- अनुभवी नवनीत व सविता को जू. खिलाड़ियों को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को प्रेरित करना होगा
- दीपिका सहरावत का बतौर ड्रैग फ्लिकर और स्ट्राइकर रोल अहम रहेगा
- पेनल्टी कॉर्नर पर गोल करने के साथ पेनल्टी कॉर्नर बचाना भी बेहद अहम
- ‘यशदीप खुल कर खेलेंगे विश्व कप में ’
‘जहां तक मेरे बेटे यशदीप सिवाच की बात है तो उसकी पुरुष हॉकी विश्व कप 2026 में भारतीय टीम में जिम्मेदारी ओवरलेप कर काउंटर पर गोल करने की है। उसे टीम में कप्तान हरमनप्रीत सिंह, हार्दिक सिंह, सुमित का मार्गदर्शन और राजिंदर सिंह सभी का सहयोग मिलेगा। मेरे बेटे यशदीप को मुझसे और अपने पिता कुलदीप से बचपन से बिना किसी दबाव के खुल कर हॉकी खेलने और पूरा लुत्फ उठाने का सबक मिला है। बेशक वह विश्व कप में खुल कर खेलेंगे और भारतीय टीम को विश्व कप में आगे तक ले जाने में भारतीय पुरुष हॉकी टीम को आगे तक ले जाने में मददगार बनेंगे।‘
सत्येन्द्र पाल सिंह
नई दिल्ली : पूर्व अंतर्राष्ट्रीय स्ट्राइकर और कप्तान 51 बरस की प्रीतम रानी सिवाच बतौर हॉकी खिलाड़ी भारत का नाम रोशन करने के बाद अब बतौर महिला हॉकी कोच अपनी प्रीतम सिवाच हॉकी एकेडमी के जरिए देश की हॉकी का भविष्य संवार रही हैं। 2002 में भारत को मैनचेस्टर में राष्ट्रमंडल खेलों में महिला हॉकी का स्वर्ण पदक जिताने में ममता खरब के साथ बतौर स्ट्राइकर प्रीतम सिवाच ने अहम भूमिका निभाई थी। भारतीय महिला हॉकी टीम की इसी कामयाबी पर चर्चित ‘ चक दे इंडिया’ जैसी चर्चित फिल्म बनी और इसमें शाहरुख खान ने कोच का अहम किरदार अदा किया था। प्रीतम सिवाच अकेडमी की पांच लड़कियां भी भारत की एफआईएच महिला हॉकी विश्व कप बेल्जियम और नीदरलैंड 2026 में शिरकत करने जा रही टीम में शामिल हैं। प्रीतम का बेटा बतौर मिडफील्डर भारत की पुरुष हॉकी विश्व कप में शिरकत करने वाली टीम की अहम कड़ी हैं। प्रीतम सिवाच की बेटी कणिका सिवाच भी भारत की जूनियर महिला हॉकी टीम की अहम सदस्या हैं। यह भी एक सुखद संयोग है कि वह खुद 1998 में उत्रेक्त (नीदरलैंड) में भारत के लिए महिला हॉकी विश्व कप में खेली थी तब टीम अपने चारों मैच कड़े और करीबी संघर्ष में हार कर अंतिम स्थान पर रही थी। भारतीय महिला हॉकी टीम की विश्व कप में संभावनाओं पर प्रस्तुत हैं प्रीतम सिवाच से हुई बातचीत।
भारत का अब तक महिला विश्व कप में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1974 में चौथा स्थान है और आप खुद 1998 के महिला हॉकी विश्व कप में उत्रेक्त (नीदरलैंड) में देश की नुमाइंदगी कर चुकी हैं। इस बार महिला हॉकी विश्व कप में कहां तक जाएगी भारत की चुनौती?
मैं 1998 में आखिरी बार भारत के लिए महिला विश्व कप में खेली थी और तब हमारी टीम अपने सभी मुकाबले करीब संघर्ष में हार कर संदीप कौर की कप्तानी में आखिरी स्थान पर रही थी। 2026 के विश्व कप भारतीय महिला हॉकी टीम में चुनी गई अनुभवी नवनीत कौर, सुशीला चानू, खुद कप्तान सलीमा टेटे और अनुभवी गोलरक्षक सविता को टीम की नई और नौजवान खिलाडियों को साथ ले उनका मार्गदर्शन कर उन्हें अपना सर्वश्रेष्ठ देने को प्रेरित करना होगा। हमारी भारतीय टीम अनुभवी और नौजवान खिलाड़ियों की मिली जी खासी संतुलित है। बेशक हमारी टीम के कोच शुएर्ड मराइन के पास महिला हॉकी विश्व कप के अच्छी योजना भी होगी। हमारी मौजूदा टीम की अनुभवी खिलाड़ियों को टीम की नौजवान और जूनियर खिलाड़ियों को साथ लेकर चलना होगा। भारत को महिला हॉकी विश्व कप में पदक जीतने के लिए किले की मजबूती से चौकसी के साथ पूरी शिद्दत से मैदान खेल कर अपना सर्वश्रेष्ठ देना होगा। भारतीय महिला हॉकी टीम का पहला लक्ष्य बेशक क्वॉर्टर फाइनल में पहुंचना होना चाहिए और वे इसमें सक्षम भी दिखाई देती हैं। हमारी भारतीय टीम क्वॉर्टर फाइनल में पहुंची बेशक हॉकी विश्व कप में पदक जीतने में भी कामयाब रहेगी। मेरी प्रीतम सिवाच हॉकी एकेडमी की पांच लड़कियां- नेहा, साक्षी राणा, ज्योति,शिल्पी डबास और इशिका भारत की महिला हॉकी विश्व कप में शिरकत करने जा रही टीम का हिस्सा हैं। मुझे अपनी इन पांचों के साथ भारतीय टीम के लिए विश्व कप में कामयाबी की नई कहानी लिखने का भरोसा है। नवनीत कौर जैसी स्ट्राइकर, मिडफील्डर ललरेमिसयामी व कप्तान सलीमा टेटे व सविता को टीम की ज्योति, शिल्पी और इशिका जैसी खिलाडियों का साथ लेकर चलना होगा।‘
भारत को महिला हॉकी विश्व कप में पूल डी में चीन व इग्लैंड जैसी दुनिया की धुरंधर टीमों व दक्षिण अफ्रीका की चुनौती पार करने के लिए क्या करना होगा?
