- हमारी टीम को ज्यादा मैदानी गोल करने की जरूरत
- भारतीय टीम मैच दर पूरा ध्यान जीत पर लगाना चाहिए
- -यूरोपीय टीमों के जवाबी हमलों के खिलाफ मध्य और रक्षापंक्ति को चौकस रहना होगा
सत्येन्द्र पाल सिंह
नई दिल्ली : राजिंदर सिंह सीनियर अपने जमाने के भारतीय हॉकी टीम के बेहतरीन फुलबैक और पेनल्टी कॉर्नर हिटर और जूनियर और सीनियर राष्ट्रीय हॉकी टीम के चीफ कोच रहे हैं। 1975 में पहली और आखिरी बार हॉकी विश्व कप जीतने के बाद मुंबई में हुए विश्व कप में अर्जुन और द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता राजिंदर सिंह के सबसे ज्यादा 12 गोल ने भारत ने पांचवां स्थान पाया था। राजिंदर सी 1980 में मास्को ओलंपिक में स्वर्ण पदक व 1982 के एशियाई खेलो में रजत पदक जीतने वाली भारतीय टीम के अहम पेनल्टी कॉर्नर हिटर रहे ही वह फिलहाल राउंड ग्लास हॉकी एकेडमी के तकनीकी निदेशक है। बतौर कोच राजिंदर सिंह के मार्गदर्शन में भारत ने 2001 में पहली बार जूनियर हॉकी विश्व कप और 2003 में एशिया कप जीता था। अब 15 से 30 अगस्त तक बेल्जियम और नीदरलैंड 2026 में होने वाले हॉकी विश्व कप में राजिंदर सिंह को भारतीय पुरुष हॉकी टीम के सेमीफाइनल में पहुंचने की पूरी उम्मीद है।
राजिंदर सिंह कहते हैं,‘ मुझे अपनी भारतीय पुरुष हॉकी टीम के 2026 के विश्व कप में सेमीफाइनल में पहुंचने का पूरी उम्मीद है। मैं एफआईएच प्रो हॉकी लीग के प्रदर्शन को बहुत तवज्जो नहीं देता हूं। हमारी भारतीय पुरुष हॉकी टीम के ज्यादातर खिलाड़ी लंबे समय से साथ साथ खेल रहे हैं और एक दूसरे के खेल को बेहतर ढंग से समझते । हमारी टीम की आपस में जुगलबंदी बेहतरीन है। मैं भारत के सेमीफाइनल में पहुंचने का उम्मीद इसलिए कर रहा हूं क्योंकि दुनिया की बाकी शीर्ष टीमों भी भारत से कोई बहुत उपर नहीं है। हॉकी विश्व कप में भारत के बस जरूरत होगी मौकों को ज्यादा से ज्यादा भुनाने की। भारतीय हॉकी टीम को सरकार और फेडरेशन (हॉकी इंडिया) से जिस तरह हर मुमकिन सहयोग और सुविधाएं मिल रही है और जिस तरह टीम को बराबर अभ्यास के बेहतरीन मौके मिले हैं उससे हमारी टीम विश्वास से भरी नजर आती है। हमारा भारतीय टीम की मध्यपंक्ति और रक्षापंक्ति खासी मजबूत है। मेरा मानना है कि हमारी टीम को ज्यादा मैदानी गोल करने की जरूरत है। हम जितने ज्यादा मैदानी गोल करेंगे और पेनल्टी कॉर्नर बनाएंगे उतना ही हमारे लिए बेहतर होगा क्योंकि पेनल्टी कॉर्नर पर हमारे पास कप्तान हरमनप्रीत सिंह, जुगराज सिंह और अमित रोहिदास के साथ राजिंदर सिंह के रूप में चार बेहतरीन ड्रैग फ्लिकर हैं।’
