जल संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक पहल, के.के. गुप्ता के प्रयासों पर राजस्थान सरकार ने जारी किए दिशा-निर्देश

Historic initiative towards water conservation: Rajasthan government issues guidelines following K.K. Gupta's efforts

  • तालाबों के कायाकल्प, भू-जल स्तर सुधार और शहरी वाटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा देने की पहल
  • मुख्यमंत्री को भेजे पत्र पर राजस्थान नदी बेसिन एवं जल संसाधन योजना प्राधिकरण ने लिया संज्ञान

नीति गोपेन्द्र भट्ट

नई दिल्ली/जयपुर/उदयपुर : राजस्थान में लगातार गिरते भू-जल स्तर को सुधारने, पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण और भविष्य की जल सुरक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है।

स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के ब्राण्ड एम्बेसडर एवं स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के समन्वयक के.के. गुप्ता द्वारा प्रदेश में जल संरक्षण को लेकर मुख्यमंत्री महोदय को भेजे गए सुझावात्मक पत्र पर राजस्थान सरकार के राजस्थान नदी बेसिन एवं जल संसाधन योजना प्राधिकरण ने गंभीरता से संज्ञान लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

जल संरक्षण को लेकर गुप्ता द्वारा उठाए गए मुद्दों में ग्रामीण क्षेत्रों के पारंपरिक तालाबों का पुनर्जीवन, जल आवक मार्गों को अतिक्रमण मुक्त करना, जल स्रोतों की स्वच्छता और शहरी क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन को अनिवार्य रूप से प्रभावी बनाने जैसे महत्वपूर्ण सुझाव शामिल रहे है।

तालाबों के संरक्षण और पुनर्जीवन पर जोर

राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित तालाबों के संरक्षण के लिए उनकी नियमित साफ-सफाई, कटीली झाड़ियों एवं अनावश्यक वनस्पतियों को हटाने, जल आवक मार्गों को व्यवस्थित करने और अतिक्रमण मुक्त करने पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई। इसके साथ ही तालाबों का वैज्ञानिक तरीके से सीमांकन करने, उनकी पालों को मजबूत बनाने तथा सीपेज रोकने के उपाय करने पर भी जोर दिया गया, जिससे वर्षा जल का अधिकतम संरक्षण हो सके और पानी का अनावश्यक बहाव रोका जा सके।

जल प्रदूषण रोकने की दिशा में पहल

के.के. गुप्ता ने अपने पत्र में ग्रामीण जल स्रोतों को प्रदूषण मुक्त रखने का भी महत्वपूर्ण सुझाव दिया। उन्होंने तालाबों में गांवों का गंदा पानी मिलने से रोकने की आवश्यकता बताई, ताकि इन जल स्रोतों का उपयोग पशुओं, कृषि और अन्य आवश्यकताओं के लिए सुरक्षित रूप से किया जा सके।

शहरी क्षेत्रों में वाटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा

बढ़ते शहरीकरण और घटते भू-जल स्तर को देखते हुए शहरों में वर्षा जल संचयन प्रणाली को प्रभावी रूप से लागू करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। छतों से आने वाले वर्षा जल को फिल्टर के माध्यम से सीधे जमीन में पहुंचाने से भू-जल स्तर में वृद्धि होगी और पानी में बढ़ रही टीडीएस की मात्रा को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।

जल है तो कल है के संकल्प को मिलेगी मजबूती

जल संरक्षण के इस अभियान का उद्देश्य केवल वर्तमान जल संकट का समाधान करना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करना है। राजस्थान जैसे जल संकट प्रभावित प्रदेश में यह पहल मुख्यमंत्री जल संचय योजना और स्वजल योजना को भी मजबूती प्रदान करने वाली मानी जा रही है।

गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2015 से 2020 तक नगर परिषद डूंगरपुर बोर्ड में उनके सभापति कार्यकाल के दौरान नगर में बनी हुई रियासत काल की बावड़ियों और कुओं की साफ, सफाई एवं गहराई कराई गई। जिससे प्रतिदिन 8 लाख लीटर पानी नियमित मिलने लगा जिसे नियमित जल विभाग को दिया गया। शहरवासियों की जल की समस्या का काफी हद तक निवारण हुआ। क्षेत्र में शहर की झील, तालाबों को गहरा एवं साफ करवाया जिससे वर्षा का पानी लम्बे समय एवं प्रचुर मात्रा में एकत्रित करने में सहायक सिद्ध हुआ। इसके साथ ही डूंगरपुर शहर में पेयजल के लिए प्रमुख स्रोत डिमिया तालाब और एडवर्ड संबंध तालाब को गहरा करने का कार्य भी किया गया।

