दीपक कुमार त्यागी
- केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी बोले शिक्षा, कौशल और पर्यावरण संरक्षण से बनेगा विकसित भारत।
- केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान का उल्लेख करते हुए सभी से पौधारोपण करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी माँ के सम्मान में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसका संरक्षण भी करें।
बागपत : राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं भारत सरकार के केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा शिक्षा राज्य मंत्री चौधरी जयंत सिंह ने जनपद बागपत के राजकीय हाईस्कूल, मवी कलां में विद्यालय के उच्चीकरण एवं इंटरमीडिएट भवन निर्माण कार्य का शिलान्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों तथा समाज के बुद्धिजीवी नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी क्षेत्र के विकास की सबसे मजबूत नींव गुणवत्तापूर्ण शिक्षा होती है और बागपत की प्रगति के लिए शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर निवेश एवं विकास आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि इस विद्यालय के उच्चीकरण का कार्य स्थानीय ग्रामीणों के सामूहिक प्रयास, जागरूकता और शिक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का परिणाम है। जब समाज स्वयं शिक्षा के लिए आगे आता है, तब विकास के नए द्वार खुलते हैं और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य मजबूत होता है।
चौधरी जयंत सिंह ने कहा कि विद्यालय केवल पढ़ाई का स्थान नहीं, बल्कि समाज की सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक संस्था है। समाज की आशाएँ और भविष्य स्कूलों से जुड़े होते हैं। इसलिए विद्यालयों में बेहतर आधारभूत सुविधाएँ, योग्य शिक्षक, आधुनिक शिक्षण व्यवस्था और प्रेरणादायक वातावरण उपलब्ध कराना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि विकास के कार्य प्रत्येक क्षेत्र के लिए आवश्यक हैं, लेकिन यदि बागपत की क्षमता और सामर्थ्य को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाना है तो शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। शिक्षा ही वह माध्यम है जो व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करती है।
अपने संबोधन में उन्होंने विद्यार्थियों को राष्ट्र का भविष्य बताते हुए कहा कि बच्चों के चेहरे पर मुस्कान बनी रहनी चाहिए। उन्हें ऐसा वातावरण मिलना चाहिए जहाँ वे बिना किसी भय के सीख सकें, आगे बढ़ सकें और अपने सपनों को साकार कर सकें।
उन्होंने नई शिक्षा व्यवस्था में अनुभव आधारित शिक्षा की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि आज केवल पुस्तक आधारित ज्ञान पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को व्यवहारिक अनुभव, प्रयोगात्मक शिक्षा और वास्तविक जीवन से जुड़े कौशल भी प्रदान किए जाने चाहिए ताकि वे भविष्य की चुनौतियों का आत्मविश्वास के साथ सामना कर सकें।
केंद्रीय मंत्री ने विद्यालयों में पुस्तकालयों के महत्व पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यालय में समृद्ध पुस्तकालय होना चाहिए, क्योंकि पुस्तकें विद्यार्थियों की सोच का विस्तार करती हैं, जिज्ञासा को बढ़ाती हैं और आजीवन सीखने की आदत विकसित करती हैं।
उन्होंने कहा कि बदलते समय में शिक्षा को कौशल विकास से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। विद्यार्थियों को ऐसी शिक्षा मिले जो उन्हें रोजगार, उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाए। यही विकसित भारत के निर्माण की मजबूत आधारशिला होगी।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान का उल्लेख करते हुए सभी से पौधारोपण का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी माँ के सम्मान में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसका संरक्षण भी करे। पर्यावरण संरक्षण केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनकी देखभाल और संरक्षण भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि हरित पर्यावरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कौशल सम्पन्न युवा ही आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत की पहचान होंगे।