वह कहते हैं, ‘हमारी पास अभिषेक नैन, सुखजीत सिंह, दिलप्रीत सिंह और मनदीप सिंह के रूप में तेज तर्रार अग्रिम पंक्ति के साथ हार्दिक सिंह, मनप्रीत सिंह और विवेक सागर के रूप में अनुभवी मध्यपंक्ति और खुद कप्तान दुनिया के सर्वश्रेष्ठ ड्रैग फ्लिकर और फुलबैक में से एक हरमनप्रीत सिंह के साथ अमित रोहिदास, जुगराज सिंह जैसे ड्रैग फ्लिकर और सुमित जैसा जरूरत के वक्त आगे ओवरलैप करने वाला फुलबैक के रूप में भरोसेमंद रक्षापंक्ति है। दोनों गोलरक्षक मोहित और सूरज करकेरा भी भरोसेमंद नजर आते हैं। हमारी अग्रिम पंक्ति को खुद ज्यादा से ज्याद मैदानी गोल करने और पेनल्टी कॉर्नर बनाने पर ध्यान लगाने की जरूरत है क्योंकि हमारे पास खुद कप्तान हरमनप्रीत सिंह के रूप में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ ड्रैग फ्लिकर में से एक हरमनप्रीत सिंह जो की हमारी सबसे बड़ी ताकत है।‘
राजिंदर सी कहते हैं, ‘हमारी टीम को पुरुष हॉकी विश्व कप में मैच दर अपना पूरा ध्यान जीत पर लगाना चाहिए। चीफ कोच सहित हमारे टीम प्रबंधन के ध्यान इस बात का रखना होगा कि हमारे खिलाड़ी मैदान पर मनोवैज्ञानिक रूप से मजबूत रहे। बेशक हमारी रक्षापंक्ति मजबूत है। बावजूद इसके हमारी रणनीति यह होनी चाहिए हम शुरू से प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ ज्यादा मैदानी गोल कर और पेनल्टी कॉर्नर बना उस दबाव बनाए। जिससे हमारी प्रतिद्वंद्वी हम पर हमले की बजाय अपने किले की चौकसी पर ध्यान लगाए। आज के जमाने में मैच की रणनीति मैदान से बाहर उसका कोच शतरंज की तरह रणनीति की बिसात बैठाकर बनाता है। हमारे ड्रैग फ्लिकर कप्तान हरमनप्रीत सिंह, जुगराज सिंह, अमित रोहिदास को भी आज प्रतिद्वंद्वी टीम के रशर के विडियो देख कर उसी के मुताबिक अपनी रणनीति बनाकर इसमें वेरिएशंस के साथ अपने ड्रैग फ्लिक लगाने चाहिए।‘
वह कहते हैं,‘ आज की मॉडर्न हॉकी में कोई भी भी कोच आपको बेसिक्स नहीं सिखाता बल्कि जो भी आपकी ताकत उसे और मजबूत करने में मदद करता है। विश्व कप में हर टीम नए जोश और नई रणनीति के साथ आती है। मुझे अपनी भारतीय टीम में कोई खामी नहीं नजर आती है। पेनल्टी कॉर्नर पर भारतीय ड्रैग फ्लिकर गोल करने में सक्षम है ही टीम के स्ट्राइकर को पूरे तालमेल से खेल मैदानी गोल करने और पेनल्टी कॉर्नर बनाने का हरमुमकिन मौका बनाना और भुनाना होगा। विश्व कप में खासतौर पर यूरोपीय टीमों के जवाबी हमलों के खिलाफ हमारी मध्यपंक्ति और रक्षापंक्ति को पूरी तरह चौकस रहने की है। नए जमाने की हॉकी में एक फॉरवर्ड का काम महज गोल करना ही नहीं बल्कि प्रतिद्वंद्वी के हमले टैकल और रिटैकल कर गेंद को अपनी डी से बाहर निकाल खुद अपने कब्जे में लेकर आगे बढ़ना है। मैदान में खेल के स्टार्ट और रिस्टार्ट के वक्त टीम के खिलाड़ी को अपने किले की चौकसी के लिए अपने मअनुभव का इस्तेमाल कर खेलना होगा। मेरा मानना है कि हमारी मौजूदा भारतीय टीम यह बात जानती है। यूं भी आज कोच का काम मैदान से बाहर महज 15 फीसदी है बाकी तो खिलाड़ी आपस में तालमेल से खेल उसकी रणनीति को अमली जामा पहना जीत दिलाने की राह खुद बनाते हैं। मैं भारतीय हॉकी टीम से एकाग्र और एकजुट होकर खेल मैदान से बाहर के हर शोर को भुलाकर विश्व कप में बेहतरीन प्रदर्शन की उम्मीद करता हूं।‘