सरकारी भवन और मकान को वाटर हार्वेस्टिंग प्रोजेक्ट से जोड़ा

गुप्ता ने बताया कि वर्षा ऋतु में प्राप्त जल नालियों में बहकर व्यर्थ ही चला जाता था जिसका संचय करके वर्षा जल धरती में उतरने के लिए हार्वेस्टिंग सिस्टम से जोड़ने का निर्णय किया। शहर के 100 सरकारी बिल्डिंगों व 500 घरों को वाटर हार्वेस्टिंग से जोडने का कार्य तीव्र गति से किया। जिसमें छतों का वर्षा का पानी वाटर हार्वेस्टिंग के द्वारा बोरिंग से सीधा धरती में उतारा तथा एक साल में ही धरती के पानी का स्तर 20 फीट बढ़ गया एवं जो पानी का टीडीएस पहले 840 तक था वह घटकर 570 पर आ गया। शहर के नकारा 100 हैण्डपम्पों को वाटर हार्वेस्टिंग से जोडा गया जो आज भरपूर पानी दे रहे है। वाटर हार्वेस्टिंग कार्य हर घर के लिए अनिवार्य एवं पुरानी मकानों में जहां एवरेज वाटर हार्वेस्टिंग में रूपये 16 हजार का प्रति घर खर्चा आता था नगर परिषद् द्वारा जिसने भी घर पर वाटर हार्वेस्टिंग लगाया उसको 50 प्रतिशत सब्सिडी दी गई अर्थात मात्र 8 हजार रूपयों में ही वाटर हार्वेस्टिंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई।

तत्कालीन केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री शेखावत द्वारा संसद में डूंगरपुर निकाय के कार्यों की प्रशंसा की गई

गुप्ता ने अवगत कराया कि गत 4 दिसंबर 2023 सोमवार को राज्यसभा सदन में एक तारांकित प्रश्न का उत्तर देते हुए तत्कालीन केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने अपने वक्तव्य में डूंगरपुर नगर परिषद का उल्लेख करते हुए कहा है कि “अटल भूजल योजना के माध्यम से हमने पहली बार देश में सप्लाई साइड से इतर हटकर के डिमांड साइड मैनेजमेंट पर काम करना प्रारंभ किया है उसका प्रभाव भी ऐसे सात प्रांत जहां चुनौती ज्यादा बड़ी थी वहां दिखाई देने लगा है। मैं एक उदाहरण माननीय चैयरमैन साहब आपके माध्यम से देना चाहता हूं कि अगर स्थानीय सरकार किसी शहर की तय करती है और वह अगर ग्राउंड वाटर रिलेटेड एक्टिविटीज रिचार्ज एक्टिविटीज पर काम करें। आज विज्ञान मानता है और 5 हजार वर्ष पूर्व भी हमारे लेखो में, पुस्तकों में, पुराणों में लिखा गया है की जमीन का पानी और सात का पानी, जमीन के भीतर का पानी और नदियों का पानी सब आपस में को रिलेटेड है। मेरे प्रदेश में डूंगरपुर शहर में तो जमीन का पानी ज्यादा उपयोग हो रहा था इसलिए वहां गैप सागर लेक सूख गई थी। नगर परिषद ने तय किया और तय करके हर एक घर के छत के ऊपर होने वाले रेन वाटर को डायरेक्टली ड्रॉयड अप हैंडपंप के साथ में जोड़ा एक छोटा सा फिल्टर लगा करके और उस पर काम करके प्रारंभ किया तो वहां का ग्राउंड वाटर रिचार्ज हुआ। इस प्रकार के इनिशिएटिव अगर सभी राज्यों में सभी शहरों में लिए जाएं तो उसके सकारात्मक परिणाम हो सकते हैं।”

गत वर्ष वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान में जिले के 100 तालाबों का जीर्णोद्धार किया गया

गुप्ता ने बताया कि राजस्थान प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा साहब द्वारा मोदी सरकार के जनकल्याण तथा पर्यावरण सुरक्षा कार्यक्रमों का अनुसरण करते हुए और उनके पद चिन्ह पर चलते हुए राजस्थान राज्य में भी पर्यावरण संरक्षण तथा जल संरक्षण के कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में गत 5 जून, 2025 को विश्व पर्यावरण दिवस एवं गंगादशमी के अवसर पर प्रदेशव्यापी ‘ वंदे गंगा’ जल संरक्षण- जन अभियान का शुभारंभ हुआ।

डूंगरपुर जिले के दस ब्लॉक में दस-दस मॉडल तालाब का चयन किया। चयनित तालाबों की तस्वीर बदलने और जल संचय की कल्पना को साकार करने के लिए ग्राम पंचायत में पडऩे वालों तालाबों पर प्रभारी नियुक्त किए,।तालाबों की जलभराव क्षमता बढ़ाने जलआवक मार्गो से अवरोध हटाएं जा रहे है, तालाब की डिसल्टिंग की गई, झांडियो की कटाई, पालों की मरम्मत और सौंदर्यकरण के कार्य किए