लोकतंत्र के 75 स्वर्णिम वर्ष : राजस्थान विधानसभा के अमृत महोत्सव का ऐतिहासिक अध्याय

75 Golden Years of Democracy: A Historic Chapter in the Amrit Mahotsav of the Rajasthan Legislative Assembly

सात दशकों की संसदीय यात्रा एक ही छत के नीचे होगीं साकार

गोपेन्द्र नाथ भट्ट

राजस्थान विधानसभा अपनी लोकतांत्रिक यात्रा के 75 गौरवशाली वर्ष पर एक ऐसे ऐतिहासिक पड़ाव पर पहुँच गई है, जहाँ अतीत की गौरवशाली विरासत, वर्तमान की उपलब्धियाँ और भविष्य की नई संभावनाएँ एक साथ दिखाई देती हैं। यह केवल किसी विधायी संस्थान का कोई उत्सव नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधित्व, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनसेवा की उस सतत परंपरा का महोत्सव है जिसने आधुनिक राजस्थान के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाई है।

इस ऐतिहासिक अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने वर्षभर चलने वाले “अमृत महोत्सव” की घोषणा करते हुए इसे भारतीय संसदीय लोकतंत्र का एक अनूठा पर्व बताया है। आगामी 15 जुलाई से प्रारम्भ होने वाले इस महोत्सव का पहला आयोजन अनेक दृष्टियों से ऐतिहासिक होगा। उद्घाटन समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला तथा समापन सत्र में भारत के उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन की गरिमामयी उपस्थिति इसे राष्ट्रीय महत्व प्रदान करेगी।समारोह में राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े, पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एवं वसुंधरा राजे सहित प्रदेश के सभी प्रमुख राजनीतिक व्यक्तित्वों की उपस्थिति यह संदेश देगी कि लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, किंतु लोकतांत्रिक संस्थाओं के सम्मान में सभी एकजुट हैं। यह लोकतंत्र की परिपक्वता का भी प्रतीक है।

स्वतंत्रता के पश्चात देश में अपनाई गई गणतांत्रिक व्यवस्था के अन्तर्गत राजस्थान प्रदेश में 1952 में गठित हुई पहली विधानसभा से लेकर वर्तमान सोलहवीं विधानसभा (2023-28) तक के पूर्व एवं वर्तमान विधायक तथा राजस्थान के सभी सांसद एक ही मंच पर उपस्थित होंगे। लोकतांत्रिक इतिहास में ऐसे अवसर विरले ही आते हैं, जब सात दशकों की संसदीय यात्रा एक ही छत के नीचे साकार होती दिखाई दें। यह आयोजन केवल एक औपचारिक अभिनंदन समारोह नहीं होगा, बल्कि लोकतंत्र के अनुभवों का जीवंत और ऐतिहासिक दस्तावेज भी बनेगा। इसमें सदन की गरिमा, संसदीय परंपराओं, विधायी अनुभवों, लोकतांत्रिक चुनौतियों तथा विधानसभा के डिजिटल रूपांतरण जैसे समकालीन विषयों पर गंभीर विमर्श होगा। साथ ही लोकतंत्र के विकास में योगदान देने वाले पूर्व विधानसभा अध्यक्षों, उपाध्यक्षों तथा अनेक बार निर्वाचित वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों का सम्मान इस आयोजन का विशेष आकर्षण रहेगा।

राजस्थान विधानसभा का इतिहास वस्तुतः राजस्थान के विकास का एक गौरवपूर्ण अध्याय है। वर्ष 1952 से लेकर आज तक सदन ने ऐसे अनेक ऐतिहासिक कानून बनाए गए हैं , जिन्होंने प्रदेश की सामाजिक और आर्थिक संरचना को नई दिशा दी। भूमि सुधार एवं जागीर पुनर्ग्रहण से लेकर जमींदारी उन्मूलन, पंचायती राज व्यवस्था के सशक्तीकरण, प्राथमिक शिक्षा के विस्तार, लोकायुक्त व्यवस्था, सूचना के अधिकार और लोक सेवाओं की गारंटी जैसे कानूनों ने शासन को अधिक उत्तरदायी, पारदर्शी और जनोन्मुख बनाया। अमृत महोत्सव के दौरान ऐसे 23 ऐतिहासिक कानूनों पर विशेष चर्चा कर उनके दीर्घकालिक प्रभावों का विश्लेषण किया जाएगा। यह पहल नई पीढ़ी को यह समझाने का अवसर भी होगी कि विधायिकाएँ केवल कानून नहीं बनातीं, बल्कि समाज के भविष्य की दिशा भी निर्धारित करती हैं।अमृत महोत्सव का एक महत्वपूर्ण पक्ष विधानसभा की बदलती कार्य संस्कृति भी है। बीते वर्षों में डिजिटल तकनीक का समावेश, ई-विधान व्यवस्था, डिजिटल दस्तावेजीकरण,पेपर लेस कार्य पद्धति तथा आधुनिक संसदीय प्रक्रियाओं को अपनाकर राजस्थान विधानसभा ने स्वयं को नई तकनीक के अनुरूप विकसित किया है। परंपरा और आधुनिकता का यही संतुलन लोकतांत्रिक संस्थाओं की वास्तविक शक्ति है। साथ ही स्पीकर वासुदेव देवनानी ने भी कई नवाचार कर देश-दुनिया में राज्य का मान बढ़ाया है।

विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने यह भी स्पष्ट किया है कि अमृत महोत्सव केवल एक दिन का आयोजन नहीं होगा। अगले एक वर्ष तक संसदीय एवं संवैधानिक विषयों पर विशेष व्याख्यान, संगोष्ठियाँ, विचार-विमर्श और जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे जिसमें देश भर की निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों और युवाओं के कार्यक्रम भी शामिल होंगे। अमृत महोत्सव का समापन अगले वर्ष राजस्थान स्थापना दिवस पर होगा। इन आयोजनों में राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा अन्य राष्ट्रीय हस्तियों को भी आमंत्रित किया जा रहा है। इससे राजस्थान विधानसभा का अमृत महोत्सव राष्ट्रीय स्तर पर लोकतांत्रिक चेतना के एक महत्वपूर्ण आयोजन के रूप में स्थापित होगा। विशेष महत्व की बात यह भी है कि समारोह का सीधा प्रसारण विधानसभा के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर किया जाएगा, जिससे प्रदेश ही नहीं, देशभर के नागरिक इस ऐतिहासिक अवसर के सहभागी बन सकेंगे। लोकतांत्रिक संस्थाओं को जनता से जोड़ने की यह पहल समय की आवश्यकता भी है।

दरअसल, राजस्थान विधानसभा की 75 वर्षों की यात्रा केवल मात्र राजनीतिक घटनाओं का क्रम नहीं है; बल्कि यह जनविश्वास, सामाजिक परिवर्तन, विकास और संवैधानिक मूल्यों की निरंतर आगे बढ़ती एक कहानी है। अमृत महोत्सव उसी कहानी का उत्सव है,एक ऐसा उत्सव जो अतीत के गौरव को नमन करता है, वर्तमान की उपलब्धियों का अभिनंदन करता है और भविष्य के लोकतांत्रिक भारत के लिए नए संकल्पों का मार्ग प्रशस्त करता है। यही इस ऐतिहासिक आयोजन का सबसे बड़ा संदेश भी माना जा रहा है।