहिक प्रयासों की मान्यता बताया है। उनके अनुसार यह भारत के धनशोधन और आतंकवाद वित्तपोषण विरोधी ढांचे की मजबूती का प्रमाण है। उन्होंने वैश्विक वित्तीय प्रणाली को सुरक्षित, समावेशी और लचीला बनाने के लिए सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है।
जुलाई 2026 से शुरू होने वाला उनका कार्यकाल ऐसे समय में होगा जब दुनिया तेजी से बदलते वित्तीय परिदृश्य का सामना कर रही है। डिजिटल अर्थव्यवस्था का विस्तार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित वित्तीय सेवाएं, सीमा पार भुगतान प्रणाली और नए प्रकार के साइबर खतरे नीति निर्माताओं के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं। इन परिस्थितियों में भारत का अनुभव और नेतृत्व वैश्विक वित्तीय सुरक्षा को नई दिशा दे सकता है।
अंततः विवेक अग्रवाल का उपाध्यक्ष चुना जाना केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं बल्कि भारत की संस्थागत परिपक्वता, आर्थिक विश्वसनीयता और वैश्विक प्रभाव का प्रतीक है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारत अब केवल अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने वाला देश नहीं रह गया है, बल्कि उन नियमों के निर्माण और दिशा निर्धारण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने लगा है। वैश्विक वित्तीय सुरक्षा, धनशोधन पर नियंत्रण और आतंकवाद के वित्तपोषण के विरुद्ध संघर्ष में भारत की यह नई जिम्मेदारी आने वाले वर्षों में उसकी अंतरराष्ट्रीय स्थिति को और अधिक मजबूत बनाने वाली सिद्ध हो सकती है।





