हॉकी विश्व कप में पदक जीतने के लिए भारतीय टीम में हरेक को सर्वश्रेष्ठ देना होगा : ललित उपाध्याय

Everyone in the Indian team will have to give their best to win a medal at the Hockey World Cup: Lalit Upadhyay

  • हरमनप्रीत सर्वश्रेष्ठ, पर सभी को उनका साथ निभाना होगा
  • टीम आखिरी वक्त पर बाजी पलट कर जीतना जानती है

सत्येन्द्र पाल सिंह

नई दिल्ली : ‘कलाकार’ ललित उपाध्याय उसी बनारस नगरी से आते हैं, जिसने भारत और दुनिया को मोहम्मद शाहिद जैसा हॉकी का बेहतरीन कलाकार और विवेक सिंह जैसा बेहतरीन सेंटर हाफ दिया। हॉकी की कलाकारी और कौशल बनारस की विरासत है और ललित उपाध्याय ने बीते बरस अपनी हॉकी टांगने से पहले करीब एक दशक तक भारत के लिए 183 अंतर्राष्ट्रीय हॉकी मैच खेल कर 67 बेहतरीन गोल कर इसे आगे बढ़ाया। ललित ने अपनी हॉकी की कलाकारी से भारत को पिछले लगातार दो-टोक्यो(2020) और पेरिस (2024) -ओलंपिक में कांसा जिताने में अहम भूमिका निभाई। ललित भारत के लिए अपना आखिरी अंतर्राष्ट्रीय मैच 15 जून, 2025 को एफआईएच प्रो हॉकी लीग में खेला था। ललित भारत की 2018में आखिरी चैंपियंस ट्रॉफी और 2022 में बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में रजत तथा 2022 में हांगजू एशियााई खेलों में स्वर्ण और 2018 में जकार्ता में कांसा और 2017 में ढाका में एशिया कप में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम के सदस्य रहे। ललित उपाध्याय ने भारत के लिए अपने सीनियर अंतर्राष्ट्रीय हॉकी करियर का आगाज 2014 में हेग में हॉकी विश्व कप से किया और फिर 2018 में भुवनेश्वर और 2023 विश्व कप में भारत की नुमाइंदगी लेकिन उन्हें बस यह मलाल रह गया कि वह इनमें देश को कोई पदक नहीं जिता पाए। ललित उपाध्याय का मानना है कि एफआईएच हॉकी विश्व कप बेल्जियम और नीदरलैंड 2026 में हरमनप्रीत सिंह की अगुआई में शिरकत करने जा रही भारतीय पुरुष टीम में 51 बरस का सूखा खत्म कर 1975 के स्वर्ण पदक के बाद फिर पदक जीतने का दम है लेकिन इसके लिए टीम में हर किसी को अपना सर्वश्रेष्ठ देना होगा। ललित उपाध्याय को मॉडर्न हॉकी की बेहतरीन समझ है और एक दशक तक भारत के लिए खेल कर चाहे वह कोच रोलैंट ओल्टमैंस रहे हों, ग्राहम रीड, हरेन्द्र सिंह या फिर क्रेग फुल्टन सभी के लिए वह अपनी हॉकी कलाकारी के चलते तुरुप का इक्का रहे हैं

ललित उपाध्याय कहते है,‘ हमारी भारतीय हॉकी टीम का हाल का प्रदर्शन इस बात का गवाह है कि उसने पिछले दो ओलंपिक में कांसा जीतने सहित विश्व कप को छोड़ कर बेहतरीन प्रदर्शन किया। भारतीय टीम एशिया में चाहे वह एशियाई खेल हों, एशियन चैंपियंस ट्रॉफी और एशिया कप में निर्विवाद रूप से सर्वश्रेष्ठ रही है। हमारी टीम हॉकी में बड़े मंच पर अपनी अलग पहचान में सफल रही है। हमारी टीम ने हाल ही में जिस तरह ओलंपिक में अपना सर्वश्रेष्ठ दिया है वह इस बार हॉकी विश्व कप में अपना सर्वश्रेष्ठ देगी। हमारी भारतीय हॉकी टीम ने हाल ही में चाहे वह टोक्यो ओलंपिक हो या पेरिस ओलंपिक में कांसा जीत दिखाया कि उसे नामुमकिन को मुमकिन करना है। पिछले कई विश्व कप की नाकामी को भुला कर भारत के पास 2026 में हॉकी विश्व कप में पिछले 51 बरस से पदक न जीत पाने के दुस्वप्न को तोड़ कर इस बार पदक जीतने कर मुमकिन करने की बारी है। हमारी हॉकी टीम विश्व कप में इस बार अपना सर्वश्रेष्ठ देगी और इसके लिए हमें उसे शुभकामनाएं देनी चाहिए और उम्मीदों का बेवजह का बोझ नहीं डालना चाहिए। भारत ने 1975 में आखिरी बार हॉकी विश्व कप में स्वर्ण पदक जीता था। मुझे पूरा भरोसा है ‘सरपंच’ साहब हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी में भारत 51 बरस के सूखे को खत्म कर हॉकी विश्व कप 2026 में पदक जरूर जीतेगा, लेकिन इसके लिए टीम में हरेक को अपना सर्वश्रेष्ठ देना होगा। भारत की खुशकिस्मती है कि कप्तान हरमनप्रीत सिंह के रूप में उसके पास दुनिया का ऐसा बेहतरीन ड्रैग फ्लिकर और फुलबैक है जो पेनल्टी कॉर्नर पर गोल करने के साथ खुद मैदानी करने और कराने के साथ लंबे स्लैप और स्कूप से दुनिया की किसी भी रक्षापंक्ति को भेद कर गोल करने का दम रखता है। दद्दा ध्यानचंद(185 अंतर्राष्ट्रीय मैच, 570 गोल), बलबीर सिंह दोसांज (61 अतर्राष्ट्रीय मैच, 246 गोल) के बाद मॉडर्न हॉकी में हरमनप्रीत सिह (258 अंतर्राष्ट्रीय मैच, 218 गोल) भारत के लिए तीसरे सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी हैं। हरमनप्रीत सिंह ने फुलबैक की परिभाषा ही बदल दी है। बेशक हरमनप्रीत सिंह इस हॉकी विश्व कप में भारतीय पुरुष हॉकी टीम के तुरुप के इक्के रहने वाले हैं। अब से पहले विश्व कपों में भारतीय टीम से यह गलती होती रही है कि हम किसी एक खिलाड़ी पर उम्मीदों का सारा बोझ डालते रहे हैं। हरमनप्रीत सिंह की लीडरशिप पर भरोसा कर भारत को उनको खुल कर खेलने देना चाहिए और टीम में सभी को उनका साथ निभाना होगा।’

