रंग-मल्हार 2026 में डॉ पारुल तोमर की सहभागिता

Dr. Parul Tomar's participation in Rang-Malhar 2026

रविवार दिल्ली नेटवर्क

वरिष्ठ चित्रकार आदरणीय विद्यासागर उपाध्याय की संकल्पना पर आधारित तथा राजस्थान ललित कला अकादमी, आईसीएएफ गैलरी और ‘धोरा’ के सहयोग से 12 जुलाई 2026 को आयोजित देश के प्रतिष्ठित कला-आंदोलन ‘रंग-मल्हार 2026’ के 17वें संस्करण में साहित्यकार एवं चित्रकार डॉ. पारुल तोमर ने अपनी हस्तचित्रित कलाकृति के साथ सहभागिता की।

वर्ष 2009 में भीषण सूखे के समय अच्छी वर्षा की मंगलकामना के साथ प्रारम्भ हुआ यह अनूठा कला-उत्सव आज राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। प्रतिवर्ष जुलाई माह में आयोजित होने वाला यह आयोजन केवल चित्र प्रदर्शनी नहीं, बल्कि कलाकारों के लिए सृजन, संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक सशक्त मंच है। इसकी मूल भावना प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना तथा कला के माध्यम से सकारात्मक ऊर्जा, सांस्कृतिक चेतना और लोक-संस्कृति के संरक्षण का संदेश देना है।

रंग-मल्हार की एक विशिष्ट परम्परा यह भी है कि प्रत्येक वर्ष किसी उपयोगी वस्तु को कैनवास बनाकर कलाकार अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति प्रस्तुत करते हैं। इस वर्ष की थीम ‘संदूक’ निर्धारित की गई है।

भारतीय संस्कृति में संदूक केवल वस्तुओं को सुरक्षित रखने का साधन नहीं, बल्कि स्मृतियों, संस्कारों, रिश्तों और पीढ़ियों की अमूल्य धरोहर का प्रतीक रहा है। उसमें केवल वस्त्र ,आभूषण या पत्र ही नहीं, बल्कि परिवार की आत्मीयता, प्रेम और जीवन के अनगिनत संस्मरण भी सुरक्षित रहते हैं। इसी सांस्कृतिक भावभूमि को केंद्र में रखते हुए कलाकारों ने इस वर्ष संदूक को अपनी कल्पनाओं का कैनवास बनाया है।

इसी विषय को साकार करते हुए द्वारका निवासी डॉ. पारुल तोमर ने लकड़ी के एक साधारण आभूषण बॉक्स (Jewellery Box) को डॉर्क मैरून और सफेद ऐक्रेलिक रंगोसे भारतीय लोक-शैली के पारम्परिक अलंकरणों /रूपांकनों से अलंकृत किया। उनकी यह कलाकृति केवल एक सजावटी वस्तु का रूपांतरण नहीं, बल्कि भारतीय लोक-संस्कृति, स्त्री-स्मृतियों, पारिवारिक विरासत और सांस्कृतिक निरंतरता का कलात्मक रूपांकन है। रंगों और रेखाओं के माध्यम से उन्होंने एक साधारण लकड़ी के बॉक्स को स्मृतियों, संवेदनाओं और परम्पराओं के जीवंत ‘संदूक’ के रूप में रूपायित किया है।

इस अवसर पर डॉ. पारुल तोमर ने कहा कि “मेरे लिए यह आभूषण बॉक्स केवल एक कलात्मक वस्तु नहीं, बल्कि स्मृतियों का वह संदूक है जिसमें लोकजीवन, परिवार, परम्परा और आत्मीय संबंधों की सुगंध सुरक्षित है। रंग-मल्हार जैसे आयोजन कलाकारों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हुए कला को सामाजिक चेतना का माध्यम बनाते हैं।”

इस वर्ष जयपुर सहित राजस्थान के लगभग 23 शहरों तथा काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), वडोदरा, मुंबई , दिल्ली सहित अनेक नगरों में यह आयोजन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों स्वरूपों में आयोजित किया गया ।जिसमें देशभर के सैकड़ों कलाकार ने सहभागिता की ।

डॉ.पारुल तोमर ने इस प्रतिष्ठित आयोजन में सहभागी बनने का अवसर प्रदान करने के लिए आदरणीय विद्यासागर उपाध्याय, रंग-मल्हार परिवार तथा आयोजकों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।