सुनील कुमार महला
प्रकृति के सामने इंसान की सारी आधुनिकता, तकनीक और विकास कई बार बेबस दिखाई देते हैं।इस क्रम में दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में 25 जून 2026 को आए भीषण भूकंप ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि प्राकृतिक आपदाएं किसी भी देश की व्यवस्था और विकास को कुछ ही क्षणों में चुनौती दे सकती हैं और मानव के वश में कुछ भी नहीं है। मीडिया में उपलब्ध खबरों के अनुसार गुरुवार सुबह केवल 40 सेकेंड के अंतराल में दो शक्तिशाली भूकंप आए। पहले भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 7.2 और दूसरे की 7.5 मापी गई। इसके बाद लगभग 20 आफ्टरशॉक भी महसूस किए गए। भूकंप का केंद्र राजधानी कराकास के पश्चिम में स्थित याराकुय राज्य में बताया गया। झटके इतने तेज थे कि पड़ोसी देश कोलंबिया तक महसूस किए गए। तटीय क्षेत्रों में सुनामी की चेतावनी जारी करनी पड़ी। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के अनुसार यह पिछले 126 वर्षों में वेनेजुएला का सबसे शक्तिशाली भूकंप माना जा रहा है।इस प्राकृतिक आपदा(शक्तिशाली भूकंप) ने भारी जन-धन की हानि पहुंचाई है। बड़ी संख्या में बहुमंजिला इमारतें भरभराकर ढह गईं। अनेक इलाके मलबे के ढेर में बदल गए और हजारों वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है तथा हजारों लोग घायल हुए हैं। बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। कई स्थानों पर मलबे के नीचे दबे लोगों के जीवित होने की आवाजें आने की खबरें हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि मृतकों की संख्या कई हजार तक पहुंच सकती है। मुख्य अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को भी नुकसान पहुंचा है, जिससे राहत और बचाव कार्यों में अतिरिक्त कठिनाइयां पैदा हो रही हैं। इस आपदा से वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था को लाखों करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने देश में आपातकाल घोषित कर राहत और बचाव कार्यों को युद्धस्तर पर चलाने के निर्देश दिए हैं। राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता से गुजर रहे वेनेजुएला के लिए यह आपदा एक बड़ी परीक्षा बनकर सामने आई है। दुनिया के सक्षम देशों, विशेष रूप से अमेरिका, को मानवीय आधार पर सहायता के लिए आगे आना चाहिए। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संवेदना व्यक्त करते हुए हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया है। कहना ग़लत नहीं होगा कि भारत सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय का सहयोग वेनेजुएला के पुनर्वास और पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हाल फिलहाल, यहां पाठकों को जानकारी देना चाहूंगा कि वेनेजुएला का क्षेत्रफल राजस्थान से लगभग 2.7 गुना बड़ा है, जबकि उसकी जनसंख्या पंजाब या हरियाणा के लगभग बराबर है। देश की लगभग 90 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती है। यही कारण है कि भूकंप से हुई तबाही अपेक्षाकृत अधिक गंभीर रही। सामान्यतः ग्रामीण क्षेत्र भूकंप के प्रभाव को अपेक्षाकृत बेहतर ढंग से झेल लेते हैं, जबकि घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में ऊंची इमारतें और अव्यवस्थित निर्माण बड़े पैमाने पर जनहानि का कारण बनते हैं। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि भूकंप संभावित क्षेत्रों में भवन निर्माण के दौरान उच्चतम सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य होना चाहिए।
इसी संदर्भ में यह प्रश्न भी महत्वपूर्ण है कि क्या दुनिया में भूकंप की घटनाएं बढ़ रही हैं। यद्यपि इसका कोई निश्चित उत्तर नहीं है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि भूकंप संभावित क्षेत्रों में अधिक सतर्कता और बेहतर तैयारी की आवश्यकता है।एक उपलब्ध जानकारी के अनुसार विश्व में प्रतिवर्ष औसतन 7 या उससे अधिक तीव्रता के लगभग 16 भूकंप आते हैं, जिनमें से सामान्यतः एक भूकंप 8 या उससे अधिक तीव्रता का होता है। इसलिए संवेदनशील क्षेत्रों में ऐसे भवनों का निर्माण किया जाना चाहिए जो कम से कम 8 तीव्रता तक के भूकंपों को सहन करने में सक्षम हों। वेनेजुएला में पुनर्निर्माण के दौरान इस पहलू पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
यह त्रासदी केवल राहत और बचाव कार्यों तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि आपदा प्रबंधन की व्यापक समीक्षा का अवसर भी है।यह बात ठीक है कि प्राकृतिक आपदाओं को रोका नहीं जा सकता, लेकिन उनके प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके लिए भूकंपरोधी भवन निर्माण, प्रभावी चेतावनी प्रणाली, नियमित मॉक ड्रिल, जन-जागरूकता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विकास योजनाएं आवश्यक हैं। यहां यह भी कहना चाहूंगा कि भारत भी इस चुनौती से अछूता नहीं है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पूर्वोत्तर राज्य तथा पश्चिम बंगाल का दार्जिलिंग क्षेत्र भूकंप और भूस्खलन की दृष्टि से काफी संवेदनशील हैं। वहीं हर वर्ष बाढ़ और भूस्खलन जैसी आपदाएं लाखों लोगों को प्रभावित करती हैं।जापान इस दिशा में दुनिया के सामने एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। वहां बार-बार भूकंप आने के बावजूद मजबूत भवन निर्माण मानकों, उन्नत चेतावनी प्रणालियों और व्यापक जन-जागरूकता के कारण जनहानि को काफी हद तक नियंत्रित किया जाता है। भारत सहित अन्य देशों को भी इस अनुभव से सीख लेकर अपनी आपदा प्रबंधन व्यवस्थाओं को और अधिक मजबूत बनाना चाहिए।वेनेजुएला की त्रासदी पूरी दुनिया के लिए एक चेतावनी है कि प्रकृति के सामने विनम्र रहना और हर समय तैयार रहना ही सबसे बड़ा बचाव है। हर आपदा अपने साथ एक सबक लेकर आती है और यह आपदा भी हमें यही संदेश देती है कि विकास तभी सार्थक है जब वह सुरक्षित, वैज्ञानिक और प्रकृति के साथ संतुलित हो।