वह कहते हैं, ‘ भारतीय टीम में हम सीनियर जूनियर बात करते है। यह टीम गई सीनियर और नौजवान के भेद को भुला कर सभी भारत के लिए बेहतरीन प्रदर्शन को बेताब हैं। भारतीय टीम ने ओलंपिक सहित बड़े टूर्नामेंटों में दिखाया है कि वह आखिरी वक्त पर बाजी पलट कर जीतना जानती हैं। विवेक सागर और दिलप्रीत दोनों अभी मात्र 26बरस के हैं और नौजवान हैं भारत के लिए वह दो ओलंपिक चैंपियंस ट्रॉफी और एशियन ट्रॉफी जैसे सभी बड़े टूर्नामेंट खेल चुके हैं। वहीं गोलरक्षक सूरज करकेरा भी करीब एक दशक से भारत के लिए अंतर्राष्ट्रीय हॉकी खेल रहे हैं और 2017 सहित भारत के तीन एशिया कप और 2018 के राष्ट्रमंडल खेलों में खेल चुके हैं। भारतीय टीम में सही मायनों में नौजवान खिलाड़ी के रूप अर्जुन आदित्य ललगे, राजिंदर सिंह और गोलरक्षक मोहित एचएस है और इन तीनों का यह पहला हॉकी विश्व कप होगा। ये तीनों ही भारतीय सीनियर हॉकी टीम के साथ पिछले करीब डेढ़ दो बरस से बराबर खेल रहे और टीम की हॉकी शैली को समझ चुके हैं। हमारे सभी खिलाड़ी खासे अनुभवी हैं और कप्तान हरमनप्रीत सिंह, मनदीप सिंह, मनप्रीत सिंह, अभिषेक नैन व सुखजीत सिंह के रूप में खासे अनुभवी खिलाड़ी शामिल हैं। विश्व कप के लिए चुनी भारतीय हॉकी टीम खासी संतुलित है।’

ललित उपाध्याय कहते हैं, ‘ हमे अपने पूल डी में सबसे बड़ी चुनौती बेशक इंग्लैंड से मिलेगी, हालांकि विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में आप किसी भी टीम को हल्के में लेने की भूल नहीं कर सकते हैं। भारत को अपने पूल में शीर्ष पर रहने के लिए इंग्लैंड, चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान और वेल्स से पार पाना होगा। भारत का पहला लक्ष्य बेशक इंग्लैंड के खिलाफ जीत के साथ अपने पूल में शीर्ष स्थान पर रहेगा। हमारी भारतीय टीम के लिए अच्छी बात यह है कि उसने इंग्लैंड के खिलाफ चाहे वह ओलंपिक हो, विश्व कप या फिर एफआईएच प्रो लीग सभी में बराबर बढ़िया प्रदर्शन किया है। हमने इंग्लैड को पहले टोक्यो और पेरिस लगातार दो ओलंपिक में हराया है। एफआईएच प्रो लीग में इंग्लैंड से दोनों मैच बेहद करीबी रहे। भारत और इंग्लैंड ही नहीं बल्कि इस विश्व कप में वही टीम जीतेगी जो मौकों को भुनाएगी। भारत को विश्व कप में जीतने के लिए पूरी तरह फोकस, प्रतिबद्ध रहने के साथ मौकों को भुनाना होगा। आज की हॉकी में खेल का हर क्वॉर्टर और हर मिनट अहम है इसमें प्रतिद्वंद्वी टीम की शतरंज की तरह बदली रणनीति के मुताबिक खेल कर गोल करने और पेनल्टी कॉर्नर बनाने के मौके बनाने के साथ उन्हें भुनाना भी होगा।। हमारी टीम चाहे वह कप्तान हरमनप्रीत हो, अभिषेक , मनदीप या मनप्रीत किसी एक खिलाड़ी विशेष पर निर्भर नहीं है। भारत को विश्व कप जीतना है तो टीम में सभी को पूरी शिद्दत से खेलना होगा। मेरी टीम के सबसे तेज तर्रार और कामयाब स्ट्राइकर अभिषेक को बस यही सलाह है कि वह पूरी शिद्दत से पूरे फोकस होकर खेलेंगे तो बेशक इस बार विश्व कप में भारत को बहुत आगे तक ले जा सकते हैं। आज के भारतीय हॉकी खिलाड़ी खुशकिस्मत हैं उन्हें चाहे हॉकी इंडिया हो, भारतीय खेल प्राधिकरण (साई)और केंद्र हर तरह की मदद मिली रही है। ऐसे में बस भारतीय हॉकी टीम के खिलाड़ियों को अपनी योजना को मैदान पर अमली जामा पहनाना चाहिए और इससे देश की विश्व कप में पदक जीतने की हसरत इस बात पूरी होनी चाहिए।