आज मॉडर्न यानी नए जमाने की हॉकी बिल्कुल बदल गई है। आज के जमाने में गोल करने से कहीं ज्यादा अहम है अपने किले की मुस्तैदी से चौकसी। भारतीय टीम की रक्षापंक्ति में अनुभवी फुलबैक सुशीला चानू और गोलरक्षक सविता सहित सभी को यह कोशिश करनी चाहिए कि प्रतिद्वंद्वी टीम को कम से कम से पेनल्टी कॉर्नर लेने दें। आज सभी टीमें एक दूसरे की मजबूत चौकसी कर खेलने उतरती हैं और इसीलिए मैदानी गोल के मौके आज बहुत कम हो जाते हैं। सच तो यह है कि पेनल्टी कॉर्नर बनाने और इस पर गोल करने के साथ पेनल्टी कॉर्नर बचाना ही मैचों के फैसलों में अहम रहेगा । आज चाहे कोई चीन, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका सभी स्ट्रक्चर और योजना से खेलेंगी और कोई भी कमजोर नहीं है। महिला हॉकी विश्व कप में जो भी टीम स्ट्रक्चर और योजना से खेलेगी, पेनल्टी कॉर्नर बना इसे भुनाएंगी और पेनल्टी कॉर्नर पर मुस्तैदी से अपने किले की चौकसी करेगी वही उपर जाएगी। हमारी भारतीय टीम को मिले मौकों चाहे वह पेनल्टी कॉर्नर हो या मैदानी गोल, हर को भुनाना होगा। हमारे चीन और इंग्लैंड के खिलाफ मैच खासे संघर्षपूर्ण रहे हैं। बस जरूरी है इन सभी के खिलाफ जीतना है तो मौकों को भुनाना होगा। विश्व कप में पूल डी मे चीन के खिलाफ अपने किले की चौकसी, इग्लैंड के खिलाफ जवाबी हमलों और डिफेंस में कम से कम गलतियां करनी होगी। पेनल्टी कॉर्नर बना इन्हें भुनाने के साथ प्रतिद्वंदवी टीम के पेनल्टी कॉर्नर को रोकना होगा। चीन के पास खतरनाक ड्रैग फ्लिकर हैं और उसके खिलाफ गोल करने से पहले हमें अपने किले की मुस्तैदी से चौकसी करनी होगी। भारतीय महिला हॉकी टीम के पूर्व कोच ओलंपियन कर्नल बलबीर सिंह कहते थे मॉडर्न में कामयाबी के लिए जरूरी है पहले अपने घर को जलने (गोल खाने) से बचाना क्योंकि हम अपना घर बचाने में सफल रहे तो फिरप्रतिद्वंद्वी के घर को जला (गोल कर) सकते हैँ। हमें दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ गोल अपनी आक्रामक हॉकी खेल कर ज्यादा से गोल करने की कोशिश करनी होगी।
ड्रैग फ्लिकर व स्ट्राइकर दीपिका सहरावत, नवनीत कौर गोलरक्षक सविता व सुशीला जैसी खिलाड़ियों की विश्व कप के लिए मौजूदगी भारतीय टीम में कितनी अहम रहेगी?
दीपिका सहरावत स्ट्राइकर होने के साथ टीम की अहम ड्रैग फ्लिकर भी हैं। दीपिका सहरावत और नवनीत कौर को खुद मैदानी गोल करने के साथ बराबर पेनल्टी कॉर्नर भी बनाने होंगे। दीपिका सहरावत का बतौर ड्रैग फ्लिकर और स्ट्राइकर रोल अहम रहेगा। आज किसी भी टीम की जीत में पेनल्टी कॉर्नर पर ड्रैग फ्लिकर का गोल करना भी कामयाबी की अहम कड़ी साबित होती हैं। दीपिका सहरावत ड्रैग फ्लिक बढ़िया लगाती भी हैं। ललरेमसियामी का बेशक टीम के कोच मराइन ने खास रोल तय किया होगा। स्ट्राइकर, मिडफील्डर और डिफेंडरों सभी एक इकाई के रूप में खेलेंगी तो भारत की महिला विश्व कप में पदक जीतने की हसरत पूरी होगी।